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मनुष्य जिस स्थान पर रहता है, उसका भाग्य उस स्थान से जुड़ा रहता है
July 13, 2019 • डी.एस.परिहार

पृथ्वी, मानव तथा खगोल पिंडों का अध्ययन, उनके परस्पर संबन्धों तथा पड़ने वाले प्रभावों का ही नाम ज्योतिष है। पुराण के अनुसार जो मनुष्य जिस स्थान पर रहता है, उसका भाग्य उस स्थान से जुड़ा रहता है। उसका उस स्थान से अदृश्य संबन्ध होता है, तथा जातक की समस्याओं का दो तिहाई समाधान उसके घर या कार्यस्थल के आस-पास ही मौजूद रहता है। किन्तु मनुष्य उस समाधान तक पहुँच नही पाता है। प्राचीन श्रृषि-मुनियों का यह मत था कि जो मनुष्य अपने आसपास पास मे मौजूद प्रकृति के निकट जितना अधिक रहेगा, वह उतना ही सुखी, स्वस्थ एवं संन्तुष्ट रहते है। इस लेख में कुछ ऐसे सरल और सर्वसाधारण को उपलब्ध उपायों को प्रस्तुत किया जा रहा है। जिन्हें अपनाकर मनुष्य आर्थिक समस्याओं से मुक्ति पा सकता है।
धन, पृथ्वी में उत्पन्न सभी वस्तुयें है जिनकी व्यक्ति के पास उपलब्धि ही उसे धनी बनाती है। संसार की समस्त छोटी-बड़ी वस्तुओं जो मनुष्य के जीवन को अनुकूलता प्रदान करती है। षुक्र ग्रह के अन्र्तगत आती है। शुक्र स्वर्ग, भोग-विलास की वस्तुओं, नगद, मकान, कार, टेलीविजन, फ्रिज व अन्य सौन्दर्य व विलास की वस्तुओं का प्रतीक है। धन तक पहुँचने का रास्ता कर्म (षनि) है। कर्मो द्वारा ही धन प्राप्त कर उन्हें खरीद सकते है। शनि सभी प्रकार के आर्थिक कर्मो का प्रतीक है। जो तीन प्रमुख है- खेती, व्यापार और नौकरी, शुक्र सौन्दर्य का प्रतीक है तथा षनि कर्मो (श्रम) का प्रतीक है।
अपने आसपास के वातावरण को सुधारने के कुछ सूत्र इस प्रकार है।
1. जातक के मकान या कार्यस्थल पूर्व दिशा की, नौकरी, उत्तर-पूर्व के तथा दक्षिण-पूर्व की दिशा धन की उत्तर दिशा खजाना व जनसम्पर्क तथा धनोवार्जन की क्षमता की है। अतः मकान या कार्य स्थल के पूर्व का स्थान खुला स्वच्छ व प्रकाश व हवा के लिये खुला होना चाहिये।
2. जल धन का प्रतीक माना गया है। अतः मकान या कार्यस्थल के पूर्व या उत्तर में नदी तलाब जल निकासी की नाली या भूमिगत टैंक धन संचय कराते है। पूर्व को खुला स्थान, षीघ्र नौकरी दिलाता है।
3. जल धन का प्रतीक माना गया है। कमल मे विराजमान माँ लक्ष्मी तथा समुद्र की पुत्री लक्ष्मी चलायमान व गतिषील है, तथा वे पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण बहती है। उत्तर व पूर्व मे खुला व निचला स्थान इन्हें आप के घर मे प्रवेश का रास्ता देगा तथा मकान या दुकान क उत्तर या पूर्व में ऊँचा टीला, ऊँची जमीन, ऊँची सटी हुयी बिल्डिंग,बड़े पेड़ खंबे अदि आपके घर मे धन प्रवाह को रोकते हैं।
1. अनावश्यक कूड़ा व पत्थर भी जल प्रवाह रोकते है। अतः उत्तर या पूर्व मे कूड़े या कबाड़ के ढेर तथा पत्थरों का ढेर व्यर्थ की सामग्री धन कमाने मे बाधा देती है, इन्हें तुरन्त हटा दे।
2. छोटे बगीचे व फूलदार पौधे धन लाते है। इन्हें पूर्व दिशा व उत्तर दिशा मे लगा दे। यह बुध ग्रह (कुबेर) व शुक्र (इत्र, पुष्प कारक) के प्रतीक हैं।
3. रसोई ग्रह धन की प्रतीक है, इसे दक्षिण पूर्व मे बनायें यदि विपरीत दिशा मे हो तथा उसमें एक शीशा लगाये। कबाड़, पत्थर के ढेर, अनावश्यक वस्तुये, मकान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में रखे। उत्तर दिशा खुली व स्वच्छ होने से जनता से उत्तम जनसम्पर्क बनता है। जो धन, सम्मान, व्यवहार और व्यापार देती है। व्यापार स्थल व घर सुन्दर स्वच्छ रखें कोई हिस्सा टूटा हो तो तुरन्त मरम्मत कराये। मकान का दक्षिण पश्चिम हिस्सा उत्तर पूर्व दिशा की अपेक्षा ऊँचा कराये, यदि ऐसा संभव ना हो तो इन दिशाओं में ऊँचे पेड़ लगाये जो आपके मकान से ऊँचा हो। इन उपायों से निश्चत ही आपकी धन की बाधायें दूर होगी और आपकी आर्थिक समस्यायें दूर होंगी।