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भविष्यवाणी ने बनाया निजाम हैदराबाद को बादशाह
September 1, 2019 • - एस. कुमार

18वीं सदी मे मुगल बादशाह औरंगजेब के एक औसत से अधिकारी थे मीर कमरूदद्ीन। जिनकी राजनिष्ठा, स्वामीभक्ति, युद्ध कौशल और हद दर्जे की दिलेरी का कोई जवाब नही था उनकी इन्ही खूबियों को देखते हुये औरंगजेब ने उन्हें निजाम उल मुल्क फतेहजंग और आसफजान जैसे बहादुरी के खिताबों और कई इनामों से नवाजा था, जिन्हें औरंगजेब की मृत्यु के पष्चात् सन् 1713 बने नये शहंशाह फर्रूखसियर ने डक्कन सूबे का सूबेदार बनाकर वहाँ की राजधानी के लिये रवाना किया डक्कन मुगल साम्राज्य का सबसे समृद्ध सूबा था जिसके पीछे कई कारण थे पहला विष्व प्रसिद्ध हीरों जवाहरातों से भरी गोलकुंडा की खाने। दूसरा बंगाल की खाड़ी से लेकर कन्याकुमारी तक तथा कन्याकुमारी से लेकर पूरे अरब सागर के सभी व्यापारिक केन्द्रों तथा बंदरगाहों पर डक्कन प्रान्त का कब्जा था आने  वाले आठ सालों तक कमरूद्दीन ने बड़ी ईमानदारी से अपने फर्ज को अजंाम दिया सन 1721 मे आसफजाह एक दिन शिकार खेलने गये तो जंगल मे रास्ता भटक गये थकान और भूख से व्याकुल होकर वे एक साधु की कुटी के सामने जा पहुँचे वहाँ उन्हें एक अत्यन्त तेजस्वी साधु के दर्शन हुये वे कुछ कहना चाहते थे उसके ही पहले साधु ने कहा जंगल मे रास्ता भटके हुये मुसाफिर हो थकान और भूख से व्याकुल हो मगर चिन्ता मत करो भीतर आ जाओं संत ने कमरूददीन के हाथ पैर धुलवाये फिर आसन मे बैठाकर संत ने उन्हें पत्तों का एक बंडल दिया जिसे खोलने पर उसमे दर्जन से भी ज्यादा रोटियां और गुड़ की भेलियो निकली भूखे सूबेदार ने उसमे से भरपेट सात रोटियां और सात ढेली गुड़ की खायीं शेष बची रोटियों संत ने चिड़ियों और नेवलों के लिये सामने झाड़ियों मे फिकवा दीं। आसफजान संत को अपना परिचय देना व संत का आभार प्रक्ट करना चाह ही रहे थे कि उससे पहले ही संत बोले मुझे पता है। कि तुम आठ सालों से डक्कन की सूबेदारी कर रहे हो तुम ईमानदार, निष्ठावान व सच्चे प्रजापालक हो तुम्हारी रियाया तुम्हें भगवान मानती है। संत ने आगे एक विचित्र भविष्यवाणी की कि चूँकि तुमने सात रोटियां खाकर तृप्ति पायी है। इसलिए आज से सात साल बादतुम ईश्वर की इच्छा से सूबेदार के बजाय डक्कन के बादशाह बनोगे अगली सात पीढी तक तुम्हारा राजवंश कायम रहेगा जब तक राजवंश कायम रहेगा तुम्हारे वंश मे हीरों जवाहरातों की कमी नही रहेगी सातों समंदर तक सोना चांदी व दौलत के मामले मे तुम्हारे वंश का कोई सानी नही होगा इस मामले मे तुम्हारा राजवंश धरती पर इकलौता होगा सूबेदार बोले यदि परवरदिगार की ऐसी ही इच्छा है। तो काश मैने एक ही रोटी खायी होती फिर संत मुस्करा कर बोले तब तो बेशक तुम एक ही साल बाद डक्कन के बादशह बनते लेकिन मगर तुम्हारा राजवंश तुम्हारे जीवनकाल तक ही चलता और तुम्हारी मौत के साथ ही समाप्त हो जाता। संत ने उन्हें जंगल से बाहर का रास्ता बता कर चेतावनी दी कि अगले सात सालों तक तुहारा जंगल की ओर निकलना शुभ नही है। भविष्यवाणी सच हुयी संत के कहे के अनुसार सन 1728 मे आसफजाह डक्कन के बादशाह बने निजाम वंश के सातवें और आखिरी बादशाह निजाम मीर उस्मान द्वारा 18 सितम्बर 1948 को भारत संघ मे अपनी रियासत के विलय संबधी मसौदे पर दस्तखत करने के साथ ही डक्क्न से निजामशाही शासन का अंत हो गया इतिहास गवाह है कि निजामशाही के अंत तक यह वंश दुनिया के समृद्धतम वंष के रूप में दर्ज रहा।