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ज्योतिषीय गंणना अनुसार उसके परिणाम
November 30, 2019 • डी.एस. परिहार

ज्योतिष में पुरूष जातक के ज्योतिषीय गंणना अनुसार उसके परिणाम को जनमानस के समक्ष लाने का प्रयास कर रहा हूं।
- द्वितीय भाव में मंगल व 7 वें भाव मे केतु शुक्र या लग्नेश या सप्तमेश के साथ युत हो तो जातक को शीघ्रपतन दे।
- जंम लग्न, चन्द्र लग्न से अष्ठम भाव, अष्ठमेश या वृश्चिक राशि तीनों पाप प्रभाव मे हो तो जातक जननेन्द्रियो के दोष के कारण नपुंसक हो।
- द्वितीय भाव मे चन्द्र या राहू हो आठवें भाव मे बुध और 12 वें भाव मे चन्द्र हो तो जातक जननेन्द्रियो के विकास ना होने के कारण नपुंसक हो। चन्द्र, राहू, बुध व शनि नपंुसकता के कारक हैं। 
- द्वितीय भाव का गुरू शीघ्र पतन देता है।
- लग्न या सप्तम भाव पर शनि व बुध दोनो की युति व दृष्टि या एक ग्रह की युति व दूसरे ग्रह की दृष्टि नपुंसकता देती है।
- बुध के नक्षत्र, आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती व शनि के पुष्य, अनुराधा, उ. भाद्रपद नक्षत्र और राहू के नक्षत्र के आद्रा, स्वाती और शतभिषा नपुंसकता देते हैं। यदि ये नक्षत्र सप्तम भाव पर उदित हों या लग्न, सप्तम या अष्ठम भाव या अष्ठमेश से उपरोक्त नक्षत्रों का संबध हसे तो जातक नपुंसक होता है।
- यदि सप्तमेश, शुक्र या गुरू अपनी राशि से 180 अंश पर हो तथा वक्री हो तो जातक नपुंसक होगा।
- चन्द्र व लग्न विषम राशि मे हो और उन दोनों पर मंगल की दृष्टि हो या चन्दंमा सम राशि मे हो और बुध विषम राशि मे हो और दोनो पर मंगल की दृष्टि हो। तो जातक नपुंसक हो।
- अष्ठम भाव में बुध शनि योग हो और चन्द्रमा राहू से युत या दृष्ट हो।
- छठे भाव में बुध केतु की युति हो और चन्द्रमा पापकत्र्तरी मे हो।
- सप्तमेश छठे भाव मे मंगल युत हो।
- लग्नेश, चन्द्र लग्नेश या चन्द्रमा बुध व मंगल युत होकर छठे भाव मे हो या उन पर बुध की दृष्टि हो।
- 7 वं भाव मे बुध शु़क्र, चन्द्र हो तो स्त्री मे स्त्रियोचित गुण हों। यदि सूर्य, मंगल, गुरू हो तो पत्नी घमंडी व पुरूषोचित गुण हों 7 वें भाव में सूर्य हो तो पत्नी के स्तन अति कठोर हो सप्तमेश केन्द्र मे  बुध, शु़क्र, चन्द्र युत हो स्तन भारी हो मंगल छोटे स्तन हो 7 वें शनि, राहू, मांदि मोटे स्तन, 7 वें चन्द्रमा शनि दृष्ट अति छोटे स्तन, गुरू दृष्ट भारी स्तन, शुक्र दृष्ट अति सुन्दर स्तन, मंगल दृष्ट चन्द्रमा सुन्दर व कड़े स्तन। चन्द्रमा लग्न व सप्तम मे उच्च या स्वग्रही हो गुणवान, सुशील पत्नी, शुक्र, सप्तमेश या नवमेश पंचम मे हो या सप्तमेश या सप्तम भावस्थ ग्रह उच्च या स्वग्रही या मित्र राशि मे हो पत्नी मृदुभाषी व गुणवान हो।
सप्तम भाव मे बली बुध, या शुक्र-शनि युति गुणवान पत्नी, सप्तम भाव मे सम राशि तथा सप्तमेश व शुक्र भी सम राशि मे हो तो सुन्दर, गुणवान, बुद्धिमान, उत्तम पत्नी यदि सप्तम भाव मे कर्क राशि मे मंगल, शनि युति हो तो उपरोक्त फल हा सप्तमेश या शुक्र का राशि स्वामी उच्च या स्वग्रही हो या सप्तमेश केन्द्र या त्रिकोण के स्वामी से युत हो वही फल हो 7 वें मे गुरू बुध या गुरू चन्द्र युति या लग्न या सप्तम मे गुरू, बुध, शु़क्र, चन्द्र में से दो या अधिक ग्रह युति। यदि पुरूष जमांक मे 7 वें भाव मे गुरू, शुक्र या चन्द्र हो पत्नी गोरी, सूर्य या मंगल हो तो गेंहुआ, बुध सांवली, शनि या राहू केत ुकाली हो। 7 वें सूर्य सुस्त, भारी आवाज, मध्यम कद, मंगल झगड़ालु, आकर्षक, सुगठित शरीर, गुध सुन्दर बद्धितान, सुन्दर गुरू घमंडी, अशुभ चन्द्र रोगी शुभ च ,पुरूषोचित गुण शनि काली, बूढी लगे शुक्र हो सुन्दर विलासी, आकर्षक, सुगठित शरीर राहू केतु हो तो ग्लमैरस या अनाकर्षक या बूढी सी विशाल देह होगी।