बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में कमोडोर विजय शंकर बबले का डिफेंस आवर है, संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक संस्मरण

- राजेन्द्र कुमार

झांसी में विश्वविद्यालय में आयोजित डिफेंस आवर कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) से सम्मानित कमोडोर विजय शंकर बबले (सेवानिवृत्त) ने अपने जीवन के प्रेरक अनुभव और संघर्ष की कहानियाँ साझा कीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रमुख अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए, जो कार्यक्रम की सफलता और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। 

इस अवसर पर कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कमोडोर विजय शंकर बबले का स्वागत करते हुए कहा, हमारे विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व का क्षण है कि एक अद्वितीय व्यक्तित्व, कमोडोर बबले, जिन्होंने भारतीय नौसेना और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है, आज हमारे बीच उपस्थित हैं। आपका जीवन न केवल अनुशासन, नेतृत्व और प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उन्होंने कहा, कमोडोर बबले जैसे महान व्यक्तित्व से मिलने और उनके अनुभव सुनने का अवसर हमारे छात्रों के लिए उनके जीवन को बेहतर दिशा देने में सहायक होगा। उनके संघर्ष, सफलताओं से सीखने की भावना, और उच्च आदर्शों की प्राप्ति की कहानी हमारे कैडेट्स और विद्यार्थियों को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देगी। 

प्रो. पांडेय ने कमोडोर बबले के जीवन मूल्यों और योगदान की सराहना करते हुए कहा, आपने हमें यह सिखाया है कि असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की जिद और लगन ही सच्ची सफलता का आधार है। आपका मार्ग दर्शन हमारी नई पीढ़ी को देश सेवा और अपने जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने कार्यक्रम में कमोडोर बबले को विश्वविद्यालय परिवार की ओर से धन्यवाद भी दिया। कमोडोर विजय शंकर बबले ने अपने जीवन के प्रारंभिक दिनों और एनसीसी के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे इन अनुभवों ने उन्हें अनुशासन, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण बातें सिखाईं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, आपके माता-पिता आपके सबसे बड़े मार्गदर्शक होते हैं, उनका सम्मान करें और उनके अनुभवों से सीखें। उन्होंने अपने एसएसबी (सेवा चयन बोर्ड) के अनुभवों को भी साझा किया, जिसमें कई बार असफल होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका संदेश था, हर असफलता एक नई सीख होती है, और हर कठिनाई आपको अपनी मंजिल के करीब ले जाती है।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम के प्रेरक शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा, सपने देखो और उन्हें पूरा करने का साहस करो, क्योंकि अगर आप इसे सपने में देख सकते हैं, तो आप इसे कर सकते हैं।

कमोडोर बबले ने एसएसबी की प्रक्रिया और तैयारी के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें आत्मविश्वास, ईमानदारी और अनुशासन की अहमियत को उजागर किया। इसके अलावा, उन्होंने अपनी लिखी एक प्रेरक कविता भी साझा की, जो उन्होंने अपने शुरूआती एसएसबी में प्रस्तुत की थी, और इसके माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय का महत्व समझाया। इस अवसर पर कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने डिफेंस आवर में कमोडोर विजय शंकर बबले (सेवानिवृत्त), वीएसएम द्वारा साझा किए गए जीवन के अनुभवों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा, कमोडोर बबले का जीवन यह सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य की ओर बढ़ने का साहस ही सफलता का असली आधार है। उनका जीवन अनुशासन, नेतृत्व और निष्ठा के मूल्यों का प्रतीक है। युवाओं को अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए, अपने सपनों को पहचानना चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए निडरता और लगन से आगे बढ़ना चाहिए। श्री सिंह ने छात्रों से अपील की, आप सभी को कमोडोर बबले के जीवन के अनुभवों से प्रेरित होना चाहिए और कभी हार न मानने की भावना को अपनाना चाहिए। उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानियां छात्रों को जीवन में सफलता की दिशा में मार्गदर्शन देंगी और इस प्रेरणा से हमारे छात्र अपने लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम होंगे।

मेजर प्रो. एस.के. कबिया ने डिफेंस आवर पर कहा के डिफेंस आवर का आयोजन हमारे छात्रों के लिए प्रेरणा और ज्ञान का एक अद्भुत अवसर है। कमोडोर विजय शंकर बबले (सेवानिवृत्त), वीएसएम जैसे सम्मानित और अनुभवी व्यक्तित्व की उपस्थिति ने विश्वविद्यालय के वातावरण को पहले ही ऊर्जा और उत्साह से भर दिया है। उनकी उपस्थिति मात्र से ही पूरे विश्वविद्यालय में जोश और प्रेरणा की लहर दौड़ गई है। श्जय हिंदश् की गूंज ने पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया है।

प्रो काबिया ने कहा, कमोडोर बबले जैसे प्रेरणादायक व्यक्तित्व से सीखने का यह मौका न केवल हमारे युवाओं को रक्षा सेवाओं के प्रति जागरूक करेगा, बल्कि उन्हें अनुशासन, नेतृत्व और देशभक्ति के मूल्यों से भी परिचित कराएगा। एनसीसी का उद्देश्य ही युवाओं में आत्मनिर्भरता, साहस और देशसेवा की भावना का निर्माण करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र न केवल रक्षा सेवाओं के प्रति अपने दृष्टिकोण को विस्तारित करेंगे, बल्कि अपने जीवन में एक नई ऊर्जा और दिशा भी पाएंगे। मैं सभी छात्रों से आग्रह करता हूं कि वे इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाएं और हमारे अतिथि वक्ता के अनुभवों और प्रेरणा से अपने जीवन को समृद्ध बनाएं। कर्नल प्रशांत कक्कड़ ने डिफेंस आवर कार्यक्रम पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर छिपी क्षमता को जागृत करने का एक प्रभावशाली मंच है। कमोडोर विजय शंकर बबले (सेवानिवृत्त), वीएसएम की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक अवसर बना दिया है। उनकी कहानी केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सच्ची सफलता अनुशासन, दृढ़ संकल्प और आत्मबल में निहित है। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा, युवाओं में साहस, निष्ठा और नेतृत्व के गुणों को प्रोत्साहित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। रक्षा सेवाओं में शामिल होना केवल एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि अपने देश के प्रति कर्तव्य निभाने का सर्वोच्च अवसर है। कर्नल कक्कड़ ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, आप ही देश के भविष्य हैं और आपकी ऊर्जा ही भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। जय हिंद की गूंज, जो पूरे विश्वविद्यालय में सुनाई दी, यह दिखाती है कि यह जुनून सही दिशा में बढ़ रहा है। हितिका यादव, आईक्यूएसी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने डिफेंस आवर कार्यक्रम पर कमोडोर विजय शंकर बबले (सेवानिवृत्त), वीएसएम का परिचय देते हुए कहा, वह एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने भारतीय नौसेना में अपने अनुकरणीय सेवा कार्य से देश का मान बढ़ाया है। कमोडोर बबले न केवल एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं, बल्कि एक कुशल नेतृत्वकर्ता, शिक्षक और प्रेरक वक्ता के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। अपने सेवा काल में उन्होंने अनुशासन, निष्ठा और नेतृत्व के आदर्श प्रस्तुत किए, जो आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं। रक्षा क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के साथ-साथ एसएसबी प्रक्रिया और युवा प्रशिक्षण में उनकी सक्रिय भूमिका सराहनीय हैस इस अवसर पर डा. अतुल खरे, अनिल बोहरे, प्रो. अर्चना वर्मा, प्रो. बी.के. खरे, डा. नूपुर गौतम, डा. ममता सिंह, डा. अमरजोत, डा. प्रियंका अग्रवाल, डा. शिल्पा मिश्रा, डा. गजल अहमद, हेमंत चंद्रा, हितिका यादव, डा. आशीष वर्मा, डा. संजय निबोरिया, चंद्रभान प्रजापति, जितेंद्र कुमार, अनिकेत, क्रेडिट अभिषेक गोस्वामी, अभिषेक राजोरिया, नकुल झा, सीनियर अंडर आफिसर सत्यम सिंह, अंडर आफिसर अभय प्रताप, अंडर आफिसर अंकित यादव, और एनसीसी कैडेट्स ने कार्यक्रम में भाग लिया।




 

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जन्म कुंडली में वेश्यावृति के योग

भृगु संहिता के उपचार

हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम!