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गोचर के अन्तरचक्र
September 1, 2019 • - डी.एस. परिहार

विशोंत्तरी, अष्ठोत्तरी या चर आदि दशाओं के अलावा गोचर घटनाओं के समय को जानने का अति सरल व सटीक साधन है। ज्योतिष मे मंद गति वाले ग्रहों जैसे गुरू, शनि राहू केतु का अति महत्व है। क्योंकि यह ना केवल जीवन मे बड़े व महत्वपूर्ण तथा अच्छे बुरे परिवर्तन कराते है। बल्कि जीवन की दिशा ही बदल देते है। इनका प्रभाव भी गहरा व स्थाई होता है। लेकिन इनकी राषिगत अवधि काफी लंबी होती है। जैसंे गुरू 13 माह, षनि 2 वर्ष छह माह राहू व केतु करीब डेढ साल। चँुकि समय व जीवन निरन्तर परिवर्तनशील है। अतः ना निरन्तर कोई सुखी रहता है। ना निरन्तर दुःखी जैसे किसी राषि पर राहू के डेढ साल की अवधि मे जातक पूरे डेढ साल तक दुःखी, रोगी या कष्ट पीड़ित नही रहेगा या गुरू के 13 माह के गोचर मे पूरी अवधि वो में सुखी ही रहेगा ऐसा असंभव है। इन अवधियों के बीच बीच मे भी अल्पकालीन सुख व दुःख के पड़ाव आते है। इन पड़ावों को समझने के लिये ग्रहों की गोचर अवधि को ग्रहों राशियों के अनुसार उपखंडों मे विभाजन की व्यवस्था हमारे तपस्वी ऋ़षियों ने हजारों साल पहले ही कर दी थी पर आलस वश हम उनका प्रयोग नही करते ग्रहों की गोचर अवधि को हम दो आधार पर उपखंडों मे विभाजित पाते है। 
1. नवांश के आधार पर 
2. अष्ठकवर्ग के आधार पर 
3. इस तीसरा विभाजन को हम लोकाचार मे साढे शनि के गोचर मे कर्मकांडी पंडितों द्वारा उपयोग करते हुये पाते है। जैसे शनि सिर पर है या चरणों पर उतार पर है। सोने का पाया लोहे का पाया आदि 
1. अष्ठकवर्ग मे किसी ग्रह के एक राशि मे गोचर मे उस राषि की आठ कक्षाओं का वर्णन मिलता है। जिसके अनुसार हर राशि को 3.45 अंशों के आठ समान भागों मे बाँटा जाता है। इसे कक्षा कहते है। किसी भी राशि का पहले भाग या कक्षा का स्वामी षनि होगा द्वितीय कक्षा गुरू की तीसरी मंगल की चैथी रवि की पाचंवी शुक्र की छठी बुध की सातवीं चन्द्र की आठवीं लग्न की। सूर्य अपनी एक कक्षा मे 3 दिन 18 घंटे मे गोचर करता है। अंय ग्रहों की अवधि इस प्रकार है। 
 ग्रह              कक्षा की अवधि 
 सूर्य              3 दिन 18 घंटे
 चन्द्र            6 घंटे 45 मिनट
 मंगल          5 दिन
 बुध             2 दिन 12 घंटे
 गुरू            1 माह 15 दिन
 शुक्र            3 दिन
 शनि           3 माह 21 दिन
 राहू/केतु     2 माह 7 दिन 12 घंटे
कोई ग्रह किसी राशि मे जिस ग्रह की कक्षा से गोचर करेगा यदि उस ग्रह को अपने प्रस्तारक वर्ग में 4 या अधिक ंिबदू मिले है। तो उस कक्षा की गोचर काल मे जातक को सुख सफलता, षुभ समाचार, विवाह, रोजगार प्राप्ति आदि घटनायें होंगी यदि किसी ग्रह की कक्षा मे उसे अपने प्रस्तारकवर्ग चार से कम बिंदू मिले है। तो उस कक्षा के गोचर मे जातक को हानि रोग, अशुभ समाचार मिलेंगें। जैसे किसी के जमांक मे शुक्र को अपने प्रस्तारक वर्ग मे छह ंिबंदू मिले हो और गुरू सप्तमेश गत  विवाह दायक राशि से निकल रहा है तथा गुरू ने उस राशि में 10 जुलाई को प्रवेश किया था तो शुक्र की कक्षा छठी हुयी तो गुरू गोचर की कक्षा अवधि 1 माह 15 दिन को  5 से गुणा करें तो योगफल 225 दिन या  7 माह 15 दिन इसे 10 जुलाई मे जोड़ा तो 25 फरवरी आया शुक्र की कक्षा 25 फरवरी से 12 अप्रैल तक चलेगी जातक का विवाह इसी अवधि मे होगा (28 की फरवरी) अंय ग्रहों के फलों अध्ययन भी इसी प्रकार पर अध्ययन किया जाता है। 
2. नवांश के आधार पर प्राचीन ज्योतिष ग्रन्थों में एक राशि को 9 समान भागों मे विभाजित किया गया है।  यह भाग नवांश कहलाते है। जमांक मे भाग्य से संबधित नवांश जातक के विभिन्न वस्तुओं से संबधित भाग्य को बताते है। एक राशि को नवांशों विभाजित किया जाता है। प्रत्येक नवांश 3.20 अंश को होता है।  मेष राशि से मीन राशि तक नवंाश का एक चक्र 12 नवांश का होता है जो पुनः रिपीट होता है। 360 अंश के राशि चक्र मे प्रत्येक मेषादि नवांश 9 बार आते है। गोचर मे प्रत्येक ग्रह एक नवांश ( 3.20 अंश) से गोचर करने पर करीब निम्न समय लेते है 
   ग्रह               अवधि 
   सूर्य            3 दिन 8 घंटा
   चन्द्र           साढे छह घंटा
    मंगल        4दिन 10 घंटा 30 मिनट
    बुध          2 दिन 5 घंटा 30 मिनट
    गुरू          40 दिन या 1 माह 10 दिन
    ग्रह       अवधि 
   शुक्र          2 दिन 16 घंटे
   शनि       3 माह 10 दिन
   राहू/केतु  2 माह 2 दिन
गोचर किसी भी नवांश के शुभ अशुभफल को जानने काी विधी वही है। जो उपर अष्ठकवर्ग मे पैरा मे दी गई है। जैसे शनि ने 12 जून से मेष राषि मे प्रवेश किया और हमे उसके मिथुन नवांश का फल जानना है। जो मेष राशि का तीसरा नवांश तो शनि के नवांश काल 3 माह 10 को हम दो से गुणा करेंगें तो 6 माह 10 दिन आयेगा इसे प्रवेशकाल 12 जून मे जोड़ा तो तो 1 जनवरी आया 1 जनवरी को शनि ने मिथुन नवांश मे प्रवेश किया जो आगामी तीन माह दस दिन 13 अप्रैल तक रहेगा मिथुन शनि की मित्रराशि हें अतः यह काल षुभ रहेगा।