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अन्टार्कटिका मे मिला नाजी स्वास्तिक
January 25, 2020 • सभार - वाराह वाणी

30 जनवरी, 2012 को रूसी वैज्ञानिकों ने रूसी राज्य मीडिया के द्वारा विष्व को अपने ऐतिहासिक अभियान के बारे में बताया, रूसी वैज्ञानिको ने अन्टार्कटिका में जलमग्न संसार की विषालतम वोस्तोक झील मे 3,768 मीटर तक ड्रिल किया जिसे गत 20 मिलियन वर्षों से अछूता माना गया था जिसमे अंडरवाटर वीडियो कैमरे ने 30 जनवरी को एक 100 मीटर ऊँचे और चैड़े सुनहरे स्वाति को खोजा चर्चा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के समय 1945 मे नाजी दक्षिण धु्रव की ओर चले गये थे जर्मन जनरल ग्रैण्ड कार्ल डोन्टिज़ ने भी इस बात को स्वीकार किया था कि जर्मन पनडुब्बी दस्तों ने दुनिया के दूसरे सिरे अन्टार्कटिका की वोस्तोक झील की तली मे एक अभेद नाजी किले का निर्माण किया जर्मन पुराभिलेख बताते है। कि अप्रैल 1945 मे मित्र राष्ट्रों के समक्ष जर्मनी के आत्मसमर्पण के कुछ महीनों बाद जर्मन पनडुब्बी यू-530 कील बंदरगाह से दक्षिण धु्रव पहुँची क्रू मेम्बर्स ने बर्फ की गुफा बना कर उसमे हिटलर की गुप्त फाइलों के अलावा थर्ड राइख के दस्तावेजों से संबधित वस्तुओं के कई बक्से सुरक्षित रखे यह अफवाह भी फैली थी कि बाद मे पनडुब्बी यू-977 डी एन ए क्लोनिंग उदद्ेश्य से हिटलर और ईवा ब्रेओन के अवषेश लेकर पहुँची। बाद मे उसने अर्जेन्टाइना के मार डेल प्लाटा बंदरगाह पर आत्मसमर्पण कर दिया विश्वयुद्ध के बाद 1947 में अमरीकी जनरल रिचर्ड ई बायर्ड के नेतृत्व मे 4,000 अमरीकी, ब्रिटिश व आस्टेªलियन सैनिकों ने अन्टार्कटिका पर हमला किया था जो आपरेशन हाइजम्प कहलाया था लेकिन रिपोर्टोंं के अनुसार उन्हें नाजी उड़न तश्तरी द्वारा भारी जवाबी हमले का सामना करना पडा़ था और अमरीकी सेना को वापस बुलाना पड़ा था। आपरेशन हाइजम्प की सबसे दिलचस्प बात थी जनरल रिचर्ड ई बायर्ड 19 फरवरी 1947 को अपनी अकेली उड़ान पर थे उसने अपनी डायरी मे लिखा है। कि 10 बजे हम एक छोटी पर्वत श्रंखला पार कर रहे थे और उत्तर की ओर बढ़ रहे थे पर्वतमाला के पार  एक घाटी के बीच मे एक छोटी नदी बहती दिखाई पड़ी लेकिन वहाँ नीचे हरियाली नही होनी चाहिये, कुछ ना कुछ तो निश्चित रूप से व असामान्य था गलत था हमे बर्फ के ऊपर होना चाहिये था लेकिन पहाड़ों की ढाल पर विशाल वन लहरा रहा था हमारे नेविगेशन यंत्र अचानक घूमने लगे गीरोस्कोप आगे पीछे हो रहा था 10.05 बजे मैं 14,00 हजार फुट पर पहुँचा और घाटी को अच्छी तरह से परीक्षण हेतु बांये मुड़ा यहां हरियाली थी जो या तो मौस या घनी घास थी प्रकाश भी भिन्न प्रकार था सूरज नही दिख रहा था हमने पुनः बांये मुढ़े हमने नीचे कोई हाथी के समान विशाल जानवर दिखाई दे रहा जो  निश्चित रूप से मैमथ था अश्विवसनीय हम 1,000 फुट पर नीचे उतरे और दूरबीन से गौर से देखा यह निश्चित रूप से मैमथ ही था हमे कई हरी भरी घटियाँ मिली हमने 10.30 पर बेस कैम्प पर रिपोट भेजी बाहरी तापमान 74 डिग्री फारेनहाइट था अब यंत्र सामान्य रूप से कार्य कर रहे थे। मैं परेशान था, रेडिया काम नहीं कर रहा था गुप्त सूत्रों के अनुसार हिटलर अन्टार्कटिका की क्वीन माॅड लैण्ड मे 20 डिग्री पूर्व व 10 डिग्री पष्चिम मे न्यू साबिया नामक स्टेशन बनना चाहता था जो एक दिन मास्टर जाति की विष्व राजधानी होगी सोवियत अभिलेखों मे ऐसी अनेकों फाइलें हैं, जो बताती है कि नाजी जर्मनी और अमरीका ने विश्वयुद्ध की समाप्ति के पूर्व मित्र देशों को धोखा दिया था नाजी तकनीकी परमाणु बम, उन्नत जेट इंजन, राकेट और उड़न तष्तरी के हस्तांतरण के बदले उन्हें अन्टार्कटिका जाने दिया था, सेनाधिकारियों व उनके साथियों को अन्टार्कटिका के गुप्त अड्डे में भाग जाने का मौका दिया था बहुत ही कम लोगों को पता है कि जर्मन भाइयों वाल्टर होरेन 1913-1998 तथा रीमर हारेन 1915-1992 ने उड़न तश्तरी बनाई थी वे अमरीका की 1947 की रोजवेल उड़न तश्तरी गिरने की घटना से भी जुुड़े थे इसके अतिरिक्त जर्मली ने घंटे के आकार का स्तूपनुमा पारे से चलित ‘डिग्लोके’ नामक सामरिक अंतरिक्षयान बनाया था जिसमे एटी ग्रेविटी टैकनिक और क्वांटम फिजिक्स का प्रयोग किया गया था कुछ आज उसे टाइम मशीन व मानते है।
जार्जियो ए सुकलुस संपादक-लेजेन्डरी टाइम्स, स्वीटजरलैण्ड,