ALL News Religion Views Health Astrology Tourism Story Celebration Film/Sport Vedio
क्या गायत्री पूर्वजंम में इन्दिरा गांधी थी?
November 19, 2019 • डी.एस. परिहार

31 अक्टूबर,1984 की रात 1 नवम्बर 1984 की सुबह 3.15 मिनट पर भोपाल (म प्र.) मे एक पाठक ब्राह्मण ड्राइवर के घर एक कन्या का जंम हुआ जिसका नाम गायत्री रखा गया गायत्री पाठक कुछ बड़ी हुयी तो विचित्र सी बाते करने लगी उसका कहना था कि वह गत जंम मे पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गंाधी थी इन्दिरा गांधी के जीवन की समस्त घटनाओं को वह इतनी सत्यता से बनाती थी कि लोग दंग रह जाते है। 31 मई 1991 को जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गंाधी की हत्या हुयी तो वह फूट-फूटकर रोई कि मेरा बेटा मारा गया है। गायत्री का जंमाक इस प्रकार है।
कन्या लग्न-1 अंष तुला मे सूर्य-15 अंश, बुध-28 अंष व शनि-24 अंश वृश्चिक मे केतु-4 अंष, व शुक्र-21 अंश, धनु में गुरू-15 अंष, मंगल-26 अंश, मकर में चन्द्र-29 अंश, वृष में राहू-4 अंष। नवंाश लग्न मकर लग्न में शुक्र, कुंभ में सूर्य व राहू, वृष में शनि मिथुन में बुघ चन्द्र, सिंह मे गुरू, केतु, वृश्चिक मे मंगल। इन्द्रिरा गांधी-17 नवम्बर 1917। समय- 9.11 रात्रि। इलाहाबाद। कर्क लग्न-1 अंश लग्न में शनि-22 अंश, सिंह मे मंगल 16 अंष, वृश्चिक मे सूर्य-5 अंश, बुध-13 अंश, धनु में शुक्र-21 अंष, चन्द्र-7.9राहू- 9 अंष, वृष में वक्री गुरू- 15 अंश, मिथुन में केतु-9 अंष। नवंाश लग्न कर्क, सिंह मे सूर्य व मंगल, तुला में शुक्र, बुध, धनु मे केतु, मकर में शनि, कुंभ में चन्द्र, वृष में गुरू, मिथुन में राहू।
तुलनात्मक विश्लेषण- गायत्री का जंम मूल नक्षत्र रेवती में हुआ है। जिसके बारे मे ज्योतिष ग्रन्थो में लिखा है। कि मूल नक्षत्र में पैदा हुये जातक की गत जंम में मृत्यु अकाल व अस्वभाविक और अशुभ ग्रह की दशा अन्तरदशा में होती है। तथा गत जंम में उसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी नही होती है। अतः वर्तमान जंम मे मूल शांति की विशेष पूजा करवानी पड़ती है। जिसकी पूजा तेरहवीं पूजा से मिलती जुलती होती है। दोनों का जंम मकर राशि में हुआ है। इन्दिरा गंाधी की कुण्डली में वृष के वक्री गुरू व धनु के शुक्र से राशि परिवर्तन है। भृगु नन्दी नाड़ी के अनुसार अतः गुरू धनु राशि व शुक्र वृष राशि में गया माना जायेगा षष्ठेष लाभेष के इस परिवर्तन ने ही उनकी हत्या करवाई। जबकि गायत्री का जंम गत गुरू धनु में है। यह एक विचित्र सी समानता है। भृगु नन्दी नाड़ी के अनुसार गत जंम का ज्ञान जंमस्थ गुरू से 12 वें भाव को लग्न मान कर किया जाता है। अतः गायत्री का गत जंम वृश्चिक राशि से देखा जायेगा जो पापकर्तरी मे है। अष्ठमेष बुध पापयुत है। वक्री षष्ठेश गुरू तथा राहू केतु के राशि स्वामी ग्रह यदि राहू केतु से युत हों तो हत्या या आत्म हत्या करवाते है। कार्मिक ग्रह शुक्र कार्मिक ग्रह राहू से गायत्री के जंमाक में शुक्र केतु युत व पापकर्तरी में है। जो शुक्र हो जो गत जंम मे पाप के वृक्षों के कटाने, गौ बहिन, पुत्री, बहू, सती स्त्री के प्रति अपराध बताती है। इंदिरा गांधी ने अपने पुत्र संजय की मृत्योपरांत पुत्रवधू मेनका गांधाी के प्रति भारी दुःव्यवहार किया था चन्द से त्रिकोण में राहू गत जंम मे माता अल्पायु थी शुक्र से 12 वें गत जंम का ज्ञान गत जंत मे शुक्र तुला मे उच्च के शनि व मित्र ग्रह बुध ये युत है। महान राजयोग था राज्यकारक सूर्य से युति व द्वितीय केतु गत जंम मे उच्च सरकारी पद देता है।