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कत्ल इंसानियत का जो करते
May 16, 2020 • अजमेर अंसारी ‘कशिश’ • Views

कैसी तासीर है हवाओं  में!
लोग शामिल हुये गुनाहों में!

कत्ल इंसानियत का जो करते! 
उनकी गिनती है परसाओं में!

रब ने बख्शा है वो असर लोगो!
मुफलिसों-बे-कशों की आहों में !

यार कश्ती डुबोने वाला तो!
कोई शामिल है ना-खुदाओं में!

जिसके आने से बे-खुदी छाये !
वो असर अब कहाँ  बलाओं में !

उनके आने से ये चमन महका!
आई रंगत है इन फजाओं  में!

दिल की नजरों से मैंने देखा तो !
वो नजर आया हर  दिशाओँ में !

नाम तेरा ‘कशिश’ के दिल में है!
तू ही धड़कन की है सदाओं में!