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प्रत्येक बच्चा धरती का प्रकाश बन सकता है
August 4, 2019 • समाचार

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, आनन्द नगर कैम्पस, लखनऊ द्वारा 'पैरेन्ट्स डे एवं सी.आई.एस.वी. मिनी कैम्प का नेशनल प्रेजेन्टेशन समारोह' का भव्य आयोजन सी.एम.एस. कानपुर रोड आॅडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जहाँ बच्चों ने देश-विदेश के लोक नृत्यों का पारम्परिक रंग-बिरंगी वेशभूषा में प्रस्तुतीकरण करके हँसते-गाते एक विश्व परिवार की अनुभूति करायी तो वहीं दूसरी ओर सर्व-धर्म व विश्व एकता प्रार्थना के शानदार प्रस्तुतीकरण द्वारा एकता, शान्ति व सौहार्द का जयघोष किया। देश-विदेश के लोकनृत्यों व लोकगीतों की अनूठी छटा ने अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तो वहीं दूसरी ओर प्रेरणादायी शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा सभी को विश्व एकता व विश्व शान्ति के महत्व से अवगत कराया। इसके अलावा, छात्रों ने 'वल्र्ड पार्लियामेन्ट' के शानदार प्रदर्शन द्वारा उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया। इससे पहले, मुख्य अतिथि के रूप में पधारे श्री रंजीत सिंह, कमाण्डेन्ट, सेन्ट्रल ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट, उ.प्र. होमगार्डस हेडक्वार्टस, ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया।
 विदित हो कि सी.आई.एस.वी. मिनी कैम्पस के अन्तर्गत छात्रों ने दो दिनों तक साथ-साथ रहकर विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं विश्व बन्धुत्व का प्रशिक्षण प्राप्त किया एवं 'नेशनल प्रेजेन्टेªशन समारोह' के साथ सी.आई.एस.वी. मिनी कैम्प का समापन हुआ। सी.एम.एस. का मानना है कि नन्हें-मुन्हें बच्चों के ऐसे शिविरों में एक साथ मिलजुल कर रहने से सहयोग की भावना का विकास होता है एवं उनमें शान्ति, एकता एवं आपसी भाईचारे का प्रादुर्भाव होता है एवं यही भावना एक दिन विश्व परिवार का स्वप्न साकार करने में मील का पत्थर साबित होगी
 इस अवसर पर अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए सी.एम.एस. आनन्द नगर की प्रधानाचार्या  सुश्री रीना सोटी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में विशेष सहायक हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक बच्चा धरती का प्रकाश बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि उसे उद्देश्यपूर्ण शिक्षा मिले और एक स्नेहमयी वातावरण में उसका बहुमुखी विकास हो। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो आगे आने वाली पीढ़ियों को संरक्षण व सुरक्षा प्रदान करे। 
सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि विश्व शान्ति, विश्व एकता एवं वसुधैव कुटुम्बकम् के विचारों को बचपन से ही प्रत्येक बालक को देने की आवश्यकता है। अतः ऐसे प्रयास किये जाने चाहिये जिससे कि प्रत्येक बालक को घर व विद्यालय दोनों जगह विश्व शान्ति एवं विश्व एकता के विचार मिल सकें।