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भारत का पूर्वी द्वार है नागालैण्ड
June 12, 2019 • विनीत पाल, पूर्वोत्तर राज्य ब्यूरो

भारत के सुदूर पूर्व में स्थित नागालैण्ड राज्य भारत का पूर्वी द्वार और हजारों साल से देश का सजग प्रहरी है। इस पर्वतीय राज्य के पूर्व में बर्मा वर्तमान में म्यांमार पश्च्छिम मंे असम उत्तर में अरूणाचंल और दक्षिण में मणिपुर स्थित है। नागालैण्ड पर्यटन, पर्वतारोहण जंगल भ्रमण ऊंचें-ऊंचें पहाड़ों हरी-भरी घाटियों लहरदार झरनों, के लिये आदर्श जगह है। यहां के सूर्यादय व सूर्यास्त दृश्य प्रकृति सौन्दर्य का अलौकिक आनंद की अनुभूति देते है। यहाँ की विभिन्न स्थानीय जातियों के उत्सव, त्यौहार, नाच-गाने, जीवन की शैली, चावल से बनी शराब भी पर्यटकों का घ्यान अपनी ओर खींचते हैं। यहांँ के दुर्लभ पेड़-पौधे, वनस्पतियां तथा पशु-पक्षी भी नागालैण्ड की विशेषता है। यहां का तापमान गर्मी में 16 से 31 डिग्री सेन्टीगे्रट तथा जाड़े मे 4 से 24 डिग्री सेन्टीगे्रट तक रहता है। यहाँ सात मुख्य दर्शनीय स्थान है।
कोहिमा:- समुद्र तल से लगभग 1500 फुट की उंचाई पर स्थित प्रदेश की राजधानी कोहिमा मुख्य दर्शनीय स्थान है। जो प्राकृतिक सौन्दर्य के अनमोल खजाने से भरपूर है। कोहिमा व्यापार का प्रमुख केन्द्र भी है। कोहिमा प्राकृतिक सौन्दर्य प्रेमियों लिये स्वर्ग है। कोहिमा वार मेमोरियल कोहिमा का मुख्य दर्शनीय स्थान है।
दीमापुर:- दीमापुर राज्य का ना केवल प्रवेश द्वार है। बल्कि राज्य का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र भी है। प्रकृति प्रेमियों के लिये यहाँ कई अनोखे दर्शनीय प्राकृतिक स्थल है। यहाँ 10 वीं सदी के कचारी के भव्य खंडहर यहाँ के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते है।
मोकाकचुंग:-यह नागालैण्ड की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मानी जाती है। यहां के मनमोहक पर्वत और बहते झरनांे का मधुर संगीत पर्यटकों का मनमोह लेता है। यहाँ के नागाओं के परम्परागत त्यौहार भी यहाँ का प्रमुख आकर्षण है।
फेक :- फेक का मुख्य आकर्षण यहाँ के हरे-भरे घने जंगल है। जो यहां की 70 फीसदी जमीन पर फैले हुये है। साथ ही आश्चर्यजनक प्राकृतिक सौन्दर्य है। शानदार पहाड़ सदा नीरा विशाल झीलें जादुई सौन्दर्य रखती हैं।
किफिरे:-यहां का मुख्य आकर्षण साबरमती पर्वत है। जिसमे नागालैण्ड की सर्वोच्च ऊंची पर्वत चोटी है। बर्मा की सीमा से लगे किफिरे का प्राकृतिक सौन्दर्य है। आपको बार-बार यहाँ आने को विवश कर देगा।
वोखा :- वोखा नागालैण्ड के परमपरागत ग्राम्य जीवन के सौन्दर्य से भरपूर है। जो यहां की लोथा जनजाति की मातृभूमि है। हरे-भरे घने जंगल है। अन्नानास, संतरो, बेर के बाग यहाँ के सौन्दर्य को चार चांद लगा देते हैं।
मोन ;डवदद्ध:- समुद्र तल से 900 फुट के ऊंचाई पर स्थित मौन नागालैण्ड का अति रहस्यमय स्थान है। जो नागालैण्ड के उत्तरी पूर्र्वी भाग मे स्थित है। जो यहाँ स्थानीय जनजातियों की सम्पन्न सांस्कृतिक परम्पराओं से भरपूर है। यहाँ की घाटियां, मैदान और पहाड़ों का कोई जवाब नही है।