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जुमला और इमला!
January 19, 2020 • व्यंग्य- सुरेन्द्र अग्निहोत्री

गरीबदास भी अजीब तरह के गरीब थे। पैसा, कोडी की तनिक भी लालच नहीं पर डायरी में हर नेता का हिसाब-किताब में माहिर इतने किसने कब क्या कहा, कब कहा, कहां हर बात को लिखने के साथ उस कहे पर क्या हुआ? पडताल करले में उन्हे आनंद अनुभव होता था। गरीबदास को मूकदर्शक मंड़ल का कभी आर्शीवाद मिलता रहा है। मूकर्दाक मंड़ल को मिल रही उपेक्षा से व्यथित होकर तय किया शब्द क्या हथियार हो सकते है? भूमण्डलीकरण के दौर में। गरीबदास पटना में नितीश बाबू के कान में अमरीकी एजेन्सी का नाम फूक आये जिस ने भाजप का राग मालकौश शब्दो के दम पर रचा था। दिल्ली लौटकर सुन मेरे  बन्धु रे... वादे पे तेरे मारा गया कहते व गरीबदास गर्मी की तपन से मुक्ति के लिए उपाय पूछने़ एक सरदार जो है असरदार के घर भरी दोपहरी में पहुंच गये। दिल्ली की उलझी राहो से अन्जान गुजराती पहलवान पर दिन में ही सपनों का जादू सा असर दिलो-दिमाग पर छाया था शब्दो का। गरीबदास ने सवाल कर दिया, रहस्य बरकरार ही रहता शब्द का तो कितना अच्छा रहता पर सर्वोत्तम साजिन्दों की सुरीली धुनें सुनने में खलल पैदा होते देख दाडी खुजलाते अमित शाह ने उसे रुखसत करने के लिए दिल की बात जुवां पर ला कर 15 लाख खाते में आने को चुनावी जुमला कह कर बेडा़ गर्क कर दिया। इतंजार! इतंजार! इतंजार! करते कितनी पीढी खर्च हो चुकी इस देश की स्वराज अब आयेगा, तब आयेगा, कब आयेगा? भरोसा रूसी नेता खुश्चेव का कथन सभी जगह राजनीतिज्ञ एक ही तरह के होते हैं वे वहां भी पुल बनाने का वादा कर देते हैं जहां नदी भी नहीं होती है। एकदम सटीक लगती। यह अलग किस्म का जादू चल रहा था नरेन्द्र मोदी का देश और विदेश में पहले से भीड़ की जुगाड़ कर हो रही थी नैया पार। रोजमर्रा की दुस्वारियों में जी रही जनता के सामने खुलासा किया जाना चाहिये था। भाजपा इस हकीकत को कितना समझती है, यह कहना फिलहाल मुश्किल है. तब के वे दृश्य भीड़ के थे, अब पीछे खामोश, कभी नारे लगाते बैठे महौल बनाते नजर आने वाले आम जन का कितना हुआ वेलकम? आज भी है उन्हें है कोई गम, डायलाॅग है या प्रतिक्रिया ख्वाहिशे सुनी जायेगी, पर सुनी गयी, आँसू झलके पर कह न सके वह गाथा है जो सत्ता की आँखों के सामने अपने ख्यालात रखे या न रखे, दिल्ली में बिहार में वेलेट बाक्स के जिन्न के रूप में निकलेंगे। शब्दो की इमला रटा-रटा कर जो कमाल किया था जुमला कह कर उसे क्षण भर में धोती से रूमाल कर दिया गरीबदास ने जिस भाजप ने अपना राग मालकौश शब्दो के दम पर रचा था उसे उन्ही के शब्दो से ध्वस्त कर दिया। - संकलित