ALL News Religion Views Health Astrology Tourism Story Celebration Film/Sport Vedio
हत्या या हत्यारा में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह मंगल है
January 15, 2020 • डी.एस. परिहार

हत्या समाज की एक नकारात्मक महत्वपूर्ण घटना होते हुये भी दुर्भाग्यवश इस विषय पर ज्योतिष में साहित्य ना के बराबर है। अंग्रेजी में तो फिर कुछ सामग्री मिकल जाती है, पर हिन्दी में इस विषय पर ढूढ़ने पर भी कुछ नही मिलता है या मिलता भी है, तो अनुवादित जबकि आदिकाल से आज तक हर देश, हर समाज में हत्यायें होती है। जिनमे कुछ व्यत्तिगत (आपसी रंजिश में) होती है। कुछ समाजिक (जैसे लूटपाट, डकैती में) कुछ राजनैतिक (जैसे राष्ट्राध्यक्ष द्वारा विरोधियों की हत्या या विरोधियों द्वारा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या) संभवतः यह हिन्दी में इस विषय पर लिखा विश्व का सर्वप्रथम लेख है। हत्या या हत्यारा में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह मंगल है। जो हिंसा, चाकू, तलवार, बम गोली, पिस्तौल चोट, घाव, आपरेशन सभी हथियारों का प्रतीक और दैवी जल्लाद है। पापग्रस्त मंगल विशेषतः 3 या 6 भाव में हत्यारा बनाता है। 
1. के.एम. नानावटी:- जंम तिथी 2 मई 1922। समय-11. 52 दोपहर। बम्बई। कर्क लग्न में मांदि-19 अंश, कन्या में शनि-9 अंश, राहू-16 अंश, गुरू-18 अंश धनु मे ंमंगल-2 अंश, मीन मे केतु-16 अंश, मेष में सूर्य-18 अंश, बुध-27 अंश, वृष में शुक्र-9 अंश, मिथुन मे चन्द्र-19 अंश। आद्र्रा-चतुर्थ चरण। कार्मिक कन्ट्रोल प्रभाव। केतु का राशि स्वामी गुरू राहू से युत।
2. वीरप्पन:- 18 जनवरी 1952। 1. 05 दोपहर। गोपीनाथन, कर्नाटक। तुला लग्न में मंगल, वृश्चिक में शुक्र, धनु मे बुध, मकर मे सूर्य, कुंभ में राहू, मीन में गुरू, कन्या में चन्द्र, सिंह में केतु, कन्या में चन्द्र, शनि। कालसर्प योग, ग्रह मालिका योग।
3. हत्यारा इंजीनियर:- 5 अप्रैल 1959। 10.12 प्रातः, कानपुर। मिथुन लग्न में मंगल, कन्या में राहू, वृश्ष्चक मे गुरू, धनु में शनि, कुंभ में चन्द्र, मीन में बुध केतु सूर्य, मेष में शुक्र।
4. हत्यारी पत्नी:- 1 जुलाई 1961। 9.53 रात्रि, 25 उ. 41, 95 पू 13। कुंभ लग्न-11 अंश मे चन्द्र व केतु, मीन में गुलिक, वृष में शुक्र, मिथुन में सूर्य, बुध, सिंह में मंगल राहू, मकर में गुरू, शनि।
5. हत्यारा युवक:- 5 जुलाई 1962। 4.52 सायं। कानपुर। वृश्चिक-26 अंश, लग्न मकर में शनि वक्री व केतु, कुंभ में गुरू, वृष में बुध, व मंगल, मिथुन में सूर्य, कर्क में शुक्र व राहू, सिंह मे चन्द्र।
- केस 1. कावस मानिक शा नानावटी (पारसी) नेवी के वारशिप आई एन एस मैसूर में सेंकेड कैप्टन था उन्होने 1949 में इंग्लैण्ड में सिल्विया सें सिविल मैरिज की थी जिससे उन्हें तीन बच्चे दो बेटे और एक बेटी हुयी थे जनवरी 1958 में सिल्विया की मुलाकात नानावटी के एक पुराने मित्र व बम्बई की एक मोटर कम्पनी के 34 वर्षीय मालिक पूर्व विवाहित प्रेम भगवान आहूजा सिंधी से हुयी जो एक प्लेब्वाय था उसके कई युवतियों से नाजायज संबध थंे सिल्विया के उसके साथ अवैध संबध बन गये लेकिन 5-6 महीने बाद प्रेम सिल्विया से कटने लगा जब कि सिल्विया उसे सच्चा प्यार करती थी 27 अप्रैल 59 को नानावटी को सिल्विया के द्वारा इस संबध का पता चला उसी दिन उन्होने दोपहर बाद अपने आॅफिस से पाईन्ट 38 की पिस्तौल जारी करवाई और शाम सात बजे आहूजा के घर जाकर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी राम जेठमलानी सरकारी वकील तथा कार्ल खण्डेलवाल नानावटी के वकील थे सेशन कोर्ट ने उसे बेगुनाह माना लेकिन हाई कोट्र्र ने उसे दोषी मान कर 8 फरवरी 1060 को आजीवन कारावास की सजा दी ब्लिटज के संपादक आर.के. करंजिया जो खुद पारसी थे के नेतृत्व में पारसी समाज नानावटी के समर्थन में आ गया भारतीय समाज व इंडियन नेवी ने भी नानावटी का समर्थन किया सजा के विरोध में सैकडों रैलियां हुयी महराष्ट्र की गवर्नर प. विजयलक्ष्मी जो पण्ठित जवाहर लाल नेहरू की बहन थी ने भारतीय समाज की भावनाओं को देखते हुये नानावटी की सजा माफ कर दी इस माफीनामे पर सिंधी नेता व स्वतंत्रता सेनानी भाई प्रताप तथा प्रेम आहूजा की बहन मेमी आहूजा ने भी लिखित सहमति दी सप्तमेश शनि की राहू युति व पत्नी शुक्र पर राहू की दृष्टि ने ने उन्हें विदेषी पत्नी दी व पत्नी को भ्रष्ट बनाया शुक्र दो शत्रु ग्रहो सूर्य व चन्द्र से घिरा है। शुक्र मंगल के षष्ठाठक योग व शुक्र से द्वितीय भाव में चन्द्र ने जातक व पत्नी को विवाह में धोखा दिया चन्द्र से 7 वें मंगल दोंष भी है। लग्न पद से तृतीय भाव में सूर्यव छठे भाव में मंादि ने उन्हें शत्रु का हत्यारा बनाया 17 मार्च 64 को जेल से बाहर आये 24 जुलाई 2003 को नानावटी की मृत्यु हो गई। 
- केस 2 वीरप्पन मैसूर और तमिलनाडू का कुख्यात चंदन तस्कर व कई मुखबिरों व पुलिसकर्मियों के हत्यारे का नाम कुसे स्वामी वीरप्पन था मंगल शुक्र के राशि परिवर्तन ने उसे अपार संपति का स्वामी बनाया लग्न व चन्द से त्रिकोण में पाप ग्रह हत्यारा व अपराधी बनाते है। लग्न से त्रिकोण मे दो पाप ग्रह मंगल व राहू व चन्द से त्रिकोण में दो पाप ग्रह शनि व सूर्य ने लग्न व चन्द से त्रिकोण में पाप ग्रह ने उसे हत्यारा बनाया लग्नेश पर गुरू दृष्टि व स्पष्ट बंधन योग के अभाव ने उसे वर्षों मे पुलिस के हत्थे चढने से बचाया। 
- केस 3 हत्यारे इंजीनियर के जंमाक में राहू ग्रत राशि। कन्या का स्वामी ग्रह बुघ कार्मिक ग्रह केतु से युत है। तथा षष्ठेश मंगल लग्न में अति क्रोधी व अहंकारी बना रहा है। लग्नेश बुध नीच का दो क्रोधी व घृणा कारक ग्रह सूर्य केतु से युत है। चन्द्र लग्न से षष्ठेश खुद चन्द्रमा चन्द्र लग्न में अति क्रोधी व अहंकारी बना रहा है। 
- केस 4 हत्यारी पत्नी के जमांक में शुक्र व मंगल के बीच मे बुध पति के अलावा प्रेमी। शुक्र पहले गोचर में पहले बुध फिर मंगल से निकले जिंदगी में पहले प्रेमी फिर पति आये। सप्तमेश पंचमेष युति प्रेम विवाह दे लग्नेश सप्तमेश सूर्य व शनि परस्पर षष्ठाष्टक पति-पत्नी में शत्रुता दे। चन्द्रमा वायु तत्व की राशि में केतु युत व मंगल राहू दृष्ट हत्यारे के स्पष्ट योग है। मंगल राहू हत्यारा योग तथा जातिका अति अहंकारी हो। षष्ठेश चन्द्र लग्न में हत्यारा योग। लग्न पापकर्तरी में बंधन योग दे।
- केस 5 हत्यारा युवक- केतु ग्रत राशि मकर का स्वामी ग्रह शनि कार्मिक ग्रह केतु से युत है, जो हत्यारा बनाता है। चन्द्रमा अग्नि तत्व की राशि में मंगल दृष्ट हत्यारे होने के स्पष्ठ योग। पंचम भाव प्रेमिका का उससे उसमें मीन राशि स्वामी बाह्मण ग्रह गुरू अतः प्रेमिका ब्राह्मण हो। 11 वां बड़े भाई का भावेश जो वक्री है। जो अल्पायु वक्री होकर धनु मे जाये जहां मंगल से दृष्ट हो हत्या का शिकार हो जाये।
हत्यारे के ग्रह योग-
1. पापग्रस्त मंगल छठे या तीसरे भाव में या षष्ठेा अति बली हो।
2. त्रिकेषों का अंय षुभ भावों से परिवर्तन हो तथा जातक अति हिसंक व निदनीय कार्य करे।
3. 12 भाव में दो पापी ग्रह्र या द्वादेश सूर्य व शनि से पापग्रस्त क्रूर व हत्यारा बनाता है।
4. योग कारक ग्रह यदि 8 वें या 12 वें भाव में जाकर पापग्रस्त हो तो क्रूर व हत्यारा बनाता है। 
5. त्रिक भाव में सूर्य, मंगल शनि, मांदि, राहू केतु की युति हो।
6. तृतीय भाव, षष्ठ भाव, तृतीयेश, षष्ठेश व कारक मंगल यदि तीनों पापग्रस्त हों जो जातक तो क्रूर व हत्यारा हो।
7. बुद्धि कारक ग्रह चन्द्र व बुध यदि मंगल राहू या शनि से पापग्रस्त हों तों जातक तो क्रूर व हत्यारा हो।
8. चन्द्र, लग्नेश या बुघ यदि अग्नि या वायु राशियों में जाकर पापग्रस्त हों तो जातक क्रूर व हत्यारा हो।
9. लग्नेश या चन्द्र लग्नेश या योगकारक ग्रह त्रिक भाव में हो तथा उन पर कोई शुभ ग्रह का प्रभाव ना हो व पापग्रस्त हो। 
10. कुछ ग्रह योग भी विशेष परिस्थितियों में हत्यारा बनाते है। जैसे मंगल राहू योग, गुरू शनि राहू योग, मंगल केतु योग, गुरू मंगल राहू या गुरू मंगल केतु योग। सूर्य मंगल राहू योग या सूर्य मंगल केतु योग।
11. फेट एंड फोरचून मैगजीन के संपादक स्व माणिक चन्द्र जैन ने अपने शोघ ग्रन्थ कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट मे इस विषय पर महत्वपूर्ण सूत्र पेश किये हैं। कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट जातक द्वारा हत्या, या उसकी हत्या या आत्महत्या हेतु जिम्म्ेदार होते है। राहू केतु गत राशियों के स्वामी यदि दोंनों या उनमे से कोई एक ग्रह राहू या केतु से युति करे तो जातक हत्या करे या उसकी हत्या हो या आत्महत्या करें। अंय ग्रह योग इसका फैसला करेंगें। राहू केतु, वक्री ग्रह, अष्ठमेश, नेप्चून, यूरेनस व प्लूटो कार्मिक  कन्ट्रोल प्लेनेट है? यदि ये परस्पर युति या दृष्ट या उनके राशि स्वामी यदि अंय कन्ट्रोल प्लेनेट से युति करें तो जातक हत्यारा होगा।
12. षष्ठेश लग्न में हत्यारा या अति हिंसक बनाये। अष्ठमेश का लग्न में जाना जातक की खुद की हत्या होना बताता है। 
13. स्वर्गीय बी.वी. रमन की एस्ट्रोजिकल मैगजीन के 1975 के अंक में बुलिंग्स एच हगिंग्स ने तीन किश्तों में एक शोध लेख हारोस्कोप आफस क्रिमिनल्स लिखा था उनके अनुसार लग्न या चन्द्र से त्रिकोण में पापग्रह जातक को हत्यारा व अपराधी बनाते है, यह सिद्धान्त अनुभव सिद्ध हुआ। 
14. 12 भाव में दो पापी ग्रह्र हो तथा द्वादश भाव या द्वादेश पाप ग्रहों से युत या दृष्ट हो या द्वादश भाव या द्वादेश पापकर्तरी में हो तो जातक हत्यारा हों।
15. लग्न या चन्द्र लग्न पर मंगल, केतु, षष्ठेश की युति या दृष्टि हो तथा चतुर्थ भाव या चतुर्थेश पर हिसंक ग्रह मंगल, राहू, शनि केतु की युति या दृष्टि हो। 
16. यदि मंगल लग्नेश होकर षष्ठेष, लाभेश या केतु से संबध बनाये।
17. 12 वें भाव मे चन्द्र राहू योग हो या जंमाक मे मंगल, शनि राहू की युति हो।
18. 12 वें भाव मे वृश्चिक राशि में केतु मंगल, शनि की युति हो।
19. षष्ठेश व द्वादेश परस्पर युत या दृष्ट हो।
20. जंमाक मे सूर्य, शनि मंगल या सूर्य, गुरू मंगल की युति हो। 
21. सूर्य नीच का हो व तथा गुरू नीच का होकर पाप युत हो। 
22. चन्द्रमा पाप या शत्रु राषि (1, 3. 6. 7. 8, 10, 11)  में जाकर सूर्य व मंगल ग्रहों से युत या दृष्ट हो या पापकर्तरी में हो। 
23. स्व. जगन्नाथ भसीन के अनुसार यदि लग्नेश, लाभ्ेाश तृतीयेष संयुक्त रूप से छठे भाव या षष्ठेश से युति या दृष्टि का संबध बनाये।