ALL News Religion Views Health Astrology Tourism Story Celebration Film/Sport Vedio
अम्लपित्त
November 13, 2019 • डा सुरेश चन्द्र शुक्ला

यह रोग आमाशय में अत्याधिक अम्ल बनने के कारण होता है। इसमें रोगी के नेत्र, गले, भोजन नली, आमाशय, छोटी आंत व हृदय प्रदेश मेे जलन होती है। अत्याधिक प्यास लगती है।
कारण:-
1. अम्ल, लवण, कटु तिक्त, कषाय द्रव्यों के अधिक सेवन से।
2. मिर्चा, तेल, खटाई, चिकने तले भुने पदार्थों के अधिक सेवन से। 
3. पूड़ी पराठा, घी, दूघ, दही मलाई आदि के अधिक सेवन से।
4. जठराग्नि की तीव्रता अधारणीय वेगों केा रोकने से भी मूत्र मे जलन व दाह होती है। अमाशय में अधिक मात्रा में निकला अम्ल पित्त के साथ मिल कर अम्ल पित्त रोग की उत्पत्ति करता है। 
लक्षण:- खट्टी डकारें आना, गले आमाशय छोटी आंत व हृदय में जलन, मिचली, उल्टी (वमन), क्षुधा अल्पता, अजीर्ण थकान व शरीर का भारीपन, मल व मूत्र में जलन व पीड़ा अम्ल पित्त के मुख्य लक्षण हैं। अम्ल पित्त रोग की तीव्रता से यकृत वृद्धि, पित्ताशय वृद्धि, आमाशय व छोटी आंत में घाव, अल्सर, उल्टी (वमन) रक्त पित्त हलीभक कामला, जलोदर (सिरोसिस आॅफ लीवर, वायु विकार गैस, आमाशय व छोटी आंत में सूजन आदि बीमारियां उत्पन्न होती है। पित्त आयुर्वेद मतानुसार निम्न प्रकार का होता है। नाम, स्थान।
1. पाचक पित्त आमाशय, पक्वाशय व छोटी अंात मे रहता है। 
2. रंजक पित्त यकृत और प्लीहा मे रहता है।
3. साधक पित्त हृदय में रहता है।
4. आलोचक पित्त नेत्र में रहताहै।
5. भ्राजक पित्त त्वचा में रहता है। 
चिकित्सा:-
1. कच्चे नारियल का पानी 100 से 300 मिली ग्राम दिन में दो बार भोजन के बाद लें।
2. आंवला फल मज्जा का चूर्ण 3 से 5 ग्राम 200 मिली दूघ से सुबह शाम दिन में दो बार लें।
3. बड़ी ईलायची के दानों का चूर्ण 1 से 2 ग्राम 1 चिम्मच शहद से सुबह शाम लें।
5. हरी धनिया का स्वरस 2 चिम्मच शहद एक चिम्मच सुबह शाम दिन मे दो बार लें।
6. हरे पुदीना का रस 2 चिम्मच शहद एक चिम्मच सुबह शाम दिन मे दो बार लें।
7. हरी धनिया का रस, हरे पुदीना का रस, दोनो एक एक चिम्मच शहद एक चिम्मच सुबह शाम पिये।
8. हरें आंवलें का रस 1 चिम्मच हरी धनिया का रस, हरे पुदीना का रस, शहद एक चिम्मच मिला कर भोजन के बाद दोनों समय लें।
9. आंवले का फल का चूर्ण 1 ग्राम भृंगराज का चूर्ण 1 ग्राम शहद 1 चिम्मच लें।
10. हरिद्रा का सूखा कंद पटोलपत्र एवं आंवला फल मज्जा 500 मिली ग्राम प्रत्येक चूर्ण मिला कर भोजन के बाद 1 चिम्मच शहद से दोनो समय लें।
11. गुरूच के तने, नीम के पत्र या फल पटोल (परवल) के पत्र तीनों को समान मात्रा में लेकर काढा बनाये इसे 10 से 15 मिली की मात्रा में दिन मे 2 बार भोजन के बाद सेवन करें।
12. भूम्यामल भूमि आंवला की पचंाग स्वरस 2 चिम्मच मधु 1 चिम्मच मिला के भोजन के बाद दिन मे 2 बार सेवन करें।
13. पटोल पत्र, अडू़सा के पत्र गुरूचतना चूर्ण एवं कुटकी को समान भाग मे लेकर काढा बनाये इसे 15 से 20 मिली की मात्रा मे 1 चिम्मच शहद में मिला कर दिन मे 2 बार सुबह शाम लें।
औषघियां:-
1. धात्री लौह 500 से 1 ग्राम 1 चिम्मच देशी घृत या मधु के साथ दिन मे 2 बार सुबह शाम लें।
2. आपत्तिकर चूर्ण 3 से 5 ग्राम भोजन के बाद दिन मे 2 बार लें।
3. भूम्यामल भूमि आंवला चूर्ण 2 से 3 ग्राम 1 चिम्मच शहद के साथ दिन मे 2 बार सुबह शाम नाश्ते के बाद प्रयोग करें।
4. काम दुधारस 200 से 400 मिली ग्राम 1 चिम्मच शहद के साथ मिला के दिन मे 2 बार सुबह शाम लें।
5. सत गिलोय (सत्व) 1 से 2 ग्राम दिन में 2 बार 1 चिम्मच शहद से लें।
6. लीलाविलास रस 100 से 200 मिली ग्राम मिला कर सुबह शाम 2 बार सेवन करें।
7. अर्जुनघन सत्व 5 मिली ग्राम जहर मोहरा खताई पिष्टी 100 मिली ग्राम सत्व गिलोय 50 मिली ग्राम 1 चिम्मच शहद से सुबह शाम लें।
8. प्रवाल पिष्टी 100 मिली ग्राम अर्जुन धन सत्व 50 मिली ग्राम सत्व गिलोय गुरूच 100 मिली ग्राम 1 चिम्मच शहद से सुबह शाम लें।
9. शंख भस्म 200 मिली ग्राम प्रवाल पिष्टी 100 मिली ग्राम 1 चिम्मच शहद से सुबह शाम लें।
10. मुक्ता प्रवाल पंचमृत रस 100 मिली ग्राम सत्व गिलोय गुरूच 50 मिली ग्राम सुबह शाम 1 चिम्मच शहद से  लें।
11. सूतशेखर रस 150 से 250 मिली ग्राम सुबह शाम 1 चिम्मच शहद से  लें।
12. नारियल केलाखण्ड 3 से 5 ग्राम 200 मिली दूध या 1 चिम्मच शहद से सेवन करें।
13. क्षारराज 100 मि ग्राम 1 चिम्मच शहद से दिन मे 2 बार सेवन करें।
14. दशंाग क्वाथ 15 से 20 मिली 1 चिम्मच शहद मिलाकर दिन मे 2 बार सेवन करें।
15. आरेग्यवर्धिनी वटी 1-1 गोली भोजन के बाद दोनो समय जल के साथ लें।
16. गुलकंद 1 से 2 चिम्मच सुबह शाम नाश्ते के बाद 100 मिली दूध से लें।
17. सत्व गलोय 250 मिग्रा 1 चिम्मच शहद से भोजन के बाद दिन और रात मे लें।
18. प्रवाल पिष्टी 100 मिली ग्राम आरेग्यवर्धिनी वटी 1 गोली काम दुधारस 50 मिली ग्राम 1 चिम्मच शहद से सुबह शाम लें।
अम्लपित्त रोग में पथ्य:-
1. रोगी को 2 छोटी इलायची व 2 छोटी पिपल साबुत 1 गिलास दूध में पका कर ठंडा करके सुबह शाम नाश्ते के समय पियें।
2. आंवले के फल का मुरब्बा सुबह शाम नाश्ते के बाद 2 सप्ताह तक लें।
3. गुलकंद सुबह शाम 2-2 चिम्मच नाश्ते के बाद 100 मिली दूध से सेवन करे 2 सप्ताह लें।
4. पपीता व सेब 100 से 200 ग्राम प्रतिदिन प्रयोग करें।
पुराना शालि चावल, गेंहू, मूँग, सत्तू, जौ का सत्तू, शहद, दूध शीतल जल, करेला, कपित्थ, कैथा, अचार, आंवल के फल, परवल के फल, व पत्ते, हरी धनिया, पुदीना, वेतस शुंग अम्लपित्त के रोगी के लिये दैनिक जीवन में उपयोगी आहार भोजन है। पेठा या कुष्मंाड का सेवन करें।
अपथ्य- गुड़, अम्ल, कटु, तिक्त लवण कषाय द्रव्य, नवीन अन्न, विरूद्ध आहार तिल के बीज, माष उर्द एवं कुलत्थ तेल मे बनाये पदार्थ मिर्च, लाल खटाई, दही मलाई, मद्य, शराब, सिरका, पूड़ी, पराठा, अम्लपित्त के रोगी के लिये हानिकारक द्रव्य हैं।