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हस्त रेखा मे मांगलिक दोष
January 16, 2020 • -अनीता सिंह परिहार

विवाह मेलापक भारतीय ज्योतिष और हिन्दू समाज की अत्यन्त प्राचीन व मान्यता प्राप्त परम्परा है। शिक्षित, अशिक्षित , शहरी, देहाती सभी किसी ना किसी रूप मे मेलाप को अपनातेे हैं। जिसका उददे्श्य होता हैं कि वर वधु अपने भावी जीवन मे सुखी वैेवाहिक जीवन बिताये। जिसे आम भाषा मे बनाबन, मिलान, मेलापक, जोग, संजोग कहते हैं। वैसे तो जातक के पूर्व जंम के कर्मानुसार उसके वर-वधु का चयन उसके जंम के पूर्व ही तय हो जाता है। इस संदर्भ मे यह कहावत प्रचलित है कि रिश्ते आसमान मे तय होते है। जहां संयोग होगा वहीं विवाह तय होगा। शास्त्र भी कहता  है।
 विवाहश्चार्थं अन्नं च जननं मरणं तथा।
 कण्ठे बध्वा दृढं सूत्रं यत्रस्थं तत्र नीयते।।
अर्थात विवाह, धन, अन्न, जन्म और मृत्यु जिसकी जहां बदी होती है। भाग्य गले मे मजबूत डोरी बांध कर उसे वहाँ ले जाता है।
 अशिक्षित और देहाती लोग जिनके पास जंम पत्री या जंम संबधी कोई आंकड़े उपलब्ध नही है। लड़का लड़की के नाम से ही गुण मिलाकर सन्तुष्ट हो जाते हैं। जबकि पढे लिखे लोग जंमपत्री मिलान, ग्रह मिलान, मंगली मिलान आदि करवाते हैं। आजकल शिक्षा के प्रसार, टी वी, कम्पयूटर की उपलब्धता के कारण सैंकड़ो टी. वीत्रमेलापक. चैनलों पर ज्योतिष ज्ञान के प्रचार के कारण लोग मेलापक के प्रति काफी जागरूक हो गयें हैं। लाखों करोडों लोग घर बैठे अपने कम्पयूटर से वर वधु के आंकड़े निकाल कर खुद मिलान करते हैं। किन्तु ज्योतिष की बरीकियों का ज्ञान ना होने के कारण और मनपंसद लड़का और लड़की मे ज्योतिषीय बाधायें आ जाने के कारण शंका समाधान करने के लिये ज्योतिषी के पास पहुँचते हैं। ज्येतिषी भी अपने अच्छे बुरे ज्ञान के    अधार पर जातक को सन्तुष्ट करने का प्रयास करता हैं। आजकल लड़के और लड़की द्वारा स्वयं चुनाव करना सामान्य बात है। उनकी पसंद का आधार सुन्दरता, ग्लैमर, स्मार्टनैस विचारों और पेशे की समानता, उच्च कैरियर, धन, संपदा होती है। लेकिन सौन्दर्यवान या उच्च जाॅब होना सुखी वैवााहिक जीवन की गारंटी नही होती है। लाखों आर्थिक रूप से सम्पन्न जोड़ों को अलगाव, तलाक, अकाल मौत, संतानहीनता असफल विवाह और आत्महत्या जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषीय मेलापक के तीन आधार होते हैं। गुण मेलापक, मंगली मेलापक और ग्रह मेलापक। जिनमें मंगली मेलापक और ग्रह मेलापक अति महत्वपूर्ण हैं। गुण मेलापक मे तीन या पांच गुण मिलने पर भी जातको को सफल वैवाहिक जीवन बिताते देखा गया है। हस्तरेखा और शारीरिक विज्ञान मे भी अनेक ऐसे सूत्रों का वर्णन मिलता है जो मंगल दोष और ग्रह मिलान को बताते हैं।
हस्तरेखा मे मंगली दोष के लक्षण
वर कन्या की हस्तरेखा या अंग लक्षण हो निम्न तो जातक या जातिका मंगली दोष से युक्त होगें और उसे वही दुष्परिणाम भोगने पड़ेगें जो मंगली दोष से युक्त जातक को  भोगने पड़ते हैं।
1. यदि वर वधु दोनों मे एक की हृदय रेखा अति छोटी हो और केवल शनि पर्वत तक ही जाये तो जातक 7 वें भाव का मंगली होगा।
2. यदि हृदय रेखा के अंत मे शाखायें ना हों तो जातक लग्न का मंगली होगा।
3. यदि विवाह रेखा द्विजीवी हो जातक 7 वें या आठवें भाव का मंगली हो और निश्चित तलाक होगा।
4. मस्तिष्क रेखा अति छोटी या जंजीरवत हो तो जातक लग्न या 12 वें भाव का मंगली हो।
5. अति लंबी तर्जनी जो अनामिका से लंबी हो तो जातक लग्न का मंगली हो और यदि तर्जनी अनामिका से छोटी हो तेा चैथे भाव का मंगली होगा। 
6. विवाह रेखा मस्तक रेखा को काटे तो 7वें या आठवें भाव का मंगली होगा।
7. विवाह रेखा जंजीरवत तो 7वें या आठवें भाव का मंगली होगा।
8. विवाह रेखा को आड़ी रेखा काटे चैथे भाव का मंगली होगा
9. विवाह रेखा हृदय रेखा पर गिरे आठवें भाव का मंगल हो।
10. विवाह रेखा आगे बढ कर जीवन रेखा को सातवें या आठवें भाव का मंगली होगा
11. विवाह रेखा प्रारंभ मे जीवन रेखा से अलग हो या गुरू पर्वत से निकले तो जातक लग्न या सातवें भाव का मंगली हो।
12. मस्तक रेखा और हृदय रेखा के बीच भाग्य रेखा को काटता द्वीप जो एक सिरे पर द्विजीवी हो।
13. जीवन रेखा से उपर उठती रेखा को शुक्र या निम्न मंगल से आती आड़ी रेखा काटे।
14. शुक्र पर्वत से निकली प्रभाव रेखा हृदय रेखा पर द्विजीवी होकर मिले।
15. शुक्र या निम्न मंगल से निकली प्रभाव रेखा विवाह रेखा को काटे।
16. विवाह रेखा शुक्र पर्वत पर आये।
17. विवाह रेखा टूटी हो।