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गायन और रोजगार
June 30, 2019 • जर्नादन त्रिपाठी

गायन और संगीत की परम्परा आदिकालीन है। शायद मनुष्य ने पशु पक्षियों को बोलते गाते देखकर गायन की शुरूआत की होगी संसाार की सभी पुरातन सभ्यतओं मे गायन की परंपरा रही है, ज्योतिष के अनुसार गायन या उसमे रूचि का कारक ग्रह शुक्र व बुध व उनकी राशियां वृष मिथुन, कन्या व तुला है। इन दो ग्रहों का किसी तरह का संबध गायन मे पारंगत बनाता हें इसके साथ ही लग्न, चन्द्र लग्न व बुध से द्वितीय भाव तथ इनके द्वितीयेश भी कम महत्वपूर्ण नही है। इनका बुध शुक्र से संबध या इनकी राशियों से संबध गायक बनाता है। इसके साथ ही लोकप्रिय गायक बनने के लिये अंय भावों और ग्रहों का भी इनसे संबध होना अनिवार्य है। जो निम्न है।
1. लग्न, द्वितीय भाव, तृतीय, पंचम, नवम, दशम व 11 वां भाव तथा गुरू शनि का बली होना अनिवार्य है।
1. यदि द्वितीय भाव या द्वितीयेश का बुघ षुक्र से संबध हो तो जातक गायक हो
2. यदि जाॅब कारक गुरू व शनि का तृतीय भाव या तृतीयेश से संबध को जातक पाॅप या लोक गायक हो
3. यदि पंचम प्ले बैक सिंगर का भाव है। पंचम का नवम,दषम, लाभ भाव से संबध गायक बनाये।
4. यदि कोई ग्रह जो द्वितीयेश, तृतीयेश, पचंमेश नवमेश ,दशमेश, लाभेश भाव हो बुघ, षुक्र से संबधित हो संबध तथा द्वितीय भाव, तृतीय, पंचम, नवम, दशम व लाभ भाव मे बैठा हो तो संगीतकार या गायक बनाये। चन्द्रमा संगीत का कारक ग्रह है।
5. यदि अरूधालग्न 3, 5, 9, 11 भाव मे हो या ये भावेश अरूधा लग्न मे हो विषेषतः शुक्र या राहू तो कैरियर मनोरजन जगत से हो
6.तृतीय भाव लोकगायक तथा पाॅप सिंगर का है। पंचम भाव प्ले बैक सिंगर का है।
7.द्वितीयेश पचंम भाव मे हो
8. तृतीयेश बुध युत हो