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दामी माँ के नुस्खे
November 27, 2019 • संकलित - राकेश ललित वर्मा

हैजा की दवा:- आॅक की जड़ 1 छटांक लेकर 1 छटांक अदरक के रस से खरल करें, फिर काली मिर्च के बराबर गोली बनाकर 1 गोली पानी के साथ खा लें अथवा केवल 2 तोला प्याज का रस पिला दें।
बवासीर:- बादी व खूनी हो, सफेद दूब का रस एक छटांक तथा मिश्री 1 छटांक मिलाकर पियें। लाभ होगा।
आँव:- ईसबगोल की भूसी, तालमखाना का बीज व मिश्री एक-एक छटांक तीनों को पीसकर एक-एक तोला सुबह, दोपहर, शाम आधा पाव दही के साथ तीन दिन तक सेवन करें।
सर्दी का बुखार:- तुलसी के पत्ते 10, कालीमिर्च 10 दाना, खूबकला 1 तोला, पुदीना आधा तोला, धनिया 3 तोला, आधा सेर पानी में पकावें। आधा पाव रह जाने पर 1 तोला मिश्री मिलाकर पीना चाहिये।
पेट के दर्द की दवा:- 1. पाँचों नमक दो-दो तोला, कलमी, सोरा 2 तोला, नौसादर 2 तोला, पीपर 2 तोला, पीपर 2 तोला इन सभी को कूटकर चूर्ण बना लें और छह माशा खाना खाने के बाद लें।
2. चवन्नी भर अजवाइन का सत्त पानी में डालकर एक बोतल में रख दें, 24 घण्टे बाद एक चम्मच आवश्यकता पड़ने पर पियें। इससे भी पेट दर्द ठीक होता है।
आशा शीशी:- 4 बजे सबेरे 1 तोला भूना सोहागा, एक तोला देशी घी तथा 2 तोला मिश्री तीनों को मिलाकर खायें।
बिच्छू की दवा:- अपामार्ग की जड़ पीसकर गरम करके लगा दें या सेंधा नमक पानी में घोलकर जिस अंग पर काटे हो उसके दूसरे कान में तीन-चार बार छोड़ें, जब तक कि विष न निकले।
दाद की दवा:- माजूफल चूर्ण 1 तोला, इमली की छाल की भस्म 1 तोला मिलाकर लगायें।
खुजकी दवा:- दो रत्ती आँवलासार शुद्ध गंधक केले के साथ खायें तथा नारियल का तेल, कपूर लगायें।
बतास की दवा:- आधी छटाँक धतूरे का बीज 1 पाव असली सरसों के तेल में मिलाकर हल्की आँच में पका लें, फिर मालिस करें।
पेशाब न होना:- पेशाब रुक जाय तो दो आने भर कलमी सोरा, 1 छटाँक दूध में 3 पाव पानी मिलाकर पियें। पेशाब न होने की समस्या दूर हो जायेगी।
नासूर:- पुराना घाव नासूर बन जाता है। सेंधा नमक और शहद मिलाकर इसमें बत्ती रखने से नासूर भर जाता है।
मिर्गी की दवा:- अपामार्ग की जड़ एक, दस दाने कालीमिर्च, एक आना भर सौं मिलाकर दें।
स्वप्नदोष की दवा:- एक छटाँक ताल मखाने का बीज, 1 छटाँक ईसबगोल की भूसी तथा आधा पाव मिश्री पीसकर 1 तोला दवा रात को 20 दिन तक आधा सेरपके दूध के साथ खायें। 
खाँसी की दवा:- तुलसी की मंजरी (फूल), अदरख के साथ पीस कर शहद मिलाकर सेवन करने खाँसी दूर होती है।
दाँतों के रोग दवा:- गेरू, फिटकरी, छोटी इलायची पीसकर प्रातःकाल मंजन करना हितकर है।
आँव की दवा:- सूखा बेल, पुराना गुड़, काली मिर्च पीसकर बराबर मात्रा में 10 ग्राम पी लें अथवा 10-10 ग्राम इसबगोल और मिश्री मिलाकर  फाँक लें। आँव में खून आता हो तो दूब का रस 20 ग्राम पीयें।
श्वांस:- पीपल की छाल का चूर्ण या खैर की लड़की का चूर्ण 3 ग्राम अथवा मोरपंखी की भस्म 1 ग्राम शहद के साथ सेवन करें। 
सिर दर्द:- पुराने गुड़ के साथ सोंठ का चूर्ण मिलाकर सूंघे अथवा अमृतधारा का माथे पर लेप करें।