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दिमागी बुखार से जंग की दस्तक जन-जन से जोड़ों अभियान को
June 28, 2019 • समाचार

एक्यूटइन्सेफलाइटिस सिंड्रोम या दिमागी बुखार एक गम्भीर बीमारी है जिसके कारण मृत्यु या अपगता भी हो सकती है। कोई भी बुखार दिमागी बुखार हो सकता है इसलिए बुखार को नजरदाज नही करना चाहिए। एक जुलाई से प्रदेश के सभी जनपदों जिसमे रायबरेली जनपद भी शामिल है। विशेष संचारी रोग नियंत्रण तथा 18 जनपदों में दिमागी बुखार से लड़ने के लिए दस्तक अभियान शुरू किया जा रहा है।
द्वितीय विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान संचारी रोगों पर सरकार का सीधावार सुरक्षित होगा परिवार पर राजधानी में आयोजित मीडिया कार्यशाला/विचार गोष्ठी में विषय विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण जानकरिया दी। जागरूकता को बढ़ाना चाहिए तथा अभियान को जन-जन से जोड़ने का आहवान किया गया तथा बचाव बीमारियों में महत्वपूर्ण तरीका है जिसे जानना चाहिए। मीडिया सकारात्मक स्टोरी संदेशों को जन-जन में पहुचायें जिसे आम जन पाठक महत्वपूर्ण जानकारियों को जाने और अमल में लाये। सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मिशन निदेशक राष्टीय स्वास्थ्य मिशन पंकज कुमार संचारी रोग निदेशक डा0 मिथलेश चतुर्वेदी व संयुक्त निदेशक डा0 विकास सेंदू अग्रवाल यूनिसेफ के डा0 निर्मल सिंह, सचिन गुप्ता, डा0 आशुतोष अग्रवाल आदि ने बचाव बीमारियों में महत्वपूर्ण तरीका जिसे जानना व अमल में लाना जरूरी है। सरकार द्वारा किये जा रहे उपचार प्रयास घर-घर दस्तक के माध्यम से किया जा जायेगा। जनपद रायबरेली में भी जिलाधिकारी नेहा शर्मा के निर्देश में अभियान को बेहतर तरीके से संचालन के निर्देश दिये गये है।
दिमागी बुखार को नियंत्रित करने से सबसे बड़ी समस्या इलाज में देरी है। दस्तक अभियान दिमागी बुखार से बचाव एवं नियंत्रण के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान है इस में स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर 1-15 वर्ष के आयु के बच्चों के माता-पिता को बीमारी से बचाव एवं उपचार की जानकारी देगे। कोई भी बीमारी दिमागी बुखार हो सकता है। ऐसी स्थिति में इलाज में देरी न की जाये। सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं मिशन निदेशक पंकज कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य विभाग की अगुवाई में चलाए जा रहे संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान ग्राम समाज, पंचायती राज, नगरीय विकास शिक्षा, बाल विकास परियोजना, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, समाज कल्याण विभाग का सयुक्त प्रयास है वे भागीदारी कर रहे है। विगत वर्ष दस्तक अभियान प्रदेश के गोरखपुर एवं बस्ती मण्डल के सात जिलों (गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थ नगर, संतकबीर नगर, बस्ती) में चलाया गया था।, इस वर्ष यह अभियान पिछले जनपदों के साथ लखनऊ, हरदोई, लखीमपुरखीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, गोंडा, बहराइच, बस्ती, बलरामपुर एवं बाराबंकी जनपद में चलाया जायेगा।
निदेशक संचारी रोग उत्तर प्रदेश डा0 मिथिलेश चतुर्वेदी ने कहा कि अभियान के अन्तर्गत प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर दस्तक देंगे और दिमागी बुखार से बचाव और उपचार के तरीके बताएगे। वह लोगों को बताएंगे कि बुखार आते ही मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाए, अपने घरों में और आस-पास सफाई रखें, जल भराव न होने दें, मच्छरों तथा चुहे-छछून्दरों से बचाव करें, स्वच्छ पेय जल का उपयोग करें और पशु-बाड़ों में सफाई रखें। या छोटे-छोटे उपाय बीमारियों के प्रकोप तथा इन से होने वाली क्षति को काफी हद तक कम कर सकते है।
इस अभियान के अन्तर्गत 1-31 जुलाई के बीच जिला, ब्लाक और ग्राम पंचायत स्तर पर कई जन जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएगे। इसके साथ एल0ई0डी0 वैन एवं नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। अभियान के दौरान जानकारी के साथ दिमागी बुखार पर चैतरफावार भी होगा, जिसमें नियमित टीकाकरण के अन्तर्गत जेई टीकाकारण, मच्छरों से बचाव के लिए फाॅगिंग, बुखार ग्रस्त कटाई, नालियों की सफाई, हैण्डपम्पों की मरम्मत और शौचालय निर्माण आदि शामिल है।
भाई शैली कम्युनिकेशन फाॅर डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट यूनिसेफ उत्तर प्रदेश ने कहा कि यूनिसेफ सरकार द्वारा चलाए जा रहे दस्तक अभियान में पूरी तरह सहयोग करता है। प्रत्येक बच्चा अनमोल है और सही जानकारी एवं सही समय पर दिया गया इलाज उनकी जान बचा सकता है।