दिव्या भारती की मौत का रहस्य
- डी एस परिहार
दिव्या भारतीय 25 फरवरी 1974 - 5 अप्रैल 1993द्ध एक भारतीय अभिनेत्री थींए जिन्होंने 1990 के दशक की शुरूआत में हिंदी और तेलुगु पिक्चर्स में अभिनय किया था। वह अपने अभिनय बहुमुखी प्रतिभाए जीवंतता और सुंदरता के लिए अच्छी तरह से जानी जाती थींए और उन्हें अपने समय की सबसे लोकप्रिय और उच्चतम भुगतान वाली अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है।दिव्या भारती ने शोला और शबनम की शूटिंग में गोविंदा के माध्यम से निदेशक साजिद नदियादवाला से मुलाकात कीए और उन्होंने 10 मई 1992 को शादी की। दिव्या भारती और साजिद की शादी एक निजी समारोह में हुई थीए वह अपनी शादी के बाद इस्लाम में परिवर्तित हो गई और अपना नाम बदलकर सना नादिदवाला कर दिया। साजिद नदीदवाला के साथ दिव्या भारती की शादी को गुप्त रखा गया था ताकि यह उनके समृद्ध फिल्मी कैरियर को प्रभावित न करेए जो उस समय चरम पर था। मृत्यु का समय उस मनहूस दिन दिव्या भारती ब्रोकर के साथ बांद्रा पश्चिम में नेप्च्यून अपार्टमेंट में गए थे जिसमे वह खरीदने पर विचार कर रही थी। वह इतनी घर की खरीद से बहुत खुश थी। इसके अलावाए 5 अप्रैल 1993 के देर शाम के घंटों मेंए दिव्य भारती तुलसी इमारतोंए वर्सोवाए अंधेरी पश्चिम यमुंबईद्ध में अपने पांचवें मंजिल के अपार्टमेंट की बालकनी खिड़की से गिर गईं। जब उसके मेहमान नीता लुल्लाए नीता के पति श्यामए दिव्य की नौकरानी अमृता और पड़ोसियों को एहसास हुआ कि वह क्या हुआ थाए उसे रक्त के पूल में कूपर अस्पताल में आपातकालीन विभाग में एम्बुलेंस में पहुंचाए जहां उनकी मृत्यु हो गई। मौत का कारण गंभीर सिर की चोटें और आंतरिक रक्तस्राव था।
दिव्या भारती का जन्म विवरण
उसका जन्म तारीख 25 फरवरी 1974ए मुंबई में 11ण्20 बजे थी। गई उसका लग्न तुला और चन्द्र मीन राशि रेवती तृतीय चरण में है। तुला लग्न 19 डिग्री तृतीय मे धनु मे राहूए मकर मे लग्नेश शुक्र कुंभ मे सूर्य गुरू व बुध छठे मीन का चन्द्रए वृष मे मंगल मिथुन मे केतु व शनि सिंह मे गुरू बुध व शनि वक्री है। बुध महादशा 7 वर्ष 10 माह 3 दिन ह।ै बुध व शनि मे राशि परिवर्तन है। किया गया हैए उसे पीने की आदत भी थी। चंद्रमा इतना पीड़ित और विशेष रूप से इतनी कम उम्र की मृत्यु क्यों हुईघ्
लग्न व चन्द्र से अष्ठमेश शुक्र पाप कर्तरी मे है। जो अल्पायु योग देता है। आयु कारक वक्री शनि से उन्हें भी अल्पायु बनाया बुध व शनि मे राशि परिवर्तन है। परिवर्तन से बुध मिथुन मे गया वहाँ केतु से मिला बुध केतु ने लव एफेययर दिया इस योग पर गुरू की दृष्टि ने एफेयर को लव मैरिज मे बदला अष्ठमेश शुक्र चतुर्थ भाव में पाप कर्तरी मे है। जो भीषण दुर्घटना का योग बना रहा है। बुध मिथुन मे मे गया तो गत जंम के कार्मिक ऋण का शिकार हुआ जिसने भी प्राणद्यातक दुर्घटना दी फेट एंड फोरचून के संपादक तथा कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट के लेखक प्रख्यात ज्योतिशी स्व माणिक चन्द्र जैन के अनुसारए त्रिकेषए द्वादेषए वक्री ग्रहए अश्ठमेषए तथा राहू केतु तथा राहू केतु के राषि स्वामी ग्रह कार्मिक ग्रह होते है। जो पूर्व जंम के कठिन पापों को बताते है तथा जीवन मे भारी दुर्भाग्यए दुःखद व हिसंक घटनायें जैसे घातक एक्सीडेंटए हत्याए आत्महत्याए रेप हो जाने जैसे गंभीर फल देते है। दिव्या के जमांक मे कार्मिक द्वादेष बुध कार्मिक ग्रह केतु से युत है। बल्कि केतु का राषि स्वामी ग्रह बुध केतु से युत है। इस अति घातक योग ने जातिका की हिंसक हत्या करा दी।
मृत्युकालीन गोचर. लग्नेश से अष्ठमेश व चन्द्रेश लग्नेश शुक्र नवांश मे कुंभ मे था 5 अप्रैल 1993 को मृत्यु के समय की शुक्र की नवांशगत राशि कुंभ से शनि का गोचर मृत्यु योग बना रहा था स्त्री जातिका कारक जंमस्थ शुक्र से अष्ठमेश सूर्य कुंभ मे गया है। मृत्यु के समय कुभ से ही शनि निकल रहा था जंमस्थ राहूध्केतु से त्रिकोण मे गुरू का गोचर या जंमस्थ गुरू से त्रिकोण मे राहूध् केतु का गोचर मृत्यु योग देता है। मृत्यु के समय गुरू कन्या राशि मे वक्री था जो सिंह का फल देगा जो जंमस्थ धनु राहू से त्रिकोण मे निकल रहा था और स्पष्ठ मृत्यु योग बना रहा था चन्द्र से द्वितीय राहू है। जो मंगल पर बंधन योग बना रहा था।