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जीवन की संवेदनशील प्रतिबद्धताओं के बीच समन्वय का प्रतीक हैं डा अर्चना की कवितायें: जया मोहन
May 14, 2020 • प्रतिवेदन - उर्वशी उपाध्याय • Views

प्रयागराज। महिला काव्य मंच प्रयागराज इकाई के तत्वावधान में एक समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया जो कि कवियत्री और कहानीकार डॉ अर्चना पांडेय पर केंद्रित रहा। डा सरोज सिंह ने डॉ अर्चना जी की कविताओं और गजलों के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी उन्होंने कहा कि - वजनी  शब्दों के जरिए अर्चना जी चमन से बिछुड़ने का गम और आँखें नम जैसे भावों को बहुत ही सहजता से व्यक्त करती हैं।
कवयित्री की रचनाओं के बारे में मीरा सिन्हा ने कहा कि, गजल दमदार है जिसमें अपने देश की मिट्टी से अलग होकर व्यक्ति व्यथित हो जाता है और दूर होने के बाद ही अपनों का महत्व जान पाता है। डा अर्चना ने अपनी कविता के माध्यम से सहित्य की ताकत भी बखूबी बतलाई है जो समाज मे क्रांति लाने में सक्षम है।              
मै सत्य हूं शीर्षक से डॉ अर्चना की अतुकान्त कविता के बारे में बताते वरिष्ठ कवियत्री प्रेमा राय ने कहा कि, कवयित्री ने स्त्री की अस्मिता के औचित्य का गुणगान करते हुए विपरीत परिस्थिति  की कसौटी पर स्वयं को कसते हुए सत्यमेव जयते का संदेश दिया है तो वहीं आंसू, नारी की हताशा और सहिष्णुता किस प्रकार उसका शोषण करती है यह भी बताया है। 
वरिष्ठ साहित्यकार जया मोहन ने कहा कि, आपकी गजल समाज को चेताती है कि भले ही हर जर्रे में गुनाहगार छिपे हों पर हमेशा हार नहीं होगी। निराश मत हो एक न एक दिन,अमन-चैन की बयार बहेगी ऐसा कह कर वे हमें सकारत्मकता की ओर  ले जाती है।
प्रयागराज की वरिष्ठ कवयित्री उमा सहाय ने कहा कि, कवयित्री के भाव विचारोत्तेजक हैं। हिम्मत ही जीवन है कविता में वह बीज तथा उसके विकास के बहाने से आत्म निर्भरता की प्रेरणा देती हैं। लघु कथा के रूप में अधुना में कहानी कला के एक विशेष गुण चरमोत्कर्ष की जिज्ञासा को अंत तक बरकरार रखाय यह डॉ. अर्चना की कहानी कला को प्रस्तुत करने की योग्यता को विशेष रूप से दर्शाता है।
वरिष्ठ रचनाकार कविता उपाध्याय ने कहा कि, डॉ अर्चना की कविता फूल तथा अंकुर के माध्यम से संदेश देती है कि कितने भी झंझावात आएं, लेकिन अडिग रहना चाहिए तभी जग सुवासित होगा।
जानी-मानी साहित्यकार देवयानी ने कहा कि आँसू कविता की आखिरी पंक्ति में वर्तमान की मानसिकता को कवियत्री ने कूट कूट भर दिया।ष्किसी ने कसा तंज मेरी हँसी पर। हिम्मत ही जीवन है में उन्होंने प्रकृति के जीवन को पुष्पित,पल्लवित किया है। कवयित्री और भी विचारोत्तेजक रचनाएँ और सुंदर भाव भरे शब्दों में कविताएँ पाठक तक लेकर आएं, सभी ने यह शुभकामनाएं दीं।
इस कार्यक्रम का संयोजन रचना सक्सेना एवं ऋतांधरा मिश्रा ने किया एवं अध्यक्षता प्रसिद्ध गजलकारा एवं महिला काव्य मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश ईकाई की अध्यक्ष महक जौनपुरी ने किया।