ALL News Religion Views Health Astrology Tourism Story Celebration Film/Sport Vedio
काश दिन आये वो, तुझपे दें जान हम
June 19, 2020 • अजमेर अंसारी ‘कशिश’ • Views

अय-वतन अय-वतन, तुझपे कुरबान हम ।
काश दिन  आये  वो, तुझपे दें  जान हम ।

सरहदों    पर    लड़ें,   तेरी    रक्षा   करें ।
गोली    सीने    पे   खायें,  न  पीछे  मुड़ें ।
अपने दिल  में ये रखते,  हैं  अरमान हम ।

अय-वतन अय-वतन,तुझपे कुरबान हम ।
काश दिन  आये  वो, तुझपे दें  जान हम !

हमने देकर  लहू, तुझको  गुलशन किया ।
आबरू   के   लिये   तेरी,  सर   दे  दिया ।
सारी  दुनियाँ   में  हैं,  तेरी  पहचान  हम ।

अय-वतन अय-वतन, तुझपे कुरबान हम ।
काश दिन  आये  वो, तुझपे दें  जान हम !

जो  हुयीं  हैं  खता, दर - गुजर  सब  करें ।
धर्मो-मजहब की  खातिर, नहीं अब लड़ें ।
हिन्दू - मुस्लिम  नहीं,  सिर्फ  इंसान  हम ।

अय-वतन अय-वतन,तुझपे कुरबान हम ।
काश दिन  आये  वो, तुझपे दें  जान हम ! 

आ  रहे  हैं    बलंदी  पे,  हम  जो  नजर ।
देश  के  दुश्मनों   को,  भी  है  ये  खबर ।
इक  परिन्दा   नहीं  आज   बे-जान  हम ।

अय-वतन अय-वतन, तुझपे कुरबान हम ।
काश दिन  आये  वो, तुझपे दें  जान हम !

मेरे  दिल   में  है   तू,  मेरे   प्यारे   वतन ।
है ‘कशिश’ ये दुआ, यूँ  ही  महके चमन ।
जिन्दगी   भर   करें,  तेरे   गुणगान  हम ।

अय-वतन अय-वतन, तुझपे कुरबान हम ।
काश दिन  आये  वो, तुझपे दें  जान हम !