ताकि आप अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें
- अमरजीत वर्मा
हमारा पुलिस से प्रतिदिन सम्पर्क होता है। हम उन्हें अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा करते हुए, भीड़ को नियंत्रित करते हुए, गवाही देते हुए, यातायात को नियंत्रित करते हुए, थानों में शिकायत दर्ज करते हुए, लोगों को अदालत तक पहुंचाते हुए या अपराधियों और आंतकवादियों से लड़तें हुए ऐसे अनेक काम करते हुए देखते हैं। हम समाचार पत्रों, या टी.वी. के माध्यम से या फिर आपसी बातचीत द्वारा भी पुलिस के बारे में काफी कुछ सुनते हैं। पुलिस के बारे में हर व्यक्ति की अपनी एक राय होती है और अक्सर ये राय प्रशंसा भरी नहीं होती। लेकिन वास्तव में ज़्यादा तर लोग पुलिस के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं। लोकतंत्र में पुलिस सत्तारूढ़ सरकार की एजेन्ट नहीं होती जिसे लोगों को दबाने और नियत्रण में रखने के लिए इस्तेमाल किया जाए। इसके बजा, यह फायर ब्रिगेड या राजस्व विभाग के समान एक अनिवार्य सेवा है जिसका कर्तव्य कानून के अनुसार हम सब को सुरक्षा प्रदान करना है। अन्य सरकारी अधिकारियों की तरह पुलिस कर्मी भी जनता की सेवा के लिए नियुक्त लोक सेवक हैं जिनका वेतन नागरिक अदा करते हैं। जैसे कि पुलिस का हमारे प्रति कर्तव्य है ठीक वैसे ही लोगों का पुलिस के प्रति भी कर्तव्य है। एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य केवल पुलिस से डरना या फिर उन्हें नापसन्द करना या फिर परेशानी के समय ही उनके पास जाना नहीं है। कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नागरिक और पुलिस को मिलकर कार्य करना होगा। उनके कार्यों और चुनौतियों को समझना, वे क्या करते हैं और कैसे करते हैं यह जानना, उनका संगठन कैसा होता है यह पहचानना और उनकी शक्तियों की सीमाओं और कर्तव्यों को समझना अनिवार्य है। हमारे लिए हमारे अपने अधिकारों और कर्तव्यों को जानना भी अनिवार्यहैताकि न तो पुलिस और न ही कोई नागरिक कानून को तोड़े और बचकर निकल जाए। ऐसी स्थिति को ही कानून का शासन कहा जाएगा। भारतीय मानवाधिकार संगठन के साथ इस बारे में आपको जानकारी देने की एक सरल गाइड है। जानकार होने से ही हम आत्मविश्वास के साथ आवाज उठा सकते हैं। बिगडे हुए हालात तभी बदलेंगे जब हम आवाज उठाएंगे। भारतीय मानवाधिकार संगठन का गठन इस उम्मीद से किया गया है ताकि आप अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें जिससे आपके अधिकारों का हनन न हो।