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कन्या धरती का वरदान
January 23, 2020 • समाचार

कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम हेतु भारत सरकार द्वारा ‘‘गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994’’ के अन्तर्गत जनपद स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम के आयोजन के सम्बन्ध में बचत भवन के सभागार रायबरेली में सीएमओं संजय कुमार शर्मा व एसीएमओं डा. एम0 नारायण द्वारा बताया गया कि जनपद स्तरीय अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों के संचालकों एवं चिकित्सों से कहा कि गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच कराना/करना कानूनन अपराध है। इस लिए ‘‘गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम-1994’’ (पी0सी0एन0डी0टी0 एक्ट 1994) प्रदेश एवं जनपद में प्रभावी ढ़ग से लागू है। उस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु शासन द्वारा जिलाधिकारी को जनपदीय प्रधिकारी नियुक्त किया गया है। छोटे बच्चों 0 से 06 वर्ष में लड़कियों की संख्या लगातार घट रही है। जो चिन्ता का विषय है। बच्चों का सेक्स रेशियों 2001 की जनगणना के अनुसार 941 था वर्ष 2011 में 926 है जिसमें 15 का अन्तर है। जिससे बराबर लाने की जरूरत है। पेट में पल रहे बच्चें का अल्ट्रासाउण्ड मशीन से लिंग जांच करवाना। गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच कराना/करना कानूनन अपराध है। डा. अल्ताफ ने कहा कि इस एक्ट के अन्तर्गत गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच कराना विधि विरूद्ध है। कानून के अनुसार इस काम को उसकाने वाले अथवा मद्द करने वाले को भी सजा का प्रविधान है। उन्होंने कहा कि ऐसे अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों के संचालकों के लिये भी सजा का प्राविधान है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के विषय में जानकारी देने का अपराध करते है। इस प्रकार की जाचं करने वाले अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों के सम्बन्ध में जनपद के जिलाधिकारी अथवा मुख्य चिकित्साधिकारी को सीधे शिकायत करें अथवा वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कर सकते है। 
 रेडियोलाजिस्ट डा. अल्ताफ हुसैन ने बताया कि जनपद में फिलहाल पीसीएनडीटी एक्ट का उल्लघन नही किया जा रहा है। यह एक सुखद है कि माता-पिता बेटा-बेटियों को एक सम्मान दर्जा दिया है। उन्होंने अपना उदारण देते हुए बताया कि मेरे परिवार में बेटा-बेटियों को एक तरह से समझा जाता है उनके परिवार व परिजन, मित्र में बेटियों का जन्म दिन या बिटया-बहन पत्नी आदि के किसी भी आयोजित कार्यक्रम में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। सभी लोगों को बेटा-बेटियांे को एक तरह का ही सम्मान देना चाहिए। 
 बचत भवन में आयोजित कार्यक्रम में एसडीएम सदर राजेन्द्र कुमार शुक्ला ने कहा कि प्रदेश के घटते हुए बाल लिंगानुपात की रोकथाम हेतु ‘‘डिक्वाय आपरेशन’’ संचालित करने हेतु मुखबिर योजना शासन द्वारा लागू की गई है। जिसमें सफल डिक्वाॅय आपरेशन करवाने पर मुखबिर को रू0 60 हजार तथा मिथ्या ग्राहक को रू0 1 लाख तथा मिथ्या ग्राहक सहायक को रू0 40 हजार की धनराशि पुरस्कार के रूप में 3 किस्तों में दावा करने पर अनुमन्य की जायेगी। मुखबरी करने वाले की जानकारी को गुप्त रखा जाता है। बार-बार गर्भ समापन कराने से मां के स्वास्थ्य को खतरा होता है। साथ ही भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को बढ़ावा मिलता है। अधिनियम के उल्लघन व लिंग जांच करने वाले को 3-5 वर्ष की कैद तथा 10 हजार से 50 हजार के जुर्माने के साथ ही उसका पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है। जांच कराने वाले को 3-5 वर्ष की कैद तथा रूपये 50 हजार से 1 लाख का जुर्माना का प्राविधान है। उन्होंने सदस्यों आये हुए जनो से कहा कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम को जाने तथा इसकी लोगों को जानकारी देकर जागरूक भी करें। आयोजित कार्यशाला में सीएए के पम्पपलेट सरकार का कलेण्डर, विकास एवं सुशासन के 30 माह पुस्तक, उत्तर प्रदेश संदेश, गंगा विशेषशांक आदि भी उपस्थित जनों में वितरित किया गया।
 इस मौके पर एडी सूचना प्रमोद कुमार डा. ए0सीएमओ खालिद रिजवान, डा0 जे0एस0 पाण्डेय, अनिल त्रिपाठी बीएसए, डा0 अनुपमा यादव सहित जनपदस्तरीय अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों के संचालक एवं चिकित्सक मौजूद थें।