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कोरोनाः राहू भयंकर विनाशकारी फल व महामारी दे रहा है
June 28, 2020 • विशेष संवाददाता • Astrology

वैदिक ज्योतिष एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान अलीगंज, लखनऊ के तत्वाधान मे 135 वीं मासिक सेमिनार का वर्चुअल आयोजन वाराह वाणी ज्योतिष पत्रिका कार्यालय मे किया गया सेमिनार का विषय कोरोना एण्ड एस्ट्रोलाॅजी था जिसमे डा. डी. एस. परिहार के अलावा जज श्री लाल बहादुर उपाध्याय, श्री एस.पी. शर्मा, प. शिव शंकर त्रिवेदी, पं. के. के. तिवारी, श्री उदयराज कनौजिया, डा. पी.के. निगम, आचार्य राजेश श्रीवास्तव, प. एस.एस. मिश्र तथा पं. आनंद त्रिवेदी आदि ज्योतिषियोें एवं श्रोताओं ने भाग लिया गोष्ठी मे डी.एस. परिहार, पं. के.के. तिवारी, आचार्य राजेश श्रीवास्तव जज श्री लाल बहादुर उपाध्याय, श्री उदयराज कनौजिया, तथा पं. आनंद त्रिवेदी ने अपने अनुभव और व्यक्तव्य प्रस्तुत किये पं. आनंद त्रिवेदी ने बताया कि कोरोना के भयानक रूप से फैलने के लिये कई महीनो से चल रहे वक्री ग्रहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आचार्य राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना वायरस सोशल डिस्टेंसिंग के अभाव मे फैल रहा है। इसमे जब हम बाजार जाते है। और करेंसी का जो लेन-देन करते है वो कोरोना के फैलने का प्रमुख कारण है। उपरोक्त वस्तुओं का कारक ग्रह बुध है। वरिष्ठ ज्योतिषी श्री एस.पी. शर्मा ने बताया कि राहू एपेडैमिक और केतु वायरस का कारक है। केतु चँुकि अति शुक्ष्म होता है। अतः इसका वायरस से सीघा संबध है। आपने अप्रैल, मई जून जुलाई आदि महीनों का फल न्यूरोलाॅजी के आधार पर बताया कि यह मई शुक्र का तथा जून बुध का सौर मास है। अतः यह रोग अभी बढेगा बरसात के महीने जुलाई मे यह भंयकर रूप धारण करेगा और अगले साल जनवरी या उसके बाद शांत होगा। प्रसिद्ध ज्योतिष मैग्जीन द टाईम्स आॅफ एस्ट्रोलाॅजी के लखनऊ ब्यूरो चीफ आचार्य दिनेश जी ने बताया कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति व प्रसार के लिये निरंतर पड़ रहे सूर्य व चन्द्र ग्रहण निश्चित रूप से जिम्मेदार है। उनके अनुसार आगामी समय और द्यातक होगा। डी.एस. परिहार ने बताया कि भारतीय ज्योतिष के अनुसार राहू व केतु वायरस के कारक ग्रह है। उनके द्वारा विश्व मे गत 400 वर्षो हुये विभिन्न वायरस के हमलों के ज्योतिष अध्ययन के अनुसार राहू व शनि का परस्पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबध वायरसजन्य महमारियों की उत्पत्ति व प्रसार देता है। परिहार जी ने अपने विशेष शोध के द्वारा बताया कि
1. राहू व शनि परस्पर त्रिकोण मे हो या राहू या शनि का राशीश ग्रह यदि वक्री या मार्गी होकर शनि या राहू से संबध बनाये तो विश्व मे महामारी फैलती है।
1. 1 मार्च 1720 को योरोप मे प्लेग फैला और लाखों लोग मारे गये इस दिन वृश्चिक मे शनि व चन्द्र युति तथा कर्क मे राहू था शनि चन्द्र व राहू की त्रिकोण युति मे प्लेग की महामारी फैली। 
2. 1 मार्च 1820 को मीन मे शुक्र शनि व राहू योग था कुंभ मे सूर्य गुरू बुध योग था तथा गुरू व शनि मे राशि परिवर्तन था शनि व राहू योग के कारण कालरा की महामारी फैली और लाखों लोग मारे गये। 
3. 1 मार्च 1920 मे सूर्य कुम्भ मे शनि सिंह में तुला मे मंगल व राहू तथा मिथुन मे चन्द्र था शनि व सूर्य मे राशि परिवर्तन था, अतः शनि कुंभ में गया उससे त्रिकोण मे मंगल, चन्द्र व राहू थे जिसके कारण भयानक स्पैनिश फलू की जानलेवा महामारी फैली और 2 से 5 करोड़ लोग मारे गये। 
4. 2020 मे कोरोना की महामारी भयानक रूप से तब फैली जब 23 जनवरी 2020 को शनि मकर में गया और वैसे तो मिथुन के राहू शनि से षष्ठाष्ठक योग मे है। परन्तु कुंभस्थ बुध वक्री होकर मकर फल दे रहा है। और बुध-शनि योग बना रहा है बुध राहू का राशीश होकर राहू का प्रतिनिधित्व कर रहा है। 
इस संदर्भ मे एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त की खोज गत सदी मे फेट एंड फोरचून के संपादक तथा कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट के लेखक प्रख्यात ज्योतिषी स्वर्गीय माणिक चन्द्र जैन ने की थी उनके अनुसार, त्रिकेश, द्वादेश, वक्री ग्रह, अष्ठमेश, तथा राहू केतु तथा राहू केतु के राशि स्वामी ग्रह कार्मिक ग्रह होते है। जो पूर्व जंम के कठिन पापों को बताते है तथा जीवन मे भारी दुर्भाग्य, गंभीर रोग दुःखद व हिसंक घटनायें, एक्सीडेंट, महामारी हत्या, आत्महत्या, रेप हो जाने जैसे गंभीर फल देते है। राहू व केतु के राशि स्वामी ग्रह यदि राहू या केतु से युत हो तो उपरोक्त गंभीर परिणाम देते हैं वर्तमान मे विशेषतः जब नवम्बर-दिसम्बर 2019 मे जब कोरोना फैलना शुरू हुआ तब राहू मिथुन मे तथा केतु धनु में गाोचर कर रहे थे, यानि धनु गत केतु का राशि स्वामी ग्रह गुरू केतु से युत है। जो अशुभ कार्मिक फल दे रहा था । राहू का मिथुन मे व केतु का धनु मे गोचर 7 मार्च 2019 से शुरू हुआ था जो सितम्बर 2020 तक चलेगा यह घातक फल देगा वैसे कोराना का पहला मरीज कब मिला इसकी तिथियों मे कई मतभेद है। पर अधिकांशतः मान्यताओं के अनुसार दिसम्बर 2020 के अंत मे चीन के बुहान शहर मे पहली महिला मरीज मे करोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुयी इस समय दो खगोलीय घटनायें हुयी।
1. 26 दिसम्बर 2019 को धनु राशि मे षष्ठ ग्रही योग बना धनु राशि मे सूर्य, चन्द्र शनि केतु बुध व गुरू छह ग्रह की युति हुयी तथा तथा इससे 180 अंश पर राहू भी युत हुआ अर्थात सात ग्रह एक सीध मे आये यह सात ग्रह ना केवल सूर्य से एक सीध मे आये बल्कि यह सात ग्रह पृथ्वी के भी सीध मे थे खगोल विज्ञान मे यह घटना साईन्डोनिक और हेलोन्ट्रिक साईन्ड्रोम कहलाती है। भंयकर कार्मिक कन्ट्रोल ग्रहों का मिलन हुआ ना केवल धनु गत केतु का राशि स्वामी ग्रह गुरू कार्मिक ग्रह केतु से युत हुआ बल्कि मिथनु गत राहू की राशि स्वामी ग्रह बुध भी केतु से युत हुआ यह भंयकर फल देगा। 
2. इसी दिन 26 दिसम्बर 2019 को धनु राशि केतु के मूल नक्षत्र मे खग्रास सूर्य ग्रहण भी पड़ा। यह ग्रहण सूर्य व चन्द्र दोनों ही राशियों पर पड़ा।
विश्व ज्योतिष मे ग्रहणों बड़ी भूमिका होती है। सूर्य और चन्द्र ग्रहण राहू व केतु के प्रभाव से होते है ये सूर्य व चन्द्रमा को ढक लेते हैं। ग्रहण का प्रभाव इसके प्रकृट होने से छह महीने से और छह महीने बाद तक रहता है। यदि किसी राष्ट्र या महान व्यक्ति या जातक के जमांक मे इन भावों की राशियों पर ग्रहण पड़े तो विशेष अशुभ फल मिलता है। के एन राव का विशेष शोध सूर्य या चन्द्र ग्रहण ग्रहण विश्व मे महान दुर्घटनाये महामारी मौसम मे उथल पथल व भूकंप आदि अशुभ घटनायें देते हंै।
वर्तमान में राहू आद्र्रा नक्षत्र मे चल रहा था जो राहू का अपना नक्षत्र होने के कारण राहू भयंकर विनाशकारी फल व महामारी दे रहा है। 27 मई 2020 से राहू अपने शत्रु ग्रह मंगल के मृगशिरा नक्षत्र मे चला गया जिसके कारण राहू की शक्ति असाधारण रूप से बढ जायेगी। 10 मई 2020 को गुरू तथा 11 मई 2011 को शनि वक्री हो रहा है, और मकर में नीच का वक्री गुरू ना केवल उच्च का फल देगा बल्कि वो राहू व केतु की विनाशक शक्ति बलहीन कर देगा मकर का वक्री शनि भी धनु का फल देगा और केतु के फल को नष्ट कर देगा धनु राशि में गुरू-शनि का योग ब्रह्म योग बनाकर महामारी का विनाश करेगा वर्तमान मे भी मकर में गुरू-शनि योग है। पर गुरू नीच का है। तथा इसका राहू-केतु से कोई संबध नही बन रहा है। यह योग आंशिक परन्तु भिन्न रूप मे 26 दिसम्बर 2019 में भी आया पर उस समय दोनों ग्रह पर तब शनि अपने शत्रु ग्रह सूर्य-केतु व चन्द्र से युत था और गुरू अस्त व शत्रु ग्रह बुध से युत था अतः महामारी फैली 15 अगस्त 2020 से सूर्य, अपनी स्व राशि सिंह मे जायेगा जो प्रारम्भ मे रोग बनायेगा परन्तु दवा कारक सूर्य से त्रिकोण मे मोक्ष कारक केतु किसी दिव्य औषधि की खोज देगा। अतः कोरोना नई खोजी गई औषधि के कारण सितम्बर 2020 के बाद विश्व को कोरोना से भारी राहत मिल जायेगी। गोष्ठी की अध्यक्षता डा.डी.एस. परिहार ने की।