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बेरोजगारी एवं एस्ट्रोलाॅजी
August 5, 2020 • विशेष संवाददाता • Astrology

वैदिक ज्योतिष एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान अलीगंज, लखनऊ के तत्वाधान में 136 वीं मासिक सेमिनार का वर्चुअल आयोजन वाराह वाणी ज्योतिष पत्रिका कार्यालय में किया गया। सेमिनार का विषय बेरोजगारी एवं एस्ट्रोलाॅजी था जिसमे डा. डी.एस. परिहार के अलावा जज एल.बी. उपाध्याय श्री एस.पी. शर्मा, प. शिव शंकर त्रिवेदी, प. के.के. तिवारी, श्री उदयराज कनौजिया, डा. पी.के. निगम. आचार्य राजेश श्रीवास्तव, प. एस.एस. मिश्र तथा प. आनंद त्रिवेदी आदि ज्योतिषियोें एवं श्रोताओं ने भाग लिया गोष्ठी मे डी एस परिहार, पं. के.के. तिवारी, आचार्य राजेश श्रीवास्तव जज श्री लाल बहादुर उपाध्याय, श्री उदयराज कनौजिया, तथा प. आनंद त्रिवेदी ने अपने अनुभव और व्यक्तव्य प्रस्तुत किये प. आनंद त्रिवेदी ने बताया कि कोरोना के कारण वर्तमान समय मे बेरोजगारी बढी है। लाॅकडाउन मे जनता और व्यापरियों की पूंजी नष्ट हो गई है। हजारों कारखानों के श्रमिक गांव वापस लौट गये है। लोग बाजार मे बहुत कम आ रहें है। कारखानें बंद होने से बेरोजगारी फैली है। आचार्य राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि लग्न चन्द्र लग्न और से दशम भाव से व्यवसाय देखते है। यह दशमेश नवांश मे जिस राशि मे हो वह राशि जाब का क्षेत्र बताती है। वरिष्ठ ज्योतिषी श्री एस.पी. शर्मा ने बताया कि बेरोजगारी के लिये के.पी. सिस्टम मे भी भी बेरोजगार उत्तम सूत्र बताये गये हैं एकादश भाव मनोकामनापूर्ति का है। जंत्रपत्री के दशम भाव, लाभ भाव, धन भाव तथा तृतीय भाव के एक्टिवेट होने से तथा इन भावो के नक्षत्र स्वामियो का परस्पर संबध बनने से जातक को रोजगार मिलता है। डी.एस.परिहार ने बताया कि शनि आर्थिक कर्मो सहित अन्य सभी प्रकार के कर्मों का कारक है। इसमें शनिगत राशि, उससे 1, 2, 5, 7, 9, 12 भावों के ग्रह मिलकर जातक के जाॅब का निर्धारण करते है। शनि पर उसके शत्रु ग्रहों चन्द्र मंगल या केतु का प्रभाव बेरोजगारी देता है। शनि मंगल युत या शनि से 7 वें मंगल हो या शनि से द्वितीय या अगले भावों में मंगल हो तो जाॅग मे शत्रु भारी बाधा डालें जातक श्रम अधिक करे पर धन बहुत कम पैदा होगा यदि उपरोक्त स्थिति मे चन्द्र हो तो जाॅब बहुत साधारण या छोटा हो उसमे निरर्थक यात्रायें या भटकाव हो व जाॅब संबधी निराशा व चिंता रहे या जाॅब मे मन ना लगे यदि उपरोक्त स्थिति मे शनि के साथ केतु हो दैवी व प्रकृतिक बाधायें आयें जातक इनसे निराश होकर भगवान का आसरा ले पर केतु अंत मे सुधार देता है। और कभी-कभी सरकारी या धार्मिक संस्थान मे जाॅब देता है।