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गोल्डन रूल्स आफ प्रैडिक्शन
December 5, 2019 • प. कृष्ण कुमार तिवारी

ज्योतिष ग्रन्थों मे भविष्यवाणी करने के अनेक ऐसै सरल और सटीक नियम पाये जाते है। जो बिना ग्रह योंगो, विशोंत्तरी दशा, वर्ग चक्रों तथा अष्ठकवर्ग के प्रयोग किये जाते हैं। प्रस्तुत लेख मे कुछ सरल और दुर्लभ सूत्रों का वर्णन किया जा रहा है। जो अप्राप्य और अप्रकाशित हस्तलिखित ज्योतिष पाण्डुलिपियों से लिये गये हैं। जिन्हंे प्राचीन सफल व प्रसिद्ध ज्योतिषी गुप्त रूप से प्रयोग करते थे।
1. गोचर हेतु चन्द्रमा से गोचर की अपेक्षा लग्न से ग्रहों का गोचर अधिक सही और प्रभावशाली परिणाम देता है।
2. जीवन की महत्वपूर्ण धटनाओं को जानने मे मंद गति के ग्रह , गुरू, शनि, राहू व केतु का गोचर अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
3. लग्न से षष्ठमेश, अष्ठमेश व द्वादेश से शनि का गोचर दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें देता है।
4. लग्न से लग्नेश, पंचमेश या नवमेश से शनि का गोचर जीवन मे भारी उत्थान और प्रगति देता है।
5. शनि का चतुर्थेश से गोचर अवास परिवर्तन या दूर स्थान की यात्रा का योग या जातक के जाॅब के स्थान  का परिवर्तन या स्थानान्तरण या आॅफिस का स्थानान्तरण देता है।
5. सप्तमेश से शनि का गोचर अविवाहित लोंगांे का विवाह कराता है और विवाहित जोड़ों मे भारी सुख की वृद्धि करता है।
6. तृतीयेश से शनि का गोचर भाई बहनों को लाभ और नवमेश से शनि का गोचर पिता को भारी लाभ, सौभाग्य देता है और जातक को उच्च शिक्षा का योग या लंबी यात्रा कराता है।
7. सूर्य, चन्द्र च कारकांश लग्न से 6. 8. 12 भाव मे शनि का गोचर जातक को दुर्भाग्य व अनेक कष्ट देता है। इस गोचर मे जब शनि वक्री हो जाता है तो उस समय तक के लिये जातक को कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इनमे 8 वे भाव का गोचर सर्वाघिक दुःखदायी होता है।
8. यदि शनि किसी ऐसै भाव से गोचर करे जहां तीन ग्रह बैठे हो उस समय जीवन की अति महत्वपूर्ण घटना घटती है।
9. गुरू जब लग्न से 6, 8, 12 भाव से गोचर करता है। तो जातक के पद, अधिकार, शक्ति, लाभ व सुखों मे पतन हो जाता है किन्तु गुरू जब लग्न से 6, 8, 12 भाव के स्वामियों से गोचर करता है तो जातक के दुर्भाग्य व कष्टों का अंत हो जाता है।
10. राहू किसी भाव या भावेश से गोचर करता है तो जातक को उस भाव से संबधित मामलो व संबधियांे कष्टों का सामना करता पड़ता है। राहू चाहे केन्द्र या त्रिकोण भाव या भावेशों से गोचर करे जो राजयोगकारी होते है। फिर भी राहू दुर्भाग्य ही देगा।
11. उपरोक्त भावों या भावेशों से केतु का गोचर उस भाव की वस्तुओं और कारकों मे अचानक परिवर्तन देगा
12. यदि शनि किसी भावेश से 1. 5. 9 भाव मे गोचर करे या उन्हें देखे तो उस भाव के कारको से संबधित शुभ घटना घटेगी।
13. जब शनि के उपर से राहू या राहू के उपर से शनि निकल रहा हो उस समय जातक पर भारी कष्ट आयेंगें।
14. जब गुरू के उपर से केतु या केतु के उपर से गुरू निकल रहा हो उस समय जातक धार्मिक कर्म, तीर्थ यात्रा, यज्ञ, तप, दान, गुरू या सिद्धि प्राप्ति करेगा।
15. शनि का गुरू से गोचर प्रमांेशन व उत्थान व सौभाग्य देताहै। 
16. शनि का केतु से गोचर जीवन मे अशुभ घटनायें देता है। केतु से शनि का गोचर अघ्यात्मिक उन्नति दे।
17. गुरू या शनि 3, 6, 8, 12 भावांे से गोचर करें तो अशुभ फल दंेगे। 
18. गुरू या शनि लग्न से 1, 5, 9 भावों से निकलंे या ेदेखे तो भाग्योदय व सौभाग्य आयेगा।
19. उपरोक्त नियम सभी वर्ग चक्रों पर भी लागू होते है।
20. जंमस्थ गुरू या शनि से गुरू या शनि का गोचर जीवन मे प्रमोशन व सौभाग्य देता है।
21. जंमस्थ राहू से गुरू का गोचर अशुभ घटनायें घटें व खानदान मे किसी की मृत्यु होगी राहू से शनि का गोचर कष्ट मिले राहू से राहू का गोचर कष्ट मिले
22. जंमस्थ गुरू से राहू का गोचर गृह त्याग का कष्ट होगा।
23. जंमस्थ गुरू से गुरू का गोचर कलह शान्ति व सफलता प्राप्त होगी।
24. राहू केतु एक दूसरे के उपर से निकले कष्ट मिले। राहू से राहू या केतु से केतु दुर्भाग्य मिले। केतु से गुरू का गोचर अघ्यात्मिक उन्नति दे।
25. मंगल से राहू का गोचर और राहू से मंगल का गोचर दुर्घटना या आपरेशन का योग देगा।
26. गुरू का बुध से गोचर शिक्षा या व्यापार से लाभ  देगा। 
27. मंगल से गुरू का गोचर भाई को लाभ देेगा और  संपत्ति का लाभ या उससे लाभ होगा।