आजम खान कभी सदन की शान हुआ करते थे, वक्त ने कहां पहुचा दिया। पुरानी फोटो मिल गई सोचा शेयर कर दूं, जब कभी अवसर मिले कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए कि भविष्य में पछताना पड़े।
- डी.एस. परिहार हमारे समाज का बेहद कड़वा सच है वैश्यावृत्ति। कानून के प्रतिबंध के बावजूद भी वैश्यावृत्ति का व्घ्यापार सभी जगह खूब फलता-फूलता है। ग्रहों की दशा का प्रभाव भी महिलाओं के देह मंगल और शुक्र ऐसे दो ग्रह है, जब इनकी युति बनती है तो वैवाहिक जीवन तो डिस्टर्ब होता ही है, साथ ही गैर महिला के प्रति पुरूषों का आकर्षण बढ़ता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कुंडली में ग्रहों का खास योग किसी महिला को वेश्यावृत्ति की ओर धकेल सकता है। यही नहीं, ऐसे ज्यादातर मामलों में महिला को उसके प्रेमी द्वारा बहला-फुसलाकर देह व्यापार के गंदे धंधे में धकेल दिया जाता है। यदि कुंडली में प्रेम प्रसंग और धोखेबाज प्रेमी का योग हो, महिलाओं के व्यापार में फंसने का ज्योतिषीय कारण होता है। ग्रहों की निम्न विशेष स्थिति में महिलाएं देह व्घ्यापार करने पर मजबूर हो जाती हैं। 1. जिस युवक युवती की कुंडली में चैथे भाव में शुक्र तथा मंगल इकट्ठे होंगे , तो वह अत्यधिक कामुक होगा । किसी नजदीकी सम्बन्धी से सेक्स सम्बन्ध होने के कारण उसका अपना ग्रहस्थ जीवन डंावाडोल होता है। चतुर्थ भाव सुख स्थान का है । 2.-जिसकी कुंडली में चैथे ...
मानव का सम्पूर्ण जीवन ही एक संघर्ष है :- हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम, तू क्यों सोचे बंदे जब सब की सोचे राम’ को अपने जीवन का मूल मंत्र मानकर यदि हम अपने जीवन को जीने लगे तो जीवन में आने वाली कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना हम आसानी से कर सकते हैं। वास्तव में मानव का सम्पूर्ण जीवन ही एक संघर्ष है। इसमें हमेशा उतार-चढ़ाव और सुख-दुख लगा रहता है। लेकिन कहते हैं कि जिनके पास साहस और प्रभु की कृपा है, वो कभी भी जीवन में असफल नहीं हो सकता है। इतिहास में भी उन्हीं के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हंै जिन्होंने कठिन समय में भी साहस एवं प्रभु की शरण का परित्याग नहीं किया। ईश्वर से दूर होने पर जीवन में संघर्ष बढ़ जाते हैं :- प्रत्येक बालक ईश्वर की सर्वोच्च कृति है। वह एक दयालु, पवित्र और ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित हृदय लेकर इस पृथ्वी पर जन्म लेता है। लेकिन धीरे-धीरे खराब वातावरण और उद्देश्यविहीन शिक्षा के कारण बालक के जीवन में चार चीजंे पैदा हो जाती हैं- (1) सबसे पहले बालक का ईश्वर से संबंध कट जाता है (2) ईश्वर से कटकर बालक अज्ञानता के अन्धेरे में चला जाता है (3) जिसके कारण उसे सही-गलत का ज्ञान ...
- डी.एस. परिहार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र ज्योतिष शास्त्र के महान प्रवर्तक महर्षि भृगु जी ने पीड़ित मानवता के उद्धार हेतु अपनी अतीन्द्रिय क्षमता और भगवान विष्णु द्वारा प्राप्त दिव्य दृष्टि से सतयुग में समुद्र मंथन के पूर्व भृगु संहिता नामक विशाल ग्रन्थ लिखा था। बनारस के भृगुशास्त्री स्व. ब्रह्म गोपाल भादुड़ी के अनुसार भृगु संहिता जन्मतः, प्रश्न विज्ञान, स्वर विज्ञान और गर्भाधान लग्न पर आधारित है। हांलाकि कई आधुनिक ज्योतिषी, ज्योतिषी उपचारों पर विश्वास नही करते हैं। किन्तु यह भी सच है। कि कर्म और पूर्व जंम पर आधारित ज्योतिष के अनेक प्राचीन ग्रन्थों मे जैसे बृहत पाराशर होरा शास्त्र, प्रश्न मार्ग, कर्म विपाक संहिता, नाड़ी ग्रन्थ, रावण संहिता व भगु संहिता आदि में पश्चाताप स्वरूप पूर्व जंम मे किये गये पापों से मुक्ति के लिये विभिन्न उपचारों, कर्मकाण्डों, मंत्रोपचारों, देवदर्शन, देवपूजन, व्रत, दान औषधि प्रयोग का वर्णन है। आज भृगु संहिता एक दुर्लभ और अप्राप्य ग्रन्थ है। मेरठ, प्रतापगढ व होशियारपुर के अलावा कही नही पाया जाता है। इस ग्रन्थ में मंगली दोष, साढे साती शनि, शनि दोष, मारकेश की दशा का वर्...