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गुप्त भृगु चक्र सूत्र
January 16, 2020 • पं.एस.एस. मिश्र

कुछ पुराने ज्योतिषी भविष्य कथन में विशोंत्तरी दशा, गोचर व अन्य प्रचलित विधियों के अलावा कुछ गुप्त सूत्रों का प्रयोग करते थे। जिनके आधार पर वह बिना विशोंत्तरी दशा निकाले मात्र जंम चक्र के आधार पर किसी भी घटना का वर्ष, माह तिथी तक की सही भविष्यवाणी कर देते थे। कुछ  ज्योतिष ग्रन्थों जैसे भृगु नन्दी नाड़ी, कौशिक संहिता आदि मे गोचर के विशेष नियम का वर्णन मिलता है। एक राशि बराबर एक वर्ष या सूर्य के गोचर मे एक राशि बराबर एक माह का वर्णन है। इस लेख मे इसी विधि का वर्णन किया जा रहा है। इस विधि का दोष यह हैं कि यह घटना का सही वर्ष नही बताता है। केवल माह और तारीख बताता है। इसमे 360 दिन के वर्ष वाले सायन कलैण्डर का प्रयोग किया जाता है। गणना की विधि इस प्रकार है।
1. लग्न से आगे एक राशि बराबर एक वर्ष के अनुसार गणना करो।
2. द्वितीय भाव दूसरा वर्ष और तीसरा भाव तीसरे साल व इसी क्रम में 12 वां भाव 12 वें साल को बतायेगा।
3. इसी तरह चक्र आगे बढेगा लग्न 13 साल, द्वितीय भाव  14 साल व तृतीय भाव 15 वें साल को बतायेगा
4. इसी क्रम में लग्न 13, 25, 37, 49, 61 साल का प्रतीक होगा चतुर्थ भाव 4, 16, 28, 40, 52, 64 साल को बतायेगा।
 इस विधि मे जातक की वर्तमान आयु देखते है। और वह किस भाव मे आ रही है। जैसे कोई आदमी 14 जनवरी 1970 को पैदा हुआ हो और जुलाई 1993 में ज्योतिषी के पास आता है तो जो जनवरी 1993 में उसके 23 वर्ष पूरे होंगें और अब वह 24 वें वर्ष में होगा जो जंमाक के 12 भाव में आता है। अतः 12 वां भाव जातक के जीवन के 24 वें वर्ष की घटनाओं को बतायेगा अब वह नौकरी और विवाह के बारे मे जानना चाहता है। अब यह जानना होगा कि जातक का प्रश्न किन भावों के अन्र्तगत आता है। जैसे नौकरी दशम, एकादश द्वितीय, द्वितीय व षष्ठ भाव से देखते है। अब यदि वर्तमान वर्ष का भावेश उपरोक्त भावों से बल होकर, शुभ संबध बना रहा है तो 24 वें साल मे नौकरी लगेगी अन्यथा अगले भावों मे जिस भाव का स्वामी उपरोक्त भावों ओर भावेशों के साथ शुभ युति या दृष्टि सबंध बना रहा है।  उस भाव के वर्ष में जातक को नौकरी आदि प्राप्त होगी जैसे यदि चतुर्थेश दशम भाव मे हो या दशमेश से युत हो या दृष्ट हो या लाभेश या द्वितीय भाव या द्वितीयेश से सबंध बनाये तो 28 वर्ष मे नौकरी मिलेगी। इसी तरह 2, 4, 7, 11, भाव विवाह के हैं।
माह व तारीख निर्धारण-
1. जिस भाव के वर्ष का अध्ययन करना हो। उस भाव में बैठे ग्रह के अंश।
2. उस भावेश के अंश या भावेश युत ग्रह के अंश।
3. उस भाव पर दृष्टि डालने वाले ग्रह, या उस भाव का स्वामी जिस भाव मे जाय उस अन्य भाव के स्वामी का ग्रहके अंश।
4. उपरोक्त भाव की अरूधा जहाँ जाय उस भाव स्वामी के ग्रह अंश। इसी तरह प्रत्येक भाव के स्वामी ग्रह के अंश लो।
5. एक भाव बराबर 30 अंश। 
एक भाव बराबर एक वर्ष या 360 दिन ।
एक अंश बराबर 12. 17 दिन।
6. वर्तमान भाव के ग्रह, या भावेश के अंश या उस भाव पर  दृष्टि डालने वाले ग्रह लो और उन अंशों को 12 से गुणा करो जो भी संख्या प्राप्त हो उसे जातक की जंम तारीख मे जोड़ दो। अब प्राप्त तिथी ही घटना की तिथी होगी कभी कभी इस विघी मे घटना की तिथी से 12 दिन का अंतर आ जाता है।
उदाहरण अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का जंम 4 अगस्त 1961 को शाम 7ः 24 मिनट पर हो या में मकर लग्न मे हुआ उनका विवाह 32 वर्ष की आयु मे हुआ जो जमंाक के आठवें भाव मे आता है। उनके आठवें भाव राहू है। और उनकी अरूधा लग्न दशम भाव में है। राहू आत्मकारक है जो लग्न का प्रतीक है। और दशमभाव सप्तम भाव से चतुर्थ विवाह के सुख का भाव है। राहू द्वितीयेश (कुटुम्ब का भाव) भी है। मंगल चतुर्थ भाव (सुख भाव) मे है। उस पर राहू की दृष्टि है। राहू के अंश 4. 34 अंश लगभग 5 अंश है। 5  को 12 से गुणा करने पर गुणनफल 60 दिन आता है। उसे  जंम तारीख 4 अगस्त 1961 मे जोड़ने पर 4 अक्टूबर, 1993 तिथी प्राप्त होती है। जबकि उनका विवाह 3 अक्टूबर 1993 को हुआ मात्र एक दिन पूर्व। उन्हे 37 वर्ष की उम्र मे पुत्र प्राप्त हुआ 37 वर्ष लग्न भाव मे आता है। जिसमे दो वक्री ग्रह गुरू और शनि बैठे हैं। अतः हमे विभिन्न अंश प्राप्त होते है। गुरू और शनि के अपने अंश और वक्री अवस्था मे इन्हें गत राशि के अंश से घटा कर प्राप्त अंश। लग्नेश शनि के 2 अंश गत राशि 30 अंश से घटाने पर 28 अंश प्राप्त होते हैं। 28 अंश को 12 से गुणा करने पर 340 दिन प्राप्त होते हैं। जिसे  ओबामा की जंम तिथी 4 अगस्त 1961 मे जोड़ने पर 14 जुलाई 1998 की तिथी प्राप्त होती है। उनका पुत्र 4 जुलाई  1998 को पैदा हुआ मात्र 10 दिन के अंतर पर । यह विधी सरल, चमत्कारी और अनुभवसिद्ध है।