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क्या कहता है नेताजी का हैंडप्रिंट
January 20, 2020 • डी एस परिहार

‘व्हाट हैपेन्ड टू नेताजी, इन्डियाज बिगिस्ट कवर अप, व बैक फ्राम डेडः ईन्साइड के लेखक अनुज धर ने अपने टिव्टर एकांउट पर नेताजी के दांये हाथ का हैंडप्रिंट दिया और ज्योतिषियों से आहवाहन किया कि वे हैंडप्रिंट का अध्ययन करके बतायें कि नेताजी मध्यायु थे या दीर्घायु। ए. एम, जुलाई, 1964 के अंक मे एच एल पाण्डया ने एक लेख ‘ इज नेताजी सुभाष चन्द्र बोस लिविंग आॅर डेड’ मे लिखा है कि उन्हें 18 फरवरी 1964 को बम्बई मे जहंागीर आर्ट गैलरी द्वारा आयोजित एक फोटोग्राफिक एग्जीबिशन मे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के दोनो हाथों के निरीक्षण का सौभाग्य मिला श्री पाण्डया के अनुसार नेताजी के  हाथ मे बलवान जीवन रेखा के साथ सोलोमोन रिंग थी जो अक्सर साधारण आदमियों, व्यापारियों और इंजीनियरों के हाथ मे पाई जाती है। नेताजी के हाथ मे दूसरा महत्वपूर्ण बिंदू यह था कि लंबी मस्तक मे हृदयरेखा की ओर उपर उठते हुये तीन-चार फोर्क युक्त थे जो कैरियर मे तीन चार बार सफलता की प्रतीक थे फोर्क वाली मस्तक रेखा कैरियर मे सफलता को बताती है। नेता जी के दांये हाथ मे सुंदर व लंबी प्रबल हृदय रेखा थी पर बांये हाथ मे  हृदय रेखा 5-6 जगह खण्डित थी तथा हृदय रेखा के फोर्क निम्नमंगल की ओर झुकावदार थे जो कैरियर मे अति ंिचंता को बता रहे थे नेताजी के हाथ मे डबल परस्पर समंातर सूर्य रेखायें थी जो प्रसिद्ध कर्मयोगी समाजिक कार्यकर्ता होना बताती है। पर ये सूर्य रेखायें खंडित थी जो उनके स्थान परिवर्तन तथा कार्य-कलापों के परिवर्तन को बताती है। निम्न मंगल पर कई निम्नगामी रेखायें जीवन रेखा पर आ रही थीं जो महान  योद्धा या झुझारू व विद्रोही स्वभाव बता रही थी हाथ नेताजी के तानाशाही स्वभाव को बता रहा था दोेनो हाथों मे लंबी मस्तक जो हृदय रेखा की ओर उपर उठते हुये तीन-चार फोर्क युक्त थी तथा उनकी गुरू तर्जनी उंगली सीधी व काफी लंबी थी बोस की तर्जनी उंगली अनामिका से बड़ी थी जो उनका नाम इतिहास मे सदियों तक अमर बना रही थी ऐसे जातकों को मरणोंपरांत भारी यश मिलता है। चन्द्र पर्वत पर बनी आड़ी रेखा उनकी विदेश यात्राओं को बतला रही थी 5-6 जगह खण्डित हृदय रेखा जो उन्हें स्वजनों से धोखा और टी.बी. के रोग दे रही थी स्वास्थ रेखा पर क्रास उनकी टीबी तथा अंय शारीरिक बीमारियों को बतला रही थी दांये हाथ की निर्दाेष हृदय रेखा उन्हें सभी प्रकार के शारीरिक राजनैतिक व दुर्भाग्यों से रक्षा दे रही थी नेताजी के दोनों हाथों मे जीवन रेखा बली थी पर मंगल रेखा निर्बल थी और 45 वर्ष के आस-पास उपर की ओर बिखर रही थी श्री पाण्डया का पूर्ण मत था कि नेताजी जीवित नही थे और उनकी आयु 45 से 55 वर्ष के मध्य तक ही थी पाण्डया का कहना था कि उनके एक धनिष्ठ मित्र के हैंडप्रिंट मे खण्डित हृदय रेखा ने मित्र को एक्सीडेंटल मौत दी जबकि उसकी जीवन रेखा निर्दाेष थी खण्डित हृदय रेखा ने नेताजी को अकाल एक्सीडेंटल मौत दी पाण्डया ने कई बली जीवन रेखा, मस्तक रेखा व हृदय रेखा वाले जातकों को अल्पायु देखा क्योंकि उनकी मंगल रेखा निर्बल थी नेता जी के हाथ मे दीघार्यु होने केे निम्न योग थे
1. नेताजी के दोनो हाथों मे बलवान जीवन रेखा थी।
2. उनके बांये मे हृदय रेखा 5-6 पर जगह खण्डित थी पर दांये हाथ मे निर्दोष थी दांये हाथ की निर्दाेष हृदय रेखा उन्हें सभी प्रकार के शारीरिक राजनैतिक व दुर्भाग्यों से रक्षा दे रही थी हस्तरेखा के नियमानुसार यदि बांये हाथ मे कोई रेखा अशुभ चिन्ह से युत हो पर रेखा दायंे हाथ मे निर्दोष हो तो जातक जंमजात दुग्र्भाय लेकर पैदा हुआ था पर वो वर्तमान कर्मों से दुर्भाग्य पर विजय पा लेगा। 
3. मंगल रेखा का निर्बल होना अवश्य अल्पायु बनाता है। पर मंगल रेखा तभी दीर्घायु योग बनाती है। जब जीवन रेखा पर कोई प्रबल अशुभ चिन्ह हो और उसके बगल मे मंगल रेखा बली हो तो मंगल रेखा दुर्भाग्य नाश करके जातक की रक्षा करती है।
4. एक्सीडेंट के ग्रह योगो मे मंगल रेखा से कोई संबध नही बताया गया है। 
5. नेताजी के हाथ कई वर्ग थे जो बीमारी और दुर्घटना और दुर्भाग्य से जातक को साफ निकाल लेता हें पहला सोलोमन ंिरंग से बना गुरू पर्वत पर दूसरा शनि पर्वत पर जो महान दुर्घटना से रक्षा कारी चिन्ह है। शनि वर्ग के बारे मे कहा गया है कि यदि जातक को शेर के सामने भी छोड़ दो तो जिंदा वापस आ जायेगा तीसरा मस्तक रेखा और हृदय रेखा के बीच मे भाग्य रेखा पर चैथा मस्तक रेखा के नीचे भाग्य रेखा पर पांचवा निम्न मंगल क्षे़त्र पर से पाचों वर्ग बेहद स्पष्ठ हैं। और नेताजी के हैंडप्रिंट मे कोई भी इन्हें देख सकता है। 
6. श्री पाण्डया का यह कहना  कि मंगल रेखा 45 वर्ष के आस पास उपर की ओर बिखर रही थी इसलिये गलत हैं क्योंकि मंगल रेखा केवल मंगल पर्वत तक ही होती हैं जिसके यानि  आधी जीवन रेखा के सामने तक उसके नीचे की रेखा शुक्र रेखा कहलाती है। यदि मंगल रेखा यदि शुक्र पर्वत पर मणिबंध भी जाती है। तो उसके निचला भाग शुक्र रेखा ही कहलाता है। साभार - वाराह वाणी