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भारतीय संस्कृति ही कर्म प्रधान संस्कृति है
December 23, 2019 • पंकज भारती - ब्यूरो चीफ झांसी

झांसी। श्री कुंजबिहारी संगीत वेद वेदांत आश्रम में पत्रकार वार्ता एवं सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए बुन्देलखण्ड धर्माचार्य महंत राधा मोहन दास महाराज ने बताया कि प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान संस्कृति है। सर्वांगीणता, विशालता प्रेम और सहिष्णुत की दृष्टि से अन्य देशों की संस्कृतियों की अपेक्षा भारतीय संस्कृति अग्रणी स्थान रखती है। भारत की संस्कृति बहुआयामी है जिसमें भारत का महान इतिहास विलक्षण भूगोल और सिंधुघाटी की सभ्यता के दौरान बनी, आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई। यह अतिश्योक्ति नहीं होगा कि भारतीय संस्कृति ही भारत के प्राण हैं।
बुन्देलखण्ड धर्माचार्य ने कहा कि भारत की संस्कृति रीति-रिवाज, भाषायें, प्रथायें और परम्परायें एक-दूसरे से परस्पर सम्बन्धों में महान विविधताओं को एक अद्वितीय उदाहरण देती है। भारत की कई धार्मिक प्रणालियों जैसे कि हिन्दू, जैन, बौघ, सिख धर्म जैसे धर्मों का जनक हैं। इस मिश्रण से भारत में उत्पन्न हुये विभिन्न धर्म और परम्पराओं ने विश्व के अलग-अलग हिस्सों को भी बहुत प्रमाणित किया है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की चकाचैंध में हुये परिवर्तिन से भारतीय संस्कृति भी अछूती नहीं है। आज भारतीय युवाओं में पश्चात्य संस्कृति का प्रभाव सिर पर चढ़कर बोल रहा हैं परिणाम स्वरूप घर, गली, मोहल्ला, प्रदेश और देश में बिखरते परिवार व उनमें कटुता का भाव बढ़ता देखा जा सकता है। विश्व में भारतीय संस्कृति की धीमी होती चमक को बरकरार रखने के उद्देश्य से श्री कुंज बिहारी संगीत वेद वेदांत आश्रम की स्थापना आज से एक पूर्व सफला एकादशी के दिन की गई थी। ब्रह्मलीन महंत गुरूदेव भगवान बिहारीदास महाराज आजीवन भारतीय संस्कृति को बढ़ाव देते रहे है। मंदिर परिसर में प्रत्येक मंगलवार की सायं सांस्कृति संध्या का आयोजन वर्षों से होता चला आ रहा है। उसी पद्घति पर चलकर स्थापित कुंजबिहारी संगीत वेद वेदांत आश्रम में बालक, युवा व प्रौढ़ प्रतिदिन शास्त्रीय संगीत की विधाओं की जानकारी से न सिर्फ अवगत होते हैं बल्कि नित्य अभ्यास कर सीखते है और उसका अनुसरण भी करते हैं।
श्री गुरूदेव भगवान की स्मृति एवं संगीत वेद वेदांत आश्रम के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्रीधाम वृन्दावन के कलाकारों द्वारा भगवान की दिव्य रासलीला एवं रामलीला के माध्यम से भगवान के दिव्य चरित्रों का बहुत ही सुंदर चित्रण एवं मंचन किया जा रहा है। इस मौके पर महाराज श्री ने नगर के वरिष्ठ पत्रकारों व छायाकारों को सम्मानित कर यशस्वी लेखनी के माध्यम से राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान की अपेक्षा करते हुये सभी को सुभाशीष दिया। कार्यक्रम में श्रीधाम वृन्दावन की आदर्श रास मण्डल के कलाकार, रामलील व्यास राधाबल्लभ वशिष्ठ, रासलीला व्यास व्यास देवेन्द्र वशिष्ठ, मनमोहनदास, बालकदास एवं परमानंद दास महाराज सहित कई विद्वान मौजूद रहे।