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एक चमकता सितारा ओमपुरी
November 13, 2019 • मनोज शर्मा


 ओमपुरी की माँ के अनुसार ओमपुरी का जंम 1950 में दशहरे के दो दिन बाद सुबह पौने छह बजे अंबाला मे हुआ था इस तरह उनका जंम संवत 2007 आश्विन शुक्ल त्रयोदशी तदनुसार 23 अक्टूबर 1950 में कन्या लग्न में हुआ था। (अमर उजाला, 7 जनवरी 2017) उनकी मृत्यु पौष शुक्ल नवमी या 7 जनवरी 2017 की रात रहस्यमय ढंग से हुयी पुलिस के अनुसार मौत का कारण हार्ट अटैक था लेकिन उनके सर में डेढ इंच गहरा घाव था शव किचिन मे मिला और शव पूरा नंगा था, शव के होंठ व कुछ अंग नीले थे पुलिस ने मृत्यु का समय रात 10 से 11 बजे व पोस्टमार्टम रात ढाई बजे का बताया गया। एक दिन पहले रात में उनका अपनी द्वितीय पत्नी नंदिता से उसके घर पर झगड़ा हुआ था देर रात आकर उन्होने शराब पी और सुबह ड्राईवर द्वारा कई बार बेल बजाने पर भी जब दरवाजा नही खुला तो उसने पुिलस बुलाई पुलिस के घर में घुसने पर वो मृत पाये गये उनका जंमाक इस प्रकार है। 
कन्या लग्न- लग्न में शनि 4 अंश, बुध 28 अंश, शुक्र 29 अंश, केतु-4-57 अंश, तुला में सूर्य-5 अंश, वृश्चिक मे मंगल-26 अंश, कुंभ में गुरू-4 अंश व चन्द्र-21 अंश, मीन में राहू-4.57 अंश उ0 भाद्रपद-प्रथम चरण। 
फलादेश- लग्न में शुक्र, केतु बुध योग ने उन्हें गोरा रंग दिया लेकिन लग्न में बुध केतु योग तथा द्वितीय भाव में अग्निकारक ग्रह मंगल ने उनके चेहरे को चेचक व कई घावों से युक्त और खुरदुरी त्वचा वाला बनाया लग्न में नीच का शुक्र ने तथा शनि केतु योग के लंगोटी योग ने बचपन में उन्हें अत्यंत गरीब व संघर्षपूर्ण जीवन दिया 7 वर्ष की आयु कन्या के गुरू गोचर मे उन्होने चाय की दुकान में काम किया तथा 1973 में कन्या से त्रिकोण में मकर के गुरू गोचर में गिरीश कर्नाड ने उन्हें पहली बार बाल फिल्म में काम दिया। धन कारक शुक्र नीच का होकर उच्च के बुध से युत है, यह नीच भंग राजयोग बना रहा है, जिसके कारण उन्हें जीवन के पूर्वाध में संघर्ष व गरीबी तथा उतारार्ध में भारी धन लाभ और सफलता मिली। भृगु नाड़ी के अनुसार द्विस्वभाव के शुक्र ने उन्हें दो पत्नियां दीं। पहला विवाह उन्होंने अभिनेता अन्नू कपूर की बहन सीमा कपूर से किया जिससे तलाक हुआ दूसरा विवाह अपने से 16 साल छोटी पत्रकार नंदिता से हुआ जिससे सन 2000 से तलाक का मुकदमा चल रहा था गुरू से त्रिकोण में सूर्य ने उन्हें प्रथम संतान पुत्र दिया गुरू वक्री होने के कारण पुत्र से संबध मधुर नही थे नीच के शुक्र, शुक्र से द्वितीय भाव में शुक्र का शत्रु सूर्य स्वयं नीच हो कर बैठा है। तथा शुक्र दो पापी और शत्रु ग्रहों सूर्य व केतु के मध्य पापकर्तरी में तथा शुक्र केतु युति होने के कारण उन्हें दोनो पत्नियों से वैवाहिक सुख नही मिला सप्तम भाव पर शनि शुक्र की दृश्टि ने विवाह में विलंब दिया भगु नाड़ी के अनुसार बुध से त्रिकोण मे केतु प्रेम संबध देता है। यदि इस योग पर गुरू या शुक्र प्रभाव हो तो प्रेम संबध विवाह मंे बदल जाता है। ऐसा ही हुआ तथा सप्तम भाव पर शनि की दृष्टि ने उन्हे अति छोटी उम्र की पत्नी दी कंुभ में गुरू व चन्द्र युति ने उन्हें जंमस्थान से दूर स्थान पर सफलता दी। तथा गुरू के आगे कई भाव खाली ने उन्हें जीवन में लंबा भयानक संघर्ष दिया उनकी हत्या किये जाने की आश्ंाका जताई जा रही है। जंमाक मे हत्या के स्पष्ठ योग मिल रहे हैं। स्व. माणिक जैन की थ्योरी के अनुसार यदि राहू केतू के राशि स्वामी यदि राहू या केतु के साथ युत हों तो जातक हत्या का शिकार होता है। कुण्डली मे केतु कन्या मे गया है। जिसका स्वामी ग्रह बुध केतु के साथ है। अष्ठमेश मंगल रहस्यमय केतु की राशि वृश्चिक मे गया है जो रहस्यमय मृत्यु देता है। है। अतः मौत रहस्यमय हुयी। अष्ठमेश मंगल स्थिर रशि में है। जो घर के अंदर ही मृत्यु देता है। मृत्यृ घर मे हुयी उपपद धनु मे है उससे त्रिकोण मे सूर्य के गोचर मृत्यु देता है। मृत्यु धनु के सूर्य गोचर मे हुयी पंचम भाव ग्रह या उसे राशि दृष्टि से देखने वाले ग्रह या पंचमेश से मृत्यु तिथी देखते है। पंचम भाव खाली है। उस पर तुला के सूर्य की राशि दृष्टि है। सूर्य प्रतिपदा व नवमी दो तिथियों का स्वामी है। अतः मृत्यु नवमी तिथी को हुयी।