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बदकिस्मत टाइटैनिक
June 26, 2019 • डी. एस. परिहार

 

वो परी कथाओं व स्वप्नलोक सा खूबसूरत, मजबूत अतिविशाल और कभी ना डूबने वाला जहाज था, लेकिन 14 अप्रैल सन् 1912 की रात 11ः40 पर उसके साथ कुछ ऐसा घटा कि वह समुद्री यात्रा का सबसे दर्दनाक हादसा और एक रहस्यमय गुत्थी बनकर रह गया और वह अभिशप्त, इलफेटेड और घोस्ट शिप के रूप मे जाना जाने लगा दरअसल इस धारणा को बनने के पीछे टाइटैनिक हादसे के पहले और बाद में घटी कुछ ऐसी अजीबो-गरीब और रहस्यमय घटनायें थी जिनको नकार पाना आसान नही था घटनाओं की शुरूआत टाइटैनिक हादसे से कई साल पहले हुयी जब इंगलैण्ड के प्रख्यात लेखक और रिव्यू आॅफ रिव्यू के संपादक विलियम थामस स्टीड ने 22 मार्च, 1886 को एक लेख 'हाउ द मेल स्टीमर वेंट डाउन इन मिड अटलांटिक बाई सरवाइवर' लिखा 'उस लेख और टाइटैनिक हादसे काफी कुछ समानतायें थी जिसमे एक स्टीमर एक अन्य जहाज से टकरा कर डूब जाता है। जिसमे यात्रियों की संख्या के मुकाबले लाइफबोट की कमी के कारण सैकड़ों लोग डूब जाते है। 1892 में उन्होने एक छोटी कहानी फ्राम ओल्ड वल्ड टू द न्यू लिखी थी जिसमे मैजेस्टिक नामक जहाज आइसबर्ग से टकरा कर डूबे एक अन्य जहाज की सहायता करता है स्टीड को यकीन था कि उनकी मृत्यु डूबने या आग्नेयास्त्र से होगी अधिकांश लोग उस कहानी को टाइटैनिक हादसे का पूर्वाभास मानते हैं। हैरत बात तो तब हुयी जब टाइटैनिक की जल समाधि मे डूबने वाले 1503 मृतकों में स्वयं मि. स्टीड भी शामिल थे। और उन्होंने जहाज डूबने से पूर्व रात्रि के भोजन पर लोगों को ब्रिटिश म्यूजियम की शापित ममी की कहानी भी सुनाई थी मि. स्टीड के पुराने मित्र और विख्यात ब्रिटिश हस्तरेखा विशेषज्ञ प्रो. काउन्ट लुई हेमन कीरो ने अपने 21 जून, 1911 में स्टीड को लिखे पत्र में लिखा था कि आपकी जन्म तिथी प्रथम जल की राशि कर्क मंे आती है। आपकी मृत्यु जल के सिवा किसी चीज से नही होगी। आपको दिसम्बर और अगले अप्रैल 1912 में पानी में यात्रा नही करनी चाहिये अप्रैल 1912 आपके लिये बहुत जटिल और खतरनाक है। विशेषतः महीने का मध्य समय। अन्यथा आपके जीवन पर अति अशुभ खतरा आयेगा।
सन् 1898 में अमरीकी उपन्यासकार माॅरगन राबर्टसन ने एक अति खूबसूरत, मजबूत, अति विशाल जहाज का गहरी धंुध मेे आइसबर्ग से टकरा कर डूबने का सपना देखा सपने मे माॅरगन राबर्टसन ने उस जहाज का नाम पढने की कोशिश तो वह धंुध मे केवल टाइटेन ही पढ पाया तभी उसकी आंख खुल गई सपना इतना खौफनाक और दिल दहला देने वाला था कि वह कई दिनों तक उस सपने को वह भुला नही पाया अन्त में उसने सपने के आधार पर 'फयूटिलटी आॅर दि रैक आॅफ दि टाइटेन' नामक उपन्यास लिखा जो खूब बिका सन् 1914 में जब टाइटैनिक डूबा तो लोग यह देखकर दंग रह गये कि उपन्यास के कथानक और टाइटैनिक हादसे मे हैरतअंगेज समानतायें थी मानो उपन्यास टाइटैनिक हादसे का ही आँखों देखा वर्णन हो। दोनों जहाज 295 मीटर लंबे थे दोनो पहली यात्रा में उत्तरी अटलांटिक में आधी रात को अप्रैल माह में एक ही जगह डूबे थे दोनों जहाजों को उनके निर्मिताओं ने कभी ना डूबने वाला जहाज कहा था दोनों जहाजों मे तीन भाप चलित तीन प्रापलर थे। दोनांे जहाजों की गति व वजन भी समान था टाइटेन का वजन 75 हजार टन था जबकि टाइटैनिक का 66,000 टन। टाइटेन में तीन हजार लोग सवार थे जबकि टाइटैनिक में 2500 से अधिक दोनांे जहाजों मे जीवन नौकाओं की कमी थी दोनों की दुर्घटना में 1500 सौ से अधिक यात्री मारे गये थे। दोनों जहाज साउथम्पटन से से ही अपनी यात्रा पर रवाना हुये थे।
दोनांे 265 मीटी उंचे थे टाइटेन 70 हजार टन पानी हटाता था जबकि टाइटैनिक 66 हजार टन पानी हटाता था। टाइटैनिक का जब अप्रैल, 1912 में जलावतरण होने वाला था तो कुछ अन्य लोगों को भी इसके डूबने का पूर्वाभास हुआ था एक अंग्रेज व्यापारी जे. कैनन मिडिलंैटन ने 23 मार्च का
टाईटैनिक का टिकट खरीदा किन्तु यात्रा के 10 दिन पूर्व उसने एक विशाल जहाज के डूबने का सपना देखा जो उलटा तैर रहा था उसका पेंदा टूटा हुआ था ओर सैंकड़ों लोग पानी मे गिरे चीख-पुकार कर रहे थे। उसे वह बुरा सपना समझ कर भूल गया, किन्तु अगली रात फिर वही सपना आया जिसमे उसने खुद को जहाज के ऊपर हवा मंे तैरते पाया कैनन सपने से इतना भयभीत हुआ कि उसने अपनी यात्रा स्थगित कर दी। टाइटैनिक जल समाधि के बाद उसने अपना अनुभव पत्र द्वारा लंदन की सोसाइटी फाॅर साईकोलाॅजिकल रिसर्च को भेजा जिसका विवरण बाद में सोसाइटी की पत्रिका मे प्रकाशित हुआ था। टाइटैनिक जब पहली यात्रा पर रवाना हुआ था तो जहाज में मुर्गे ने दिन मे बांग दी थी जो नाविको मे बड़ा अपशकुन माना जाता है।
1956 में न्यूयार्क से प्रकाशित वैरी ग्रान्ट की पुस्तक फॅार मेमोरी के अनुसार जब टाइटैनिक पहली यात्रा पर रवाना हुआ उसके माता व पिता जैक मार्शल घर की छत से सारा नजारा देख रहे थे। अचानक उनकी माँ अपने पिता की बांह पकड़ कर चीखती हुयी बोली अरे यह जहाज तो रास्ते मे ही डूब जायेगा उसे रोको कुछ करो पिता ने उसे समझाने की कोशिश की। परेशान मत हो टाइटैनिक कभी भी नही डूब सकता तो वह क्रोधित होकर बोली मैं सैकड़ों लोगों को अपनी आंखों से समुद्र मे डूबते हुये देख रही हूँ। टाइटैनिक हादसे के कई सालो बाद कुछ अन्य जहाजों ने अप्रैल माह में उस रास्ते से गुजरते हुये टाइटैनिक के भूत को गुजरते देखा जो कुछ पल तक दिखकर गायब हो जाता है। टाइटैनिक हादसे के 23 साल बाद अप्रैल 1935 में टिटेनियम नामक जहाज कनाडा से इंगलैण्ड को जा रहा था कैप्टन विलियम रीव्ज आकाश का निरीक्षण कर रहे थे। अचानक वह अपने जहाज से टाइटैनिक की तुलना करने लगे। 14 अप्रैल सन् 1912 की रात टाइटैनिक डूबा था इसी दिन तो उनका जन्म हुआ था रात होते ही उनको बड़ी घबराहट होने लगी तभी टिटेनियम एक बड़े आइसबर्ग से टकराने से बचा किन्तु आगे तो दर्जनो आइसबर्ग तैर रहे थे। कैप्टन ने जहाज वहीं रोक कर न्यूफाउलैण्ड से बर्फ तोड़ने वाले जहाज बुलवाये। 9 दिन बाद जब आइसबर्ग तोड़ कर रास्ता बनाया गया तभी टिटेनियम आगे बढ सका। अप्रैल 1978 मंे क्वीन एलिजाबेथ-2 नामक एक जहाज उत्तरी अटलांटिक सागर मे यात्रा कर रहा था अचानक शिप के रेडियो अफसर को एक संदेश मिला सी. क्यू. डी.,सी. क्यू. डी., हम तेजी से डूब रहे है। यात्रियों को लाइफबोट में उतारा जा रहा है। यह संदेश गुजरे एडवर्ड जमाने के मोर्स कोड में भेजा गया था अब इसका इस्तमाल बंद हो चुका है। रेडियो अफसर ने अपने ट्रान्समीटर को रीटयून करके मोर्स फ्रीक्वेंसी पर संदेश भेजने वाले से पहचान पूछी। कुछ देर तक ट्रान्समीटर पर सांय-सांय गूजने के बाद जवाब मिला टाइटैनिक यह सुन कर रेडियो अफसर की हडिड्यां जम गयी जिस जहाज से संदेश भेजा गया था वह 66 वर्ष पूर्व ही समुद्र में समा गया था अफसर ने तुरन्त कैप्टन को सूचित किया सबने पहले सोचा कि कोई शरारत कर रहा है थोड़ी जांच के बाद पता लगा कि क्वीन एलिजाबेथ-2 ठीक उसी जगह से गुजर रहा था जहाँ टाइटैनिक डूबा था कैप्टन ने रेडियो अफसर से पुनः संदेश भेजने वालों से सम्पर्क स्थापित करने को कहा, किन्तु सारी कोशिश बेकार रही। टाइटैनिक तो इतिहास का हिस्सा बन चुका था, टाइटैनिक को किसका शाप लगा था यह कहना तो मुशकिल है। किन्तु कुछ लोगों के अनुसार टाइटेनिक में मिस्र की राजकुमारी आमेन ओटू की ममी भी ब्रिटिश म्यूजियम द्वारा अमेरिका मे बिक्री हेतु भेजी जा रही थी इस ममी के मृत्यु कक्ष की दीवारों पर लिखा था कि राजकुमारी के अंतिम विश्राम में खलल डालने वाले को मौत का शाप मिलेगा। इसी से मिलती जुलती एक सत्य घटना विख्यात ब्रिटिश हस्तरेखा विशेषज्ञ प्रो. काउन्ट लुई हेमन कीरो ने अपनी पुस्तक टाटेनिकस लास्ट सीक्रेटस में लिखी है। 1910 के शुरूआती महीनों मे एक दिन कीरो के लंदन स्थित कार्यालय में एक दिन धनी व्यापारी डगलस मरे अपना भविष्य जानने आया कीरो ने उसका दायाँ हाथ देखकर उसको बायाँ हाथ दिखाने को कहा उसने कारण जानना चाहा तो कीरो ने गंभीर स्वर में कहा शीघ्र ही आपको लाटरी में कोई आश्चर्यजनक वस्तु मिलेगी उसके बाद आप पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा बंदूक से घायल आपका दाहिना हाथ काट दिया जायेगा डगलस ने कहा मुझे लाटरी में कोई दिलचस्पी नही है डगलस ने अपना बायाँ हाथ सामने कर दिया कीरो ने बायाँ हाथ देखते हुये कहा, खबरदार मिस्त्र की किसी चीज को हाथ मत लगाना वरना भारी मुसीबत आयेगी बांये हाथ में मिस्त्री अक्षर का चिन्ह हायरोग्लिफिक्स दिखाई दिया डगलस कीरो पर उपेक्षापूर्ण हंसी हँसते हुये चला गया करीब दो साल बाद बीमार व उदास डगलस कीरो के कार्यालय मे पहुँचा उसका दांया हाथ कंधे से कटा हुआ था कीरो ने पूछा क्यों क्या हुआ, उसने आंसू रोकते हुये कहा आपकी भविष्यवाणी सच हुयी आप महान हैं। कीरो को अपनी बात याद आई उन्होंने उससे पूरी बात पूछी उसने कुछ देर शांत रहकर कहा आपसे मिलने के कुछ दिन बाद मैं अपने दो दोस्तों के आग्रह पर मिस्त्र की राजधानी काहिरा गया एक दिन ममी बेचने वालों का एक दल ममी बेचने आया और मुझसे ममी खरीदने को कहने लगा इच्छा ना होने पर भी दोस्तों के आग्रह पर मैने वह ममी खरीद ली ममी के ताबूत पर सोने से किसी स्त्री की मूर्ति बनी थी नीचे उसका नाम आमनेरा था जो किसी मन्दिर की मुख्य पुजारिन थी मित्रों के कहने पर ममी के लिये लाटरी निकाली गई हैरत की बात थी। कि लाटरी मेरे नाम निकली ममी लंदन भिजवा दी गई। इसके कुछ दिन बाद हम लोग शिकार खेलने नील नदी मे नाव से जा रहे थे कि अचानक आंधी आ गई। नाव डगमगाने लगी अचानक मेरी बंदूक चल गई और गोली मेरे दांये हाथ में लग गई मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो मैं अस्पताल मे था और मेरा हाथ सड़ने जाने के कारण कंधे से काट दिया गया था मित्रो ने बताया कि नाव तूफान मे 10 दिन तक किनारे पर ना लग सकी हम लंदन वापस चल दिये रास्ते मे मेरे दोनांे दोस्त चल बसे मैं किसी तरह लंदन पहुँचा ममी मेरे घर रखी थी उसकी दहकती आंखों से मुझे बड़ा डर लगता था, एक दिन मेरी एक लेखिका मित्र मुझसे ममी मांग कर ले गयी, अचानक उन पर मुसीबतें टूट पड़ीं घर पहुँचते ही उनकी माँ दुमंजिले से फिसल कर गिर पड़ी उनका एक पैर टूट गया। और वे मर गयी लेखिका की सगाई टूट गई उनके चार कुत्ते पागल हो गये उन्हें गोली मारनी पड़ी वे किसी अज्ञात रोग से पीड़ित हो गयी। तंग आकर उन्होने ममी मुझे वापस कर दी कुछ दिन बाद उन्होंने खुदकशी कर ली। मेरे एक पुरात्वविद मित्र के कहने पर मैने ममी ब्रिटिश म्यूजियम को दे दी बड़ी मुशकिल ये एक चित्रकार ने ममी का चित्र बनाया वह एक घोड़ागाड़ी से टकरा गया स्केच नष्ट हो गया घायल चित्रकार की भी कुछ दिन बाद मौत हो गयी मेरा पुरात्वविद मित्र भी बिस्तर पर मृत पाया गया। इन घटनाओं से घबरा कर ब्रिटिश म्यूजियम के अधिकारियों ने ममी को न्यूयार्क म्यूजियम को भेंट कर दिया उसे टाइटेनिक से भेजा गया जो रास्ते मे ही ममी समेत सैकड़ों यात्रियों समेत डूब गया ममी को एक लाइफबोट में बचा लिया गया ममी न्यूयार्क म्यूजियम पहुंची वहाँ उसने कोई उत्पात नही किया।