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आखिर मैं हूं कौन’ पर परिचर्चा
April 13, 2020 • प्रयागराज। • Views

ऋतंधरा मिश्रा की कविताएं महज कविताएं भर नहीं हैं, इनमें जीवन के तमाम मोर्चो पर लड़ रही एक स्त्री की संघर्ष कथा भी हैं, जो कभी-कभी आत्मकथा जैसी भी लगती है। ‘आखिर मैं हूं कौन’ की कविताओं में कोमलतम एहसास से लेकर कटुतम या कठोतम एहसास का भी दस्तावेजीकरण कवयित्री ने अत्यंत सघनता के साथ रूपायित किया है। उसके कथ्य में ही उसका शिल्प अन्तर्निहित है। ‘भाषा बहता नीर’ के मुहावरे को चरितार्थ करती उसकी आत्मभिव्यक्ति हमारी बहुत अपनी सी लगती है। यह विचार मशहूर गीतकार यश मालवीय ने गुफ्तगू द्वारा आयोजित ‘ऑनलाइन काव्य परिचर्चा’ में व्यक्त किया। उधमसिंह नगर की कवयित्री शगुफ्ता रहमान ने कहा कि ऋतंभरा मिश्रा की कविताओं को पढ़कर एहसास होता है कि यह रचनाएं केवल कविता नहीं बल्कि विभिन्न मोर्चों पर लड़ रही एक नारी की संघर्ष कहानी है। कानपुर की कवयित्री ममता देवी ने कहा कि ऋतंधरा ने अपनी कल्पना के सेतु में खोजती हुई खुद को ‘आखिर मै हूं कौन’ के पन्नों को भर डाला। उनकी ‘तलाश’ कविता स्पष्ट शब्दों में उनके पंछी मन की छटपटाहट को व्यक्त करने में सक्षम है कि उनकी निगाहे अभी भी वह तलाश कर रही है जिसे वह अभी तक खोज रही थी। गीतकार नीना मोहन श्रीवास्वत ने कहा कि ऋतंधरा जी की कवितायें नारी-संघर्ष और नारी-पुरूष विषमता को उजागर करती हैं। जहां ‘आखिर मैं हूँ कौन’ में वह स्वयं से प्रश्न करती हैं, वही दर्द को अपने अन्तरमन मे सहेजती और समेटती हुई एक स्वाभिमानी स्त्री अपने अस्तित्व हेतु संघर्षमय होने का भान कराती है। अर्चना जायसवाल के मुताबिक ऋतंधरा जी की कविता अत्यंत सरल हिदी भाषा का प्रयोग करते हुए नारी के अन्तर्मन में चल रहे विभिन्न पहलुओं को अत्यंत सजीव चित्रण करती है। वह अपनी कविता के माध्यम से नारी मन मे उठने वाले प्रश्न उत्तर को बड़ी ही सहजता से कह देती है। रचना सक्सेना के मुताबिक ऋतम्भरा की कविताएं भाषा और भाव दोनो ही दृष्टि से समृद्ध हैं। मनमोहन सिंह ‘तन्हा’ के अनुसार ‘आखिर मै हूं कौन’ शीर्षक से ही जाहिर है रचनाकार स्वयं इस प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास कर रही हैं, अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता को आधार बना कर, और कहीं-कहीं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है। कवयित्री ने कहीं भी शब्दों या भाषा को बोझिल नहीं होने दिया है। संजय सक्सेना, अनिल मानव, अतिया नूर, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, जमादार धीरज, नरेश कुमार महरानी, प्रभाशंकर शर्मा, शैलेंद्र जय, सागर होशियारपुरी आदि ने भी परिचर्चा में भाग लिया। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी और अध्यक्षता यश मालवीय ने किया। मंगलवार को यश मालवीय की कविताओं पर परचर्चा होगी, अध्यक्षता मुरादाबाद के मशहूर गीतकार माहेश्वर तिवारी करेंगे।