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ग्रह मेलापक का अधूरा पन्ना
November 30, 2019 • डाॅ राजेन्द्र सिंह गौतम

विवाह के समय ग्रह मेलापक, गुण मिलान, कुण्डली मिलान भारतीय परम्परा व मान्यता रही है। आज इस काम मे पत्रा, कम्पयूटर आदि प्रयोग में लाये जा रहे है किन्तु आज भी अधिकांश लोग नाड़ी, गण, भृकुट, तारा, ग्रह मैत्री योनि के चक्कर मे व्यर्थ भटक रहे हैं और भावी जीवन के और कई महत्वपूर्ण पहलुओं व समस्याओं को भूल जाते हैं। जो पति पत्नी के रंग, रूप, शारीरिक बनावट, चरित्र, स्वभाव आदि से संबधित होती है।
कन्या की कुण्डली द्वारा पत्नी का ज्ञान:-
1. यदि कन्या के जंमाक मे लग्न में चन्द्रमा व बुध हो तो वह बुद्धिमान व दयालु स्वभाव की व ललित कलाओं मे निपुण होती है।
2. यदि लग्न मे सूर्य हो या सूर्य की दृष्टि हो तो कन्या क्रूर व चिड़चिड़ी हो।
3. यदि जमंाक लग्न में शुक्र बुध युति हो या लग्नेश शुक्र, बुध हो तो वह बुद्धिमान होगी।
4. यदि लग्न में चन्द्रमा व शुक्र हो या उसकी दृष्टि हो या उनमे से एक ग्रह लग्न मे हो दूसरे की दृष्टि हो तो जातिका सुन्दर, गरिमामय व अहंकारी होगी। लग्न मे अकेला गुरू भी अहंकारी बनाये।
5. लग्न मे बुध शुक्र, चन्द्र हो तो या इनकी या क्षय चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातिका उग्र स्वभाव की अति स्थूल होगी बाल घंुघराले होंगें तथा अशुभ फल प्राप्त हो। यदि लग्न व चन्द्रमा पर शुभ ग्रह का प्रभाव हो तो  चरित्रवान, उत्तम स्वभाव हो। यदि इन पर पाप प्रभाव हो तो गुणहीन हो। 
6. यदि लग्न व चन्द्रमा सम राशि मे हो तो कन्या मे स्त्रियोचित गुण, मीठी वाणी व आकृति हो यदि विषम राशि मे हो तो कन्या मे पुरूषोचित गुण, मर्दानी वाणी व मर्दाना आकृति हो इनमे से एक ग्रह सम राशि मे व दूसरा विषम राशि मे हो तो मघ्यम आवाज, मिश्रित आकृति व गुण होंगे जिस स्त्री की लग्न विषम राशि की हो चन्द्रमा बुध शुक्र निर्बल हो व शनि सम राशि मे हांे वह पुरूष के समान स्वभाव व शरीर वाली होती है।
7. लग्न पर अकेला शुक्र हो और उस पर चन्द्रमा की दृष्टि हो तो गोल सिर सुन्दर चेहरा, घने को बाल हों। यदि लग्न मे शत्रु राशि मे शनि व राहू हो तो जातिका दुष्ट या चरित्रहीन हो, बदनाम व कुलटा हो।
7 लग्न, चन्द्र शुक्र या बुध से द्वितीय भाव मे शुभ ग्रह गुरू, चन्द्र, बुध शुक्र हो या इनकी दृष्टि हो तो जातिका विनम्र, मधुर, मीठी वाणी बोलेगी यदि पाप ग्रह मंगल शनि, राहू, केतु व सूर्य हो तो जातिका कड़वी तीखी, अपशब्द, अलोचनात्मक, व्यंग भरी, रूखी व क्रोधित वाणी बोलेेगी।
8. यदि लग्न मे शनि व केतु हो या उनमे एक लग्न में हो और दूसरे ग्रह की दृष्टि हों तो जातिका कुरूप होगी। 
यदि लग्नस्थ शनि पर मंगल की दृष्टि हो तो जातिका का सिर कुछ टेढ़ा हो और सर पर घने काले बाल हो, माथे पर घाव या मस्सा हो।
9. लग्न मे राहू बडे आकार का सिर हो यदि लग्न मे मंगल हो तो सिर मे जुयें हों।
10. लग्न मे शनि राहू युत हो और उन पर सूर्य की दृष्टि हो तो बाल अति मोटे व बहुत कम या गंजापन हों।
11. द्वितीय भाव मे चन्द्रमा या शुक्र या इनकी युति या इनमे से एक ग्रह लग्न मे हो और दूसरे ग्रह की युति हो बड़ी व सुन्दर आँखे, सफेद या पीली पुतली हो। यदि द्वितीयेश भी द्वितीय भाव मे हो हंसमुख, सौभाग्य कमल के समान मोहनी हो यदि लग्न मे मंगल बुध की युति हो तो जातिका नाटी व अति मोटी हो।
12 यदि द्वितीय भाव मे शनि या राहू या दोनों हों तो नेत्र कमजोर व काला चेहरा व उस पर व्रण हों यदि मंगल या केतु हो या देंखें तो चेहरे पर चेचक या अन्य तरह के घाव हो। यदि सूर्य हो नेत्र रोगी हो व चश्मा लगाये।
13. यदि मंगल की लग्न हो उसमे चन्द व शुक्र हो तो जातिका पति से घृणा करे। 
14. यदि द्वितीय या द्वादश भाव में शुक्र हो तो जातिका कमलनयनी हो यदि उपरोक्त स्थानों पर चन्द्रमा हो तो जातिका मृगनयनी हो। यदि शनि या उसकी दृष्टि हो तो ओंठ लंबे हो यदि मंगल हो तो होंठ छोटे हों।
15. स्त्री जातक मंे यदि 3, 11 भाव मे शुक्र व चन्द्रमा की युति या दृष्टि हो तो जातिका की गर्दन शंखाकर, सुन्दर हो। यदि उपरोक्त स्थानो पर बुध-चन्द्र की युति या दृष्टि हो तो जातिका की गर्दन पर आकर्षक धारियां हो। यदि 3, 11 भावों मे राहू हो तो जातिका की गर्दन पर जख्म के चिन्ह हो।
यदि 12 वें भाव में उच्च का चन्दमा हो तो तलवे मे कमल का चिन्ह हो। यदि 12 वें भाव मे गुरू, चन्द्र हो तो तलवे मे मछली का चिन्ह हो। 12 वें भाव में चन्द्र- शुक्र की युति या एक ग्रह बैठा हो और उसे दूसरा ग्रह देखता हो पैर सुन्दर, नरम व चिकने हो यदि 12 वंे पाप  ग्रह शनि, राहू हों तो पैर बेढंगे, सूखे, कटे, फटे, हो यदि राहू हो तो पैर अति विशाल हों सूर्य व राहू हो तो पैर पंजे चैड़े हों।
16. ज्योतिषी मनुभाई शाह ने अपनी पुस्तक ए बुक आॅफ करेक्ट प्रैडिक्शन मे लिखा है कि स्त्री जंमाक में लग्न मे चन्द्र, गुरू, शुक्र या बुध हो या लग्नेश कर्क, सिंह, धनु, मीन, वृष, तुला, मिथुन, कन्या मे हो तो जातिका सुन्दर होगी या लग्न मे वृष, तुला, कर्क, सिंह, धनु, मीन, मिथुन, कन्या राशि हो तो जातिका सुन्दर होगी यदि प्रथम भाव से सूर्य, चन्द्र, गुरू, शुक्र या बुध का संबध हो तो जातिका सुन्दर होगी। स्त्री या पुरूष जातक मे यदि लग्न मे सूर्य हो उसका उसका रंग ताम्र वर्ण का, चन्द्र हो तो गोरा, मंगल लाल मिश्रित गोरा, गुरू या केतु पीला, गेंहूआ, बुध हो तो सांवला, शुक्र मध्यम गोरा, शनि व राहू काला रंग देगा।  यदि 3, 11 भाव मे मंगल या शनि हो तो गर्दन अति छोटी नाममात्र की हो। यदि केतु हो तो गर्दन फूलने की शिकायत या कोई रोग होगा। द्वितीय भाव में मंगल व 7 वें भाव मे केतु शुक्र या लग्नेश या सप्तमेश के साथ युत हो तो जातिका को सैक्स मे ठंडा बनाये।
17. यदि स़्त्री जातक मे मंगल या शुक्र 3, 6, 8, 12 भावों में हो स्त्री के शरीर पर रोम अधिक होगे। चेहरे पर दाढी या मँूछें हो। 
18. स्त्री के जंमाक मे 8 वां भाव उसके यौनांगों को बताता है यदि मंगल 8 वें भाव पर हो या उस पर मंगल की दृष्टि हो को जातिका की योनी छोटी, गर्म व दानेदार या खुरदुरी होगी अर्थात मंगल लग्न, द्वितीय या पंचम भाव पर हो यदि 8 वें भाव पर शनि या उसकी की दृष्टि हो को जातिका की योनी लंबी होगी अर्थात शनि लाभ, द्वितीय या षष्ठ भाव पर हो यदि राहू हो तो योनि मार्ग टेढा मेढा होगा गुरू हो तो सामान्य आकार का होगा शुक्र व मंगल हो या 8 वें भाव पर इनकी दृष्टि हो तो योनी छोटी होगी सूर्य हो तो काफी गर्मं होगी। यदि स्त्री जातक के 12 वें भाव मे शुक्र बुध युति हो तो जातिका की योनी मे सूजन हो वह संकोची, डरी सहमी स्वभाव की हो। यदि 3, 6, 11 भाव में क्रूर ग्रह हो तो जातिका की योनी अति गर्म हो और उसमे दाने हो सप्तमेश पापयुत केन्द्र मे बड़ी योनि, सप्तमेश गुरू या शुक्र युत अति सुन्दर योनि सप्तमेश चन्द्र, बुध, शनि छोटी योनि सप्तमेश जल राशि मे बड़ी योनि। सप्तमेश शनि स्वग्रही या 7 वें भाव मे शनि बुध या चन्दं बुध योग हो तो छोटी योनि, यदि 7 वंे भाव मे जल राशि पर बुध या चन्द या शुक्र की दृष्टि हो 7 वें भाव मे जल राशि मे वन्द्र शुक्र युति  7 वें चन्द्र जलीय नवंाश मे, गीली योनी, 7 वें भाव मे चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि मे, 12 वें भाव मे जल राशि चन्द्र शनि दृष्ट ़गीली योनि मे 9 यदि 8 वें भाव मे शुक्र या चन्द्र या दोनों हो तो संभोग काल कम अवधि का होगा गुरू हो तो सामान्य अवधि का, शनि हो तो लंबा, शनि के साथ मंगल या शुक्र हो तो अति लंबा, राहू होता अति संभोग की आतुर व विकृत ढंग से अति सन्तुष्ट हो। केतु हो तो इच्छा के बावजूद भी सन्तुष्ट ना हो पाये। बुघ 8 वें भाव मे हो स्त्री ठंड़ी हो।
पति का ज्ञान
स्त्री जमंाक मे 7 वें भाव मे सूर्य हो पति गोरा, क्रोधी, सुन्दर, आकर्षक, यौनलोलुप, रोगग्रस्त हो। मंगल हो तो रक्तवर्ण का क्रोधी, चतुर, झगड़ालु हो बुध हो तो बुद्धिमान, सांवला, धनवान हो गुरू हो ज्ञानी, धनवान व उच्चधिकारी हो शुक्र हो तो सुन्दर, सैक्सी, शौकीन, शनि हो तो वृद्ध, निर्बल, काला हो राहू हो तो नीच पापी, मलिनबुद्धि हो। 7 वें भाव मे सम राशि मे शुभ ग्रह हो तो पति धनी व अधिकारी हो यदि सप्तम भााव मे चर राशि मे हो व सप्तमेश भी चर राशि या नवांश मे हो तो पति यात्राकारी जाॅब मे हो। स्त्री जातक के 8 वें भाव से पति के यौनांग का पता चलता है। 8 वें भाव मे गुरू या चन्द्रमा हो पति का गुप्तांग सामान्य आकार का हो बुघ या मंगल हो तो अविकसित व छोटा हो शनि हो तो लंबा शुक्र हो तो अति सुन्दर, राहू हो अति विशाल व टेढा तथा केतु हो तो पतला व टेढा हो सूर्य हो कठोर व सीधा हो।