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एचआईवी का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है
December 3, 2019 • राकेश ललित वर्मा

एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम है, यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होती है, एड्स होने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। और शरीर आसानी से कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। एड्स एच.आई.वी. पॉजीटिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को, असुरक्षित यौन संबंधों से और संक्रमित रक्त या संक्रमित सुई के प्रयोग से होता है, इससे बचने के लिए जरूर सावधानियां अपनानी चाहिए। कई-कई हफ्तों तक लगातार बुखार रहना, हफ्तों खांसी आना, वजन घटना, मुंह में घाव होना, भूख न लगना, बार-बार दस्त लगना, गले में सूजन, त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकत्ते होना, सोते वक्‍त पसीना आना। एचआईवी संक्रमित व्‍यक्ति को जब तक एड्स के लक्षण नहीं दिखते तब तक इसका पता चलना मुश्किल है। एचआईवी पाजिटिव होने पर 6 से 10 साल के अंदर कभी भी एड्स हो सकता है। स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट के द्वारा एड्स का निदान हो जाता है।
एड्स एक लाइलाज बीमारी है, आंकड़ों के अनुसार युवाओं में एचआईवी का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, महिलाओं में संक्रमण का दर तेजी से बढ़ रहा है, असुरक्षित यौन संबंधों से बचें, पुरानी सूई का प्रयोग न करें, संक्रमित खून का प्रयोग न करें। एड्स के बारे में जानकारी ही इससे बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है। एचआईवी और एड्स को लेकर ऐसे ही समाज में बहुत सारे भ्रम फैले हुए हैं। इनका नाम सुनने के साथ ही लोग इस बीमारी से ग्रस्‍त इंसान के साथ बैठना, खाना-पीना और रहना बंद कर देते हैं। ऐसे में इन दोनों के बारे में और इन दोनों के बीच के अंतर के बारे में लोगों को जानना बहुत जरूरी है। यहां इन दोनों के बीच क्‍या अंतर है, इसके बारे में हम आपको बता रहे हैं।
एचआईवी, मतलब ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस, जो कि एक वायरस है। एड्स, पूरा नाम एक्वायर्ड इम्‍यूनो-डिफिशिएंसी सिंड्रोम, एक मेडिकल सिंड्रोम है। एचआईवी वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं पर हमला करता है एक व्यक्ति अगर एचआईवी संक्रमित है तो जरूरी नहीं कि उसे एड्स हो। एचआईवी से संक्रमित अधिकतर व्यक्ति प्रोपर मेडिकेशन टर्म्स फॉलो कर सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं की सभी एचआईवी संक्रमित लोगों को एड्स नहीं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एड्स हो सकता है लेकिन हर एड्स से पीड़ित लोग जरूरी नहीं कि एचआईवी से संक्रमित हों। बिल्कुल नहीं, दो एड्स पीडित आराम से बिना प्रोटेक्‍शन के सेक्‍स नहीं कर सकते हैं, ये उनके लिए खतरनाक हो सकता है, एड्स भी कई तरह के होते हैं, साथ ही कोई एड्स से पीड़ित हो सकता है और कोई एचआईवी संक्रमित एड्स से पीड़ित हो सकता है। वहीं किसी एड्स पीडि‍त को सीडी 4 का कांउट ड्रॉप 200 होता है और किसी को संक्रमण या कैंसर होता है। ऐसे में प्रोटेक्शन के साथ ही सेक्स करें।
एचआईवी एक इंसान से दूसरे इंसान में ट्रांसमिट हो सकता है लेकिन एड्स नहीं। जबकि अधिकतर लोग बोलते हैं, मुझे एड्स मत दो। इंटरकोर्स, संक्रमित खून और इंजेक्शन से एचआईवी ट्रांसमिट होता है ना कि एड्स। सिम्पल ब्लड टस्ट और स्लाइवा टेस्ट से एचआईवी संक्रमण का पता किया जा सकता है। साथ ही ये टेस्ट कुछ हफ्तों के बाद ही पता लग पाता है। इसे दूसरी तरह से भी पता किया जा सकता है। बाडी में मौजूद एंटीजन्स का भी टेस्ट कर पता किया जा सकता है।
एचआईवी को कंट्रोल किया जा सकता है, इसमें इंसान के अधिक जीने के चांसेस होते हैं, लेकिन एड्स में ऐसा नहीं है, एड्स में इम्युन सिस्टम डैमेज होता है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता।