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स्वतंत्रता संग्राम का एक सिपाही रामधारी शास्त्री
July 16, 2019 • उदय प्रताप सिंह ‘मुन्ना’


अग्रिम पंक्ति के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री रामधारी शास्त्री, सांसद-मंत्री रहे उनका जन्म 2 जनवरी 1923 को मौजा महुअवा खुर्द पोस्ट सोहंग जनपद कुशीनगर, उत्तर प्रदेश के एक निर्धन किसान परिवार मे हुआ, पिता श्री नन्दप्रसाद सिंह माता श्रीमती तिलझारी देवी। बालक रामधारी ने सोहंग से प्राइमरी और फाजिलनगर से मिडिल स्कूल की परीक्षा पास किया। निर्धनता के कारण पडरौना या कुशीनगर के हाईस्कूल मे प्रवेश सम्भव नही हुआ। लाचार होकर उर्दू मिडल की परीक्षा प्राईवेट अभ्यर्थी के रूप मे पास किया। पिता की इच्छा थी की बालक रामधारी किसी प्रकार बी.टी.सी. पास कर अध्यापक बन जाय। लेकिन ऊपर वाले को यह मंजूर नही था। 1937 मंेेे प्रथम आम चुनाव हुआ, इस चुनाव में कांग्रेस ने सक्रिय भाग लिया। देशभर मे नव जन-चेतना की लहर चली जो परिर्वतन की आश्धी मे बदल गयी उस परिवर्तन की आंधी मंे किशोर रामधरी बह गए और कांग्रेस का तिरंगा हाथ मे लेकर काग्रेस के स्वयम् सेवक बन गए। तब गोरखपुर जिला था। प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना जिला कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। 1938 की गर्मियों में कांग्रेस सेवा दल का घुघली में कैम्प हुआ। शास्त्री जी उस कैम्प में दाखिल हो गये। यही से प्रारम्भ होता है गांव-गांव घुमकर कंाग्रेस का चैअन्नी वाला सदस्य बनाना। जमींदारो के जुल्म ज्यादतियो के विरूद्ध सघर्ष करना। गांगीटीकर ग्राम में तत्कालीन ताल्लुकेदार के अत्याचारों के विरूद्ध किसानों का समर्थन करने के बदले अपने दो साथियो बृज नरायण तिवारी और राजदेव सिंह के साथ से पीटे गये। द्वितीय विश्व महायुद्ध शुरू हो गया। कांग्रेसी मंत्रीमण्डलों ने त्यागपत्र दे दिया। कांग्रेस ने भारत को स्वतंत्र कर देने की शर्त पर ही विश्वयुद्ध में अंग्रेजो की सहायता करने का निश्चय किया। अंग्रेजों द्वारा शर्त न मानने पर गाश्धीजी ने विरोध प्रदर्शन हेतु व्यक्तिगत सत्याग्रह करने का एलान किया। शास्त्री जी ने भी इस अंग्रेजी लड़ाई में आदमी या पैसे से मदद करना हराम है का नारा लगाया। परिस्वरूप गिरफ्तार हुए, गोरखपुर जिला जेल में बंद कर दिए गए। डीआईआर के अंतर्गत एक वर्ष कठोर कारावास और जुर्माने की सजा हुई 8 जून 1941 को शास्त्री जी को बस्ती भेज दिए गए बस्ती जेल में पूरे उत्तर प्रदेश के सभी किशोर राजनीति बंदी एकत्र किए गए थे आम रिहाई के दौरान शास्त्री 22 सितंबर 1941 को बस्ती जिला से मुक्त कर दिए गए । शास्त्री जी पढ़ाई के लिए प्रवेश हेतु प्रयास करने लगे तब तक अगस्त आ गया 8 अगस्त 1942 को ग्वालिया टैंक मुंबई में कांग्रेस द्वारा अंग्रेजों भारत छोड़ो करो या मरो का ऐतिहासिक प्रस्ताव पास हुआ 9 अगस्त 1942 को कांग्रेस के गैरकानूनी घोषित कर दी गई परिणाम स्वरूप सारे देश में बड़े पैमाने पर कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई। 1945 की होली के अवसर पर पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा श्री शास्त्री वहां से भी बच निकले सरकार की ओर से उनकी गिरफ्तारी पर 75 रूपये का इनाम था। अपसी मदभेदों के कारण बाद में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गए तत्कालीन मजदूर नेता काशीनाथ पांडे का पत्र लेकर काशी विद्यापीठ वाराणसी चले गए समाजवादी चिंतक आचार्य नरेंद्रदेव की कृपा से शास्त्री जी को काशी विद्यापीठ में प्रवेश मिल गया 10 रूपये मासिक छात्रवृत्ति भी मिलने लगी। शास्त्री जी एक वर्ष तक सोशलिस्ट पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय में काम करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिल हो गए 1952 में लखनऊ विश्वविद्यालय में एमएलएलबी करने के पश्चात शास्त्रीजी की इंटर काॅलेज सिसवा बाजार गोरखपुर में नागरिक शास्त्र इतिहास के प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति हो गई तब प्रवक्ता में 300 मासिक पारितोषिक मिलता था 1955 में इस नौकरी को भी छोड़ शास्त्री जी ने 1956 में वकालत प्रारंभ की राजनीति में सक्रियता का लाभ मिला इनकी वकालत चल निकली। 1969 में शास्त्री विधानसभा का चुनाव लड़ा टी.एन. सिंह के नेतृत्व वाली संविद सरकार में राज्यमंत्री लोक निर्माण बनाए गए। शास्त्री जी को 1975 में आपातकाल में नजरबंद कर सेंट्रल जेल बरेली के लिए भेज दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद लोकसभा के चुनाव में शास्त्री जी को जनता पार्टी के टिकट पर जीतकर लोकसभा में पहुंच गए संसदीय दल के महामंत्री चुने गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भारतीय प्रतिनिधिमंडल के थाईलैंड सिंगापुर इंडोनेशिया की यात्रा का अवसर मिला। शास्त्री जी की उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद की मान्यता समिति के संयोजक पद के प्रतिष्ठान हुई पूर्वान्चल की शिक्षा संस्थाओं को हाई स्कूल और इंटर की मान्यता प्राप्त करने में शास्त्री जी ने पूर्व के सारे रिकाॅर्ड तोड़ दिया इसके अतिरिक्त शास्त्री जी अनेक शैक्षिक सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे। रामधारी शास्त्री जी ने स्वतंत्रता संग्राम से बढ़-चढ़कर भाग पूर्वान्चल प्रदेश बचाओ मंच के बैनर तले जन जागरण का सक्रिय प्रयास किया किसानों की समस्याओं से जूझते रहना शास्त्री जी की आदत ही बन गई थी शास्त्री जी आजीवन सामाजिक संघर्ष एवं समाज की शिक्षित करने का अथक प्रयास करते हुए अंततः 2 अप्रैल 2014 को इस नश्वर जगत से महाप्रयाण कर गए।