ALL News Religion Views Health Astrology Tourism Story Celebration Film/Sport Vedio
बेबाकी से अपनी बात कहती हैं सम्पदा: प्रिया
April 23, 2020 • प्रयागराज। • Views

सम्पदा मिश्रा कविताओं के माध्यम से अपनी बात बेबाकी से कहती हैं। इनके काव्य संग्रह ‘बस हमारी जीत हो’ की कविताओं में देश में समभाव और सामंजस्य स्थापित करने की भावना, मानवतावादी विचार, वृक्षारोपण जैसे आवश्यक मुद्दे पर अपनी बात कहना और अपने सपनों के भारत वर्ष में इंसानियत जिंदा रखना आदि तथ्य विद्यमान हैं, जो उनके कवि धर्म को पूर्ण कर रहे हैं। यह बात उरई की वरिष्ठ कवयित्री प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ ने गुफ्तगू द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्यिक परिचर्चा में गुरुवार को कहा। मैनपुरी जिले के बेसिक जिला शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि इस पुस्तक में कविता के माध्यम से राष्ट्र और राष्ट्रीयता जैसे सामान्य विषयों पर सामान्य तरीके से अपनी बात कही गई है। कथ्य और शैली दोनों ही संदर्भों में दृष्टिकोण परंपरागत है। शैलेंद्र जय ने कहा कि संपदा मिश्रा एक भाव- प्रवण कवयित्री हैं, जिनमें मानवता, देश प्रेम की भावना और सामाजिक सरोकारों के प्रति सजगता कूट-कूट कर भरी है। ये कविताएं इन्हीं भावनाओं से ओतप्रोत, सीधे उनके हृदय से निसृत हुई लगती हैं जो न छंद-बद्ध रचनाओं के सोपानों को चढ़ लेने की प्रतीक्षा करती हैं और न ही छंद-मुक्त कविता के प्रवाह को बाधित करना चाहती हैं। ये कविताएं उनके हृदय की सरलता व सच्चाई की काव्य रूप परिणति हैं।
अनिल मानव ने कहा कि राष्ट्रवाद की मूल भावना से ओतप्रोत पुस्तक ’बस हमारी जीत हो’ में सम्पदा मिश्रा ने जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर एक आदर्श राष्ट्र की परिकल्पना करते हुए ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ नीति की पक्षधरता दिखायी है। इन्होंनेऐसे सपनों के भारतवर्ष की कामना की है, जिसमें इंसानियत, निःस्वार्थता, निडरता हो तथा रूढ़िवादिता के काले बादल कहीं दिखाई न पड़ें। आपके काव्य में राष्ट्र की हर सामयिक समस्याओं का जिक्र मिलता है। साम्प्रदायिकता, आतंकवाद, धर्मोन्माद, भ्रष्टाचार, शोषण आदि के उन्मूलन का स्वर तीव्रता लिए मुखरित होता है। अना इलाहाबादी के मुताबिक सम्पदा मिश्रा एक ऐसी कवियत्री हैं, जो बगैर किसी लाग लपेट के सीधे-सीधे अपनी बात कहने का हुनर रखती हैं। इनकी कविताओं में राष्ट्र प्रेम के साथ ही जीवन के विभिन्न पहलुओं पर संवेदनाओं के साथ- साथ व्यंग्य भी समावेशित है। सुमन ढींगरा दुग्गल ने कहा कि संपदा मिश्रा ने अपनी कविताओं में बिम्बों तथा सरल शब्दों के माध्यम से प्रवाहपूर्ण, सारगर्भित बात कही है। इनकी लेखनी ने विविध विषयों पर सफलता पूर्वक शब्द चित्र उकेरे हैं। देश प्रेम, आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और पर्यावरण जैसे ज्वलंत विषयों पर सुंदर कविताओं का सृजन किया है। इनके अलावा मनमोहन सिंह ‘तन्हा’, जमादार धीरज, ऋतंधरा मिश्रा, डॉ. ममता सरूनाथ, शगुफ्ता रहमान, नरेश महारानी, रचना सक्सेना, रमोला रूथ लाल ‘आरजू’ और अर्चना जायसवाल ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। शुक्रवार को प्रभाशंकर शर्मा की कविताओं पर परिचर्चा होगी।