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बेटियाँ घर मे हो तो घर की दीवारे बोलती है
November 10, 2019 • बी.के.बाजपेयी

'यत्र नारी पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता' अर्थात जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते है कहते है जिस घर में महिलायें हैं वहां कोई भी भूखा नही सो सकता भारतीय व हिन्दू संस्कृति में महिलायें विभिन्न स्वरूपो मे जैसे बेटी, मां, बहन और पत्नी परिवार को सवारने मे अपना योगदान देती है सामाजिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर गार्गी अपाला, अहिल्या, इन्दिरा गांधी, सरोजनी नायडू, कल्पना चावला आदि महिलाओं ने अपने कार्या से देश का नाम रोशन किया है जिस देश मे राष्ट्रपति, प्रधानममंत्री, लोकसभा अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष तथा कई राज्यांे की मुख्यमंत्री एवं कई राजनैतिक दलों के अध्यक्ष पद को महिलायंे सुशोभित कर चुकी है या वर्तमान में कर रही है उस देश में महिलाओ के प्रति दिनबदिन बढ़ रहे छेडछाड, बलात्कार, दहेज उत्पीडन एवं घरेलू हिंसा की घटनाये क्या देश व समाज के माथे पर कलंक नही है। घर से निकल कर बस, रेल आफिस, स्कूल, सडक हर जगह महिलाओं को छेड़खानी से लेकर तानाकशी तक क्या-क्या नही सहना पडता लेकिन महिलाओं मे पाये जाने वाले सहनशीलता के गुण के कारण अनेको घटनाये प्रकाश मे नही आ पाती है। इस कारण घर के अन्दर से लेकर खेत-खलिहानों, सडको, आफिसो आदि जगहो पर नारी का उत्पीडन हो रहा है हमारे राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियो को यह विचार करना होगा कि आखिर हमारी सभ्यता और संस्कृति क्या यही व्यवहार महिलाओ के प्रति दर्शाती है।     
महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार का जिम्मेदार शासन-प्रशासन के साथ हमारा समाज हम और हमारी आधुनिक शिक्षा प्रणाली है, आधुनिकता की दौड़ मे सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हुआ है। अभिभावको को अपने बच्चो के बारे मे जानने की फुरसत नही है, आज का अभिभावक यह जानना नही चाहता कि कांन्वेन्ट संस्कृति हमारे बच्चों पर हावी होकर क्या दुःप्रभाव डालेगी गर्ल फ्रेड तथा व्वाय फ्रेड की संस्कृति प्रचलन में आ गयी है संयुक्त परिवार टूट और विखर रहे है हम दो, हमारे दो की भावनायें पारिवारिक धारणा के रूप मे पनप रही। बुजुर्गो का सम्मान कम हो रहा है व्यक्तिगत स्वतंत्रता हावी है नशाखोरी, बार डिस्को संस्कृति, जुआ खोर बेरोजगारी आदि सामाजिक असमानताये भी इन घटनाओ के लिये जिम्मेदार है। अतः आधुनिक शिक्षा पद्वति में नारी सम्मान व नारी सशक्तीकरण से संबन्धित प्रसंग पाठ्क्रम जोडे़ जायें साथ ही बच्चों को ऐसे संस्कार दिये जाये कि वह नारी का सम्मान हर रूप मे करे, इस तरह की समाज विरोधी घटनायें रोकने के लिये समाज व सरकार दोनो को प्रयास करने होगे समाज को अपने नैतिक मूल्यों को ध्यान मे लाना होगा वहीं सरकार को स्त्री      अपराधों के प्रति कडे़ कानून बनाने के साथ मामला दर्ज होने पर त्वरित ढंग से प्रभावी कार्यवाही करते हुये जल्द से जल्द दोशियों को सजा दिलाने का काम करना चाहिये। तभी प्रसिद्ध कवि डाॅ सुनील जोगी की यह पंक्तिंयां बेटियो के बारे मे सही सिद्व होगीः-
बेटियाँ भगवान का सबसे बडा वरदान है। बाप की पगडी है। बेटियाँ घर की पुरानी खिडकियों को खोलती है, बेटियाँ घर मे हो तो घर की दीवारे बोलती है।