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देवर तोड़े पापड़ी भौजाई बीने रे!
January 25, 2020 • शिव शंकर त्रिवेदी

अजमेर ब्यावर सड़क मार्ग पर केसरपुरा गांव के निवासी अजय सिंह और उनकी पत्नी हांसीबाई को 24 जुलाई 1988 को रविवार नागपंचमी के दिन एक पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम बलराम सिंह उर्फ पप्पू रखा गया जंम से ही उसके बांये कान मे अजीब सा निषान था बाये पैर की एक उंगली मुड़ी हुयी थी सीने पर दागने जैसा निशान था पेट और पैरों पर कुछ निशान थे जिन्हें वह पूर्व जंम मे छर्रे लगने के निषान बताता था, वह बचपन से ही अपने पूर्व जंम की बाते बताता था वह नकली ट्रक बनाकर खेलता और कहता कि तुमने मेरे ट्रक को टक्कर मारी सरिया मेरे कान मे घुस गई और मैं मर गया था साथ ही बताता कि मेरे गांव मे बड़े-बड़े पहाड़ है बड़े-बड़े खेत है, दो कुयें है। एक में पंप लगा है। एक काला सांप भी रहता है। एक दिन अजय सिंह द्वारा विस्तार से पूछने पर बलराम ने बताया कि मेरा नाम मदन सिंह रावत है। मेरे गांव का नाम कोटाज है। मेरे पिता हाल सिंह रावत है, मां मर गई है, मेरी पत्नी और दो लड़कियां है। पत्नी का नाम सीता बच्चियों के नाम बीरी और सोहनी उर्फ सोनी है। मंै रोज की तरह ट्रक पर बैठकर गांव वापस आ रहा था कि ब्यावर की तरफ से आ रहे गुजरात के मूर्तियो से भरे ट्रक ने डबल फाटक के पास टक्कर मार दी वह ट्रक हमारे ट्रक के उपर चढ़ गया था, टक्कर लगते ही ड्राइवर पांचू सिंह वही मर गया खिड़की का सरिया गले मे घुस कर कनपटी के पार होते हुये कान से निकल गया था, मेरे कान मे सरिया घुस गया मैं बेहाश हो गया बाद मे मेरी मृत्यु हो गई तब मैं 22 साल का था मेरी आत्मा मरने के बाद भटक हुये इधर से गुजर रही थी मैने  अजय सिंह के यहां टेप में मारवाड़ी गाना बजते हुये सुना मुझे यह गाना बहुत पसंद था तब मैं अपनी इस जंम की मां हांसी देवी के पेट मे आ गया वह गाना था, देवर तोड़े पापड़ी भौजाई बीने रे। बलराम की बात सुन कर अजय सिंह को पत्नी के गर्भ काल यह गाना सुनने की बात याद आ गई वे अचंभित रह गये बालक जो भी भविष्यवाणी करता था वह सच हो जाती थी केसरपुरा से छह किमी दूर भील और रावत बाहुल्य कोटाज गांव है। इसी गंाव मे हालू सिंह रावत अपनी पत्नी भंवरी देवी, एक पुत्र मदन सिंह और दो पुत्रियों नौसर और मैमा के साथ रहते थे पत्नी और छोटी बेटी मैमा का निधन हो चुका था हालु सिंह ने मदन का विवाह नरवर गांव की सीता देवी के साथ कर दिया था और वह दो पुत्रियों का पिता भी बन गया था वह गांव के ट्रक ड्राईवर पांचू सिंह के साथ ट्रक पर काम करने लगा सब कुछ मजे से चल रहा था कि 18 फरवरी 1990 की रात करीब 10 बजे हालु सिंह को मदन सिंह के 1990 की रात करीब 10 बजे हालु सिंह को मदन सिंह के एक्सीडेंट की खबर लगी वह भागा-भागा अजमेर जिले के जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय पहुंचा आधी रात के बाद मदन सिंह ने दम तोड़ दिया अपने पुत्र की जिद पर अजय सिंह बलराम को कोटाज गांव लाये बच्चा सीधा हालु सिंह के घर पहुच गया उसने हालु सिंह अपनी पत्नी दोनांे बच्चियों को पहचान लिया हालु सिंह ने इस बच्चे के बारे मे नाहरपुरा निवासी शंकर सिंह से सुना बच्चे ने शंकर सिंह को पहचान लिया था लेकिन हालु को षंकर की बातों पर यकीन नही हुआ हालु सिंह को कुदरत के इस अजूबे को देख कर हतप्रभ रह गये। उन्होने पूछा तू मेरा बेटा कैसे हो सकता है। बच्चे ने कहा कि यह देखो पैर के उंगली को निशान जो कुयें पर काम करते हुये लगा था यह कान का निषान कान में सरिया घुसने का है। ये देखो सीने के दाहिने और दागने का निशान जो आपने मेरे बीमार होने पर लगवाया था आपको याद है। कि बचपन में मैने टोटे छोड़े थे उसके छर्रे मेरे दोनों पैरो मे घुस गये थे यह देखकर हालु व अंय परिजन चैंक गये उन्हें सौ फीसदी यकीन हो गया यह बाालक ही उनका मदन सिंह है। वे उसे बेतहाशा चूमते हुये खुशी से रोने लगे। हालु सिंह रावत ने बताया था कि मदन सिंह का जंम 1968 की कार्तिक माह प्रथम पक्ष (शुक्ल) की दशमी को प्रातः साढे हुआ था 
मृत्यु का जमांक-19 फरवरी 1989। रात्रि-2.00 बजे। अजमेर। धनु लग्न मे मंगल 19 अंष, षनि 27 अंश, शुक्र 28 अंश, मकर मे बुध 13 अंश, राहू 22 अंश, कुंभ मे सूर्य 6 अंश, 7 वें भाव मे मिथुन का गुरू 7 अंश, वृश्चिक का चन्द्र, अष्ठमी तिथी। 
बलराम कां जंम-23 जुलाई 1989। नाग पंचमी, साढे दस बजे। अजमेर। कन्या लग्न चतुर्थ मे धनु का शनि, कुंभ मे चन्द्र राहू, मिथुन मे गुरू 4 अंष, कर्क मे सूर्य 5 अंश, मंगल  28 अंश, बुध 8 अंश, सिंह मे षुक्र 3 अंश। चतुर्थेश शुक्र मंगल व राहू दृष्ट वाहन दुर्घटना योेग, चन्द्रमा से 8 वें भाव मे अष्टमेश शनि वक्री होकर कुंभ से चन्द्रमा से चतुर्थेश शुक्र को देखे होकर वाहन दुर्घटना योेग।