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क्यों आती है शिक्षा मे बाधायें
November 27, 2019 • डी.एस. परिहार

शिक्षा आज के दौर की पहली और प्रमुख आवश्यकता है। शिक्षा बेहतरीन कैरियर की गारंटी है, किन्तु समाज मे कुछ लोग ऐसै भी है, जिनको भगवान ,समाज व पढने का मौका देता है, फिर भी वे उनकी शिक्षा मे भारी बाधा आती है, जिसके कई कारण होते है। कुछ बच्चों मे उनकी बुद्धि या मानसिक स्तर बहुत घटिया होता है, उन्को अपना कोर्स समझने मे बड़ी कठिनाई होती है। अक्सर कार्यालय मे सैंकड़ों ऐसै अभिभावक आते है, जो शिकायत करते हैं कि उनका बच्चा पढता नही है या पढाई मे कमजोर है। जबकि कुछ बच्चों मे सीखने समझने की जबरदस्त क्षमता होती है। कौन से ग्रह योग शिक्षा मे बाधा देते है, इसके कुछ मूलभूत नियम नीचे दिये जा रहें है।
1. पृथुव्यास के ग्रन्थ ' होरासार ' के अनुसार यदि कोई ग्रह पाप नवांश मे हो तो उस ग्रह की दशा मे जातक को बचपन मे शिक्षा मे बाधा आती है। यदि उस नवांश का स्वामी जमांक मे अस्त हो तो शैक्षिक बाधा निश्चित है।
2. यदि कोई ग्रह नीच या शत्रु नवांश मे जाय तो उस ग्रह की दशा मे शिक्षा मे असफलता मिलेगी। 
3. चतुर्थेश यदि षष्ठ या तृतीय भाव मे हो चतुर्थेश की दशा मे शिक्षा मे असफलता मिलेगी। 
4. ज्योतिषार्णव नवनीतम ग्रन्थ के अनुसार द्वितीयेश यदि 6, 8, 12 भाव मे पाप युत या दृष्ट हो तो शिक्षा मे बाधा देता है।
मंद बुद्धि के कारण शिक्षा मे बाधा:-
1. यदि बुध षष्ठ या द्वादश भाव मे शनि या मंगल से  युत या दृष्ट हो तो शैक्षिक बाधा निश्चित है।
2. मिथुन या कन्या मे चन्द्र-राहू युति या बुध शनि युति या बुध मंगल युति हो। तो शिक्षा मे बाधा देता है।
3. लग्न या चन्द्र लग्न कुछ विशेष नक्षत्रों मे पड़े और इन नक्षत्रों पर पाप प्रभाव हो तो शिक्षा मे असफलता मिलेगी।  जैसे अश्विनी का प्रथम चरण विषाद, भरणी का द्वितीय चरण हीनभावना, पुष्य का प्रथम चरण दुःश्चिन्ता, हस्त का तृतीय चरण दुःश्चिन्ता, चित्रा का प्रथम चरण अपराधिक दिमाग, शतभिषा का द्वितीय चरण क्रोधित बुद्धि का।
4. यदि शनि लग्न, चन्द्र व बुध को पापग्रस्त करे या  यदि मंगल लग्न, चन्द्र व बुध को पापग्रस्त करे तो शिक्षा म बाधा देगा 
3. यदि बुध कर्क, मेष, वृश्चिक और मीन राशि मे हांे या लग्न, चन्द्र व बुध उपरोक्त किसी राशि मे पीड़ित होतो शिक्षा म बाधा देगा । मकर , कुंभ, मिथुन व कन्या राशि मे चन्द्र शिक्षा मे मन ना लगे।
यदि बुध षष्ठ या द्वादश भाव मे शनि या मंगल से  युत या दृष्ट हो सूर्य बुध के नक्षत्र में मतिभ्रम देता है। सूर्य चन्द्र नक्षत्र मे निराशावादी या उग्र बनाता है। केतु के नक्षत्र में चन्दमा क्रोधी व कायर बनाता हैं बुध के नक्षत्र मे चन्द्रमा अति कल्पनाशीन व भय का रोगी बनाता है। शनि के नक्षत्र मे चन्द्रमा भ्रम देता है। मंगल बुध के नक्षत्र में क्रोध देता है। केतु के नक्षत्र मे बुध मंदबुद्धि देता हैता है। चन्द्रमा के नक्षत्र मे बुध अति कल्पनाशीन व चिन्तित बनाता है। शनि के नक्षत्र मे बुध मानसिक कमजोरी देता है। सूर्य के नक्षत्र मे बुध नर्वस वीकनैस देता है। राहू के नक्षत्र मे बुध हीनभावना देता है। बुध्के नक्षत्र मे शनि मे निराशा, कमजोर स्मृति व आत्मविश्वास की कमी देता है।
किसी भी राशि मे बुध मंगल की युति या बुध पर मंगल की दृष्टि या बुध केतु युति या बुध पर केतु की दृष्टि शिक्षा मे बाधा देता है। चन्द्र राहू या चन्द्र मगल की युति या चन्द्रमा पर मुंगल, राहू की युति शिक्षा मे बाधा देगा।