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काव्य का व्यापक संसार है गीता की कविताओं में: उमा सहाय
April 23, 2020 • समीक्षा प्रतिवेदन: श्रीमती उर्वशी उपाध्याय • Views

महिला काव्य मंच प्रयागराज इकाई के तत्वावधान में आनलाइन समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रयागराज के मंचों की सुपरिचित कवियत्री गीता सिंह के कविताओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रयागराज की वरिष्ठ कवयित्रियों के मध्य चर्चा की गई।
वरिष्ठ साहित्यकार देवयानी जी ने एक ओर गीता सिंह की कविताओं में लयात्मकता, स्त्रीत्व का परिपूर्णता देखी तो वहीं उनके काव्य को ग्रामीण परिवेश से जुड़ा हुआ भी पाया। प्रकृति के प्रति मानव के अत्याचार के खिलाफ सचेत भी करती हैं गीता सिंह की रचनाएं।
कविता, कहानी, संस्मरण हर क्षेत्र में सक्रिय मीरा सिन्हा ने इनकी कविताओं को प्रेम, त्याग और सामर्थ्य और सहित स्त्री के हर भाव से परिपूर्ण पाया तो वहीं आत्मावलंबन और मानव की जिजीविषा का भी उनकी कविताओं में समावेश स्पष्ट रुप से देखा। मधुशाला नामक कविता में अध्यात्म का आत्बोध भी स्पष्ट परिलक्षित पाती है। गीता सिंह की कविताओं में प्रकृत्ति का सम्मान और सम्पूर्ण सृष्टि को हरा भरा देखने की चाहत दिखाई देती है। यह कहना है वरिष्ठ कवियत्री कविता उपाध्याय का। उन्होंने कहा कि बांस के विकास क्रम को स्त्री के जीवन चक्र से जोड़ कर गीता सिंह स्त्री जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं से अवगत कराने के साथ ही अपने काव्य के गहराइयों से परिचित कराया है।
वरिष्ठ कवियत्री प्रेमा राय ने कहा कि गीता सिंह की कविता में स्त्री अस्मिता, जीवन साथी के प्रति समर्पण होने के साथ-साथ आत्मावलंबन भी स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि गीता सिंह के कविताओं का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है उनकी कविताओं में भाषा प्रवाह और शब्दों में ओज के मुखर भाव हैं।
कवियत्री एवं बाल साहित्य की परिचित हस्ताक्षर जया मोहन ने बताया कि इनकी कविता में संसार की विकृतियों के के प्रति कुंठा के साथ ही संदेश भी हैं। प्राकृतिक दोहन के प्रति आक्रोश उनकी कविताओं में नजर आता है। गीता सिंह की गजल में शब्द संयोजन प्रकृति का संपूर्ण श्रृंगार करने में सक्षम हैं।
वरिष्ठ रचनाकार उमा सहाय ने कहा कि दार्शनिकता का करुण भाव गीता सिंह की कविताओं का विशिष्ट भाव है। उन्होंने कहा कि काले बालों की तुलना मेघों से करना सामान्य है लेकिन भुजंग से करना और वृद्धावस्था की संवेदनाओं से को कविता के माध्यम से प्रत्यक्ष करना इस कवियत्री द्वारा ही संभव हुआ। परिचर्चा में गीता सिंह द्वारा  सरलतम भाषा में अनवरत काव्य रचना के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की गई। इस कार्यक्रम का संयोजन महिला काव्य मंच प्रयागराज ईकाई की अध्यक्ष श्रीमती रचना सक्सेना एवं महा सचिव ऋतांधरा मिश्रा ने किया एवं अध्यक्षता प्रसिद्ध गजलकारा एवं महिला काव्य मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश ईकाई की अध्यक्ष महक जौनपुरी ने किया।