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गौ सेवा द्वारा ग्रह दोष निवारण
January 16, 2020 • संकलित-डी.एस. परिहार

गौ सेवा प्राचीन धार्मिक परम्परा और और पुण्य प्राप्ति और ग्रह दोष निवारण का सर्वोत्तम उपाय एवं सरल उपाय है।
 ज्योतिष मे गाय को शुक्र के अन्र्तगत माना गया है। और उसे माता का दर्जा प्राप्त है। जो लक्ष्मी के समान है। गौ सेवा निम्न ग्रह दोषों का निवारण करती है।
1. जमंाक मे शुक्र नीच या त्रिक भाव मे हो कलह व वैवाहिक सुख का नाश होता है। अतः प्रातःकाल भोजन से एक रोटी गाय को देने से शुक्र का नीचत्व और उसकी निर्बलता दूर हो जाती है।
2. सूर्य, चन्द्र, मंगल या शुक्र की राहू से युति होने पर पितृ दोष होता है। सूर्य यदि शनि, राहू या केतु से युत या दृष्ट हो तथा मंगल की राहू या केतु से युति हो तो पितृ दोष होता है गाय को नित्य या अमावस्या को रोटी, गुड़ व चारा खिलाने से पितृ दोष नष्ट हो जाता है।
3. जमांक मे सूर्य नीच का हो या त्रिक या शत्रु राशिगगत हो या केतु से युत हो या केतु कष्ट दे रहा हो तो गाय की  नित्य या अष्ठमी तिथी को पूजन करने से उपरोक्त दोष का निवारण हो जाता है।
4. भयानक स्वप्न आते हांे तो सोने से पूर्व गौ का नाम लेकर सोने से दुःस्वपनों से मुक्ति मिलती है। 
5..हस्त रेखा मे आयु रेखा टूटी हो तो गौ पूजन करके गौघृत का सेवन करें।
6. गौ का कुबड़ बृहस्पति है यदि जमांक मे गुरू नीच या त्रिक मे या शत्रु राशिगत हो गौ के इस भाग के दर्शन करके प्रणाम करें और रोटी पर गुड़ व चने की दाल रख कर गाय को खाने को दें।
7. गौ के नेत्रों मे सूर्य और चन्द्रमा होता है जमांक मे सूर्य या चन्द्रमा निर्बल हो तो गौ नेत्रो ंके दर्शन करके प्रणाम करें।
8. पुरूष जातक के जमांक मे यदि सूर्य शुक्र युति पर अंय पाप प्रभाव हो तो पुरूष वीर्य मे दोष और शुक्राणु दोष होता है। कीटों की संख्या कम होती है। गौ सेवा और उस गाय का दूघ पीने से यह दोष समाप्त हो जाता है। क्योंकि गाय के दूध मे सोना होता है जो वीर्य शोधन करता है।
8. घर मे गौ होने से वास्तु दोष का निवारण होता है।
प. श्री कृष्णजी शर्मा ज्योतिष तत्वांक, कल्याण पत्रिका, गीताप्रेस, गोरखपुर