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भारत पाक युद्ध
January 13, 2020 • उदयराज कनौजिया

भारत पाक शत्रुता का जंम पाकिस्तान निर्माण से पूर्व ही मुस्लिम लीग की अलगाववादी, नफरतपरस्त, शत्रुतापूर्ण, हिंसक राजनीति के कारण हुआ, जो समय-समय पर किसी ना किसी बहाने से हिसंक रूप धारण कर लेती है। कभी बंटवारे, कभी कश्मीर, कभी पूर्वी पाकिस्तान मंे अपने ही नागरिकों के भीषण नरसंहार के बहाने से। 1962 मे भारत की चीन से पराजय और अमरीका से प्राप्त आधुनिक हथियारों के घमंड के बलबूते पर पाकिस्तान 1965 मे कश्मीर हड़पने की साजिश रचने मे लगा था। जनवरी 1965 मे पाक के सीमा सुरक्षा दल ने भारतीय नियंत्रण वाले क्षेत्र मे गश्त लगाना शुरू कर जिस पर कई बार तकरार हुयी 8 अप्रैल 1965 को पाक सेना ने आपरेशन डेर्जट फाक्स के तहत कच्छ की भारतीय चैकियों पर हमला कर दिया जिसका भारतीय फौज ने जवाब दिया जून 65 मे ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन ने समस्या सुलझाने के लिये दोनों देशो मे समझौता कराकर एक ट्रिब्नल बनाया भारतीय सेना को पीछे हटना पड़ा पाक ने गुजरात के कच्छ के रन की 3,500 वर्गमील 9,100 वर्ग कि मी जमीन पर अपना दावा पेश किया बाद मे पता चला कि ट्रिब्नल ने 1968 मे 350 वर्गमील 9,10 वर्ग किमी जमीन पाक को प्रदान की। कच्छ की सफलता से भारत सरकार व सेना को कमजोर समझते हुये पाक राष्ट्रपति अयूब खां ने आपरेशन जिब्राल्टर नामक बड़े हमले द्वारा कश्मीर हड़पने की योजना बनाई इस योजना के अनुसार उन्होने 5 अगस्त 65 को 30,000 हजार से 35,000 पाक सैनिको की 10 बटालियनों को कश्मीरी वेशभूषा मे कश्मीर पर कब्जा करने के लिये भेजा जिनका कश्मीरी पुलिस, जनता व भारतीय फौज ने सफाया करना शुरू कर दिया 6 से 22 अगस्त के मध्य भयानक जंग हुयी। शुरू मे पाक को खेमकरन, ऊरी, पूँछ, टिटवाल मे कुछ सफलता मिली लेकिन 15 अगस्त को भारतीय फौज उड़ी से पाक क्षेत्र मे घुसी और हाजीपीर दर्रें के उपर की संखढाल, बेदौर चैकी और टिटवाल व करगिल क्षेत्र की पाक चैकियों पर कब्जा कर पाक घूसपैठियों के आने के सारे रास्ते बंद कर दिये पाक सेना की भीषण संहार से बौखला कर 1 सितम्बर 1965 को पाकिस्तान ने कश्मीर के छम्ब क्षेत्र व अखनूर पर भारी सेना, तोपो, पैटन व शर्मन, अमरीकी टैंको और एयरफोर्स से हमला कर दिया जिसे उसने आपरेशन ग्रैन्ड सलाम कहा 5 सिंतम्बर तक तो भारत ने रक्षात्मक लड़ाई लड़कर पाक हमलो को नाकाम किया फिर भी पाक सेना के भारी दवाब के कारण 5 सिंतम्बर तक पाक सेना 10-12 मील तक अंदर घुस आई छम्ब क्षेत्र से पाक सेना के दवाब को तोड़ने के लिये 6 सितम्बर को भारतीय फौज ने पाक क्षेत्र के लाहौर, डेरा बाबा नानक व कसूर मे व 7-8 सितम्बर को स्यालकोट घुस कर जवाबी हमला किया भारतीय फौजो ने लाहौर, स्यालकोट के बाहरी क्षेत्र व रावी नदी के पार तक कब्जा कर लिया 3 सितम्बर को स्क्वैड्रन लीडर ट्रेवल कीलर ने अजेय माने वाले अमरीकी सैबर जेट को मार गिराया 6 सितम्बर को इन्डियन एयरफोर्स ने पाक के सरगोधा एयरबेस पर हमला किया जिसमे लगे अत्याधुनिक रडार व जैमर सिस्टमके कारण इन्डियन एयरफोर्स के दर्जनों फाईटर प्लेन नष्ट हो चुके थे यह रडार 200 मील दूर से ही भारतीय विमानों का पता लगा लेता था और उनके हमला करने से पूर्व ही पाक फाइटर प्लेन उन्हें घेर कर मार गिराते थे इस हमले मे सरगोधा का अत्याधुनिक रडार व जैमर सिस्टम हमले पूरी तौर पर नष्ट हो गया 9 व 10 सितम्बर को खेमकरण के असल उत्तर या असल अवतार गांव मे दोनो सेनाओं के बीच विष्व इतिहास का सबसे भीषण टैंक युद्ध हुआ जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा टैंक युद्ध था भारतीय आर्मर रेजीमेंट ने हार्स शू शेप मे अपने टेंकों की मोर्चाबंदी की और पाक टेंकों को आगे आने दिया फिर तीन ओर से घेर कर उन्हें बुरी तरह नष्ट कर दिया जिसमे पाकिस्तान के 97 पैटन व शर्मन टैंक या तो नष्ट कर दिये गये या जब्त कर लिये गये भारत के 32 टैंक नष्ट हुये 8 से 10 सितम्बर के असल अवतार के टैंक युद्ध मे 4 ग्रेनेडियर के क्वाटर मास्टर हवलदार वीर अब्दुल हमीद ने तीन टैंक नष्ट किए 22 सितम्बर 1965 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने दोनों देशो से बिना शर्त युद्ध विराम करने को कहा जिसे दोनांे देशों ने मान लिया युद्ध थम गया 25 फरवरी 1966 को रूस के ताशकंद शहर मे पाक राष्ट्रपति अयुब खां और भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने समझौते पर दस्तखत किये जिसके अनुसार दोनों देश अगस्त 1965 के पूर्व की सामरिक स्थिति मे पहुँच गये। भारत सरकार ने वीर अब्दुल हमीद, कर्नल तारापोर तथा टेªवल कीलर को सर्वोच्च वीरता का एवार्ड परमवीर चक्र प्रदान किया। 
युद्ध का जमांक-1 सितम्बर 1965। प्रातः-4.00 बजे। छम्ब व अखनूर (जम्मू)
कर्क लग्न-18 अंश पर, लग्न मे बुध 29 अंश, सिंह मे सूर्य 15 अंश, कन्या मे नीच का शुक्र-21 अंश, तुला मे मंगल-14 अंश, चन्द्र-23 अंश, वृश्चिक मे केतु, कंुभ मे वक्री शनि-21 अंश, वृष मे राहू, मिथुन मे गुरू-4 अंश।
नवांश लग्न धनु कुंभ मे मंगल, मीन मे बुध, मेष मे चन्द्र शनि योग, वृष मे राहू, कर्क मे शुक्र, सिंह मे सूर्य, वृश्चिक मे केतु व गुरू।
 चूँकि हमला पाकिस्तान ने किया था अतः उपरोक्त जमांक मे लग्नेश चन्द्र पाकिस्तान और सप्तमेश शनि भारत का प्रतीक है। चन्द्र और शनि दोनों प्राकृतिक शत्रु हैं। अतः भारत पाक में पुरानी शत्रुता होगी चन्द्र शत्रु राशि तुला मे है। अतः पाक की युद्ध मे स्थिति कमजोर होगी तथा सप्तमेश शनि वक्री होकर कुंभ में, जो भारत को मजबूत पोजीशन देगा वक्री होने के कारण प्रारंभ मे भारत को कुछ पराजय का सामना करना पड़ेगा लेकिन वक्री होकर वह मकर का फल देगा जो भी शनि की स्वराशि है। दोनो राशियों मे स्वग्रही शनि प्रबल है। जो शश योग बना रहा है। अतः भारत की विजय निश्चित थी चन्द्र शत्रु राशि तुला मे है। अतः पाक की युद्ध मे स्थिति कमजोर होगी तथा सप्तमेश शनि वक्री होकर कुंभ मे स्वग्रही है। जो भारत को मजबूत पोजीशन देगा।