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विघ्नहर्ता-सुखकर्ता श्री गणेश
August 22, 2019 • सरल अग्निहोत्री

श्री गुरूचरण सरोज, मस्तक लीन्ही चढ़ाय।
'लाल' हस्गति लेखनी, सुमिरत शारदा माय।।
जै जै जै सिन्धुर्बदन गौरी पुत्र गणेश। 
मूषक वाहन गणसदन, काटौ सकल कलेश।।
 भारत के पर्व यहाँ सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक हैं। रिद्धी-सिद्धी दाता शिव-पार्वती पुत्र श्री गणेश का हिन्दू समाज में विशेष महत्व है, किसी भी कार्य का शुभारम्भ श्री गणेश वन्दना से होता है। विघ्नहर्ता-सुखकर्ता श्री गणेश भाद्रपद मास की चतुर्थी को सिद्धिविनायक श्री गणेश प्रकट हुए थे। इस दिन को सिद्धिविनायक गणेश चतुर्थी भी का जाता है। देश भर में इसी दिन से गणेशोत्सव का शुभारम्भ होता है। गणेश चतुर्थी हमकों उत्सव के साथ-साथ कई संन्देश दे जाता है। क्योंकि यह एक ऐसा अवसर रहता है, जब भेदभाव रहित गणेशोत्सव बहुत धूमधाम से मनाते है। गणपति बप्पा मोरया यानि की श्री गणेश जी की विशेषता है कि उनके स्मरण से ही समस्त कार्य सुचाररूप से सम्पन्न हो जाते है और सभी विघ्न-बाधायें दूर हो जाती है।
 प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी देशभर में गणेशोत्सव की तैयारियाँ जोरों से चल रही है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में कड़ी सुरक्षा में 11 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव धूमधाम से मनाये जाने वाले इस उत्सव की विशेष व्यवस्था की जाती है। गणेशोत्सव का शुभारम्भ श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया का जयघोष करते हुए श्री गजानन गणेश जी की मूर्ति स्थापना के साथ आरम्भ होता है।
 भारत की स्वाधीनता से पहले स्वतंत्रता सेनानी श्री बालगंगाधर तिलक ने इस उत्सव की शुरूआत की थी। अंग्रेजों के शासन के दौरान शहर में लोगों को एकत्रित करके उन्हें आजादी का सन्देश देना बहुत कठिन काम था। ऐसे समय में बालगंगाधर तिलक ने एक विकल्प निकाला और उन्होंने श्री गणेश सार्वजानिक महोत्सव का आयोजन किया। देखते ही देखते लोगों की भीड़ एकत्रित होने लगी। इस तरह भी महाराष्ट्र में स्वाधीनता की लड़ाई आगे बढ़ी। तब से आज तक सम्पूर्ण महाराष्ट्र में प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थी का सार्वजनिक महोत्सव हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। देश मंे आतंकवादियों और दहशतगर्दो के कारण अब गणेश चतुर्थी का सार्वजनिक महोत्सव में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। इन मण्डपों में सुरक्षा के लिए मेटल डिटेक्टर से तलाशी और क्लोज सर्किट कैमरों (सीसीटीवी) से निगरानी की जाती है। गणेश चतुर्थी का सार्वजनिक महोत्सव का सम्पूर्ण महाराष्ट्र में विशेष रूप से मुम्बई में गणेशोत्सव का अपना अलग ही अन्दाज होता है। यहां फिल्मों की तरह लाखों रूपयों की लागत से तरह-तरह के सेट्स लगाये जाते है और श्री विघ्नहर्ता की विराटकाय मूर्तियों की    अराधना होती है। भक्तजन इन इन भव्य दृश्य को देखने के लिए घंटों कतारें लगाये अपनी बारी का इन्तजार करते थकते नहीं है। फिल्म संसार भी इससे अछूती नहीं रहती है। प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर तो 11 दिनों तक अपने घर पर श्री गणपति की स्थापना करते है। उनके घर हजारों लोगों की भीड़ लगी रहती है। महाराष्ट्र के पुणे नगर में भी सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रसिद्ध है। पुणे के मशहूर दगडूसेठ द्वारा गणेशोत्सव का आयोजन वर्षो से होता चला आ रहा है। आज भी आनन्द उल्लास के साथ पुणे मे गणेशोत्सव मनाया जाता है।
 उत्तर प्रदेश में भी गणेशोत्सव श्रद्धा और उत्साहपूर्वक मनाया जाता हैं। राजधानी लखनऊ में गणेशोत्सव का प्रमुख कार्यक्रम श्रीगणेश प्राकट्य कमेटी द्वारा आयोजित किया जाता है। भाद्रपद शु. 14 अनन्त चतुर्दशी यानी की विघ्नहर्ता की विदाई का दिन होता है। अन्तिम दिन लाखों लोगों की भक्तों भीड़ उमड़ती है। और पूरे आनन्द श्रद्धा के साथ गणपति को विराट सागर में विसर्जन किया जाता है। इस भव्य दृश्य को देखते अनायास भक्तों की आंखों से आंसू  उमड़ पड़ते है। और वहां के क्षेत्र सम्पूर्ण में हर्षानाद सुनाई देता है। गणपति बप्पा मोरया पुढच्चा वर्षी लवकर या अर्थात... हे गणपति बप्पा अगले बरस तू जल्दी आ...।