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काले घोड़े के नाल का ज्योतिषीय लाभ
November 27, 2019 • उदयराज कनौजिया

काले घोड़े के नाल का हजारों साल से संसार के अनेक देशों मे तांत्रिक, ज्योतिष, शारीरिक, मानसिक रोगांे, तथा, कर्ज, मुकदमे, शत्रुबाधा, भूत-प्रेत बाधा और तंत्र बाधा और काले जादू के निवारण के लिये प्रयोग किया जाता है। भारत के अलावा संसार की सभी सभ्यताओं में और प्रत्येक महाद्वीप मे काले घोड़े की नाल का उपयोग विभिन्न समस्याओं के निवारण के लिये किया जाता है। विभिन्न सभ्यताओं मे इसे भिन्न तरीके से प्रयोग किया जाता है। भारत मे इसको शनि के दुष्परिणाम से मुक्ति के लिये प्रयोग किया जाता है। अक्सर भारत के ज्योतिषी साढे साती शनि और शनि की ढइया मे इसकी अंगूठी पहनाते है। कई मामलों मे इसे मकान के दरवाजे की चैखट या प्रमुख प्रवेश द्वार पर विभिन्न तरीके से स्थापित कराते है। 1990 मे मेरी मुलाकात एक मुस्लिम ज्योतिषी से हुयी उसने मुझे बताया कि इस्लाम मे घोड़े को गाजी कहा गया है, और घोड़ा जिंदगी भर दौड़ता है। चँुकि शनि की दशा और साढे साती शनि या ढइया मे जिंदगी मे हर चीज स्वास्थ, धन, प्रगति, सम्मान अति घीमा हो जाता है। तो घोड़े की नाल या उसकी अंगूठी हर धीमे पड़े मामले को गति प्रदान करके जीवन को सामान्य कर देता है। ज्योतिष मे वास्तविक शब्द शनैःचर है जिसका अर्थ होता है धीमे चलने वाला। जिसका अपभ्रंश शब्द शनीचर है, जो मंद गति से चले वह शनैःचर, आमतौर पर इसे प्रयोग करने से पूर्व इसे अभिमंत्रित किया जाता है। हिन्दु तांत्रिक आमतौर पर इसे दुर्गा जी, गायत्री मंत्र, हनुमान जी या काली जी के मंत्रो से अभिमंत्रित करते है। मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, जिप्सी, जापानी, चीनी और रेड इंडियन्स भी इसे अपने तरीके से अभिमंत्रित करते हैं। भारतीय ज्योतष मे इससे मंगल, शनि और राहू तथा छठे भाव से उत्पन्न समस्याओं का निवारण किया जाता है। उपरोक्त ग्रहों से उत्पन्न समस्याओं मे शारीरिक, मानसिक रोग, दुर्घटनायें, कर्ज, मुकदमे, शत्रुबाधा, भूत प्रेत बाधा और तंत्र बाधा और काले जादू का प्रयोग आते है।
काले घोड़े की नाल के विभिन्न प्रयोग:-
- साढे साती शनि या ढइया मे काले घोड़े की नई नाल लेकर उसे गुरूवार को किसी बर्तन मे रख का उसे सरसों के तेल से भर दे, 24 घंटे नाल तेल मे डूबी रहे फिर उसे शनिवार को सुबह निकाल कर पानी से धोकर गाय के कच्चे दूध से नहलायें काले कपड़े मे रख कर उसका फूल, रोली, जल, दिया, धूपबत्ती आदि से पूजन करके घर के मुख्य दरवाजे की चैखट पर लगा दें।
- तंत्र-मंत्र, काले जादू, मारण मूठ से बचने के लिये नाल को हनुमान जी या दुर्गा जी या माता काली जी के मंत्रों से अभिमंत्रित करके मंगलवार को प्रातःकाल घर की चैखट पर इस प्रकार लगाये कि उसका चन्द्रकार भाग आसमान की और पैर जमीन की ओर रहे।
- निर्धनता निवारण हेतु इसे शुक्रवार को माता लक्षमी के मंत्रों या कवच से अभिमंत्रित करके शुक्रवार को घर की चैखट पर इस प्रकार लगाये कि उसका चन्द्रकार भाग दक्षिण की ओर खुला भाग उत्तर दिशा की ओर रहे। 
- कर्ज निवारण हेतु नई नाल को मंगलवार को ऋणमोचन मंगल मंत्र सें या कवच से अभिमंत्रित करके मंगलवार को प्रातःकाल घर की चैखट पर इस प्रकार लगाये कि उसका चन्द्रकार भाग दक्षिण की ओर खुला भाग उत्तर दिशा की ओर रहे।
- शत्रु बाधा निवारण हेतु नाल को माता काली के शत्रुनाशक कवच, या बजरंग बाण या हनुमत कवच या दुर्गा जी के कवच से अभिमंत्रित करके मंगलवार को प्रातःकाल घर की चैखट पर इस प्रकार लगाये कि उसका चन्द्रकार भाग दक्षिण की ओर खुला भाग उत्तर दिशा की ओर रहे।
- भूत प्रेत बाधा निवारण हेतु नाल को हनुमान जी या दुर्गा जी या माता काली जी के कवच के मंत्रों से अभिमंत्रित करके मंगलवार को प्रातःकाल घर की चैखट पर इस प्रकार लगाये कि उसका चन्द्रकार भाग आसमान की और पैर जमीन की ओर रहे।
- मानसिक रोग बाधा निवारण हेतु नाल को बुघ या या सोमवार को चन्द्रमा के कवच या सीता सहस्त्रनाम या गंगा सहस्त्रनाम  और गजेन्द्र मोक्ष या विष्णु सहस्त्रनाम से मंत्रों से अभिमंत्रित करके से इस प्रकार लगाये कि उसका चन्द्रकार भाग जमीन की ओर और पैर आसमान की ओर रहे।
- यदि परिवार के एक से अधिक सदस्य मुकदमे, शत्रुबाधा, भूत प्रेत बाधा और तंत्र बाधा और काले जादू, रोग या साढे साती शनि या ढइया से पीड़ित हों तो नाल कोे उपरोक्त विधि से अभिमंत्रित करके उस विधि के ही तरीके से घर की चैखट स्थापित करें।
विशेष - बंछरांवा के कर्मकांडी ब्राह्मण पं. जनार्दन त्रिपाठी ने बताया कि घोडे़ के खुर का चूरा तावीज मे पहनाने से मिर्गी के दौरे से मुक्ति मिलती है।