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इस तरह ना खुद को रुसवा कीजिये
July 12, 2020 • अजमेर अंसारी ‘कशिश’ • Views

हसरतों  का   दिल  से  सौदा  कीजिये !
आप  ताजिर   हैं   तो   ऐसा  कीजिये !

मौसम-ए-उल्फत  में   सुर्खी   आयेगी !
जख्म-ए-दिल को और गहरा कीजिये !

जब  नहीं   रिश्ता   कोई   है  दरमियाँ !
याद  बनकर  भी   न  आया  कीजिये !

गैर   तो   हैं   गैर   उनसे   क्या  गिला !
आप   अपने   हैं   न  धोखा  कीजिये !

गैर   की    बाँहों   में    बाँहें   डालकर !
इस तरह  ना खुद को  रुसवा कीजिये !

किसकी  नजरों में  हवस है  क्या पता !
यूँ   न   सबको   यार   देखा   कीजिये !

जिसमें  नफरत  का  अंधेरा  है  सनम !
प्यार   का   उसमें   उजाला   कीजिये !

जिसके सीने में ‘कशिश’ दिल ही नहीं !
किसलिये   उसकी    तमन्ना   कीजिये !