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लेखकों के जनांक
November 25, 2019 • पं. एस एस मिश्र

प्रस्तुत लेख में कुछ लेखकों के संकलित कुछ लेखकों के जनांक पाठकों के समक्ष लाने का प्रयास है। आचार्य चतुरसेन चन्द्रवंशीय क्षत्रिय पिता केवलराम वैद्य पटियाला, जन्म 26 अगस्त 1891, समय 6. 50 सांय। गोधूलि, इष्ट 32। 13 बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) कुंभ लग्न: लग्न मे गुरू, वृष मे चन्द, राहू, कर्क मंगल, सिंह में, शु0, श0, सू0, धनु मे बु0, वृश्चिक मे केतु। मृत्यु 2 फरवरी 1960।
सर आर्थर कानन डायल ब्रिटिश रहस्य रोमांच लेखक--22 मई 1859, कपकाॅर्डी पैलेस, एडिंग्बड, इंगलैण्ड, वृष लग्न- लग्न मे सूर्य, मंगल, मिथुन मे गुरू, कर्क मे शनि, सिंह मे केतु, मकर मे चन्द्र कुंभ मे राहू, मेष मे बुघ व शुक्र।
 हैगर राईडर- मशहूर रहस्यपूर्ण उपन्यास षी और षी की वापसी के लेखक, 26 जून। कर्क लग्न, कर्क में सूर्य, बुध, शनि तुला मे मंगल, कुंभ मे चन्द्र, मीन मे नेप्चून, मेष मे गुरू, वृष मे यूरेनस, मिथुन मे शुक्र,।
 ब्रेम स्टोकर-संसार के सर्वाधिक हाॅरर और विश्वविख्यात उपन्यास ड्राकूला के लेखक 18 नवम्बर 1847। वृश्चिक लग्न, लंदन मृत्यु-20 अप्रैल 1912। वृश्चिक लग्न, लग्न मे सूर्य, बुध, कुंभ मे षनि, मीन मे चन्द्र केतुु, मेष मे मंगल,मिथुन मे गुरू, कन्या मे नीच का शुक्र व राहू। उ. उ. भाद्रपद द्वितीय चरण। मंगल, बुघ गुरू वक्री।
 देवकी नंदन खत्री- 23 दिसम्बर 1967। संाय- 5.18। मुजफ्फरपुर, बिहार। मिथुन लग्न, सिंह मे राहू, वृश्चिक मे चन्द्र, शनि, बुध, धनु मे सूर्य, मंगल, मकर मे शुक्र, कुंभ मे गुरू, केतु।
अमृता प्रीतम-31. 8. 1919। दोपहर 1.30 । गूजरवाला, पंजाब। मिथुुन कर्क मेे मंगल, गुरू, बुध, सिंह मे सूर्य, शनि, कन्या मे शुक्र, तुला मे चन्द्र, वृश्चिक मे राहू, वृष मे केतु।
 बंकिमचन्द्र बन्द्योपाध्याय- 27 जून 1838। रात्रि-9.10। नैहाटी, बंगाल। मकर लग्न, मीन मे राहू, वृष मे शुक्र, बुघ, मंगल, मिथुन मे सूर्य, सिंह मे  सूर्य, बुघ, कन्या मे केतु, वृश्चिक मे शनि।
 मुंशी प्रेमचन्द्र- 31. जुलाई 1880। वृष लग्न, बनारस। वृष मे चन्द्र, मिथुन मे केतु, कर्क मे सूर्य, शुक्र, बुध, सिंह मे मंगल, धनु मे राहू, मीन मे गुरू, मेष मे शनि।
शरतचन्द्र चटटोपाध्याय- 15 सितम्बर 1876। सांय-5.15। हुगली। कुंभ लग्न मे शनि, राहू, कर्क मे चन्द्र, शुक्र, सिंह मे मंगल केतु,  कन्या मे सूर्य, बुध, वृश्चिक मे गुरू।
लेखकों के ग्रह योगः- तृतीय भाव कविता, लेखन साहित्य का भाव है बुघ लेखन, पुस्तक, उपन्यास, मैगजीन, समाचार, संचार का है। जब कभी भी लग्न या चन्द्र लग्न से तृतीयेष लग्न या चन्द्र लग्न से केन्द्र या त्रिकोण मे जाय तो जो जातक मे साहित्यकार या कलाकार होगा बली तृतीय भाव हमेशा उत्तम साहित्यकार बनाता है।
1. लग्न या चन्द्र लग्न से द्वितीय भाव मे बली शुक्र हो तो जातक कवि होगा पंचम भाव बौधिक क्षमता का है। पंचमेष बली हो तो असाधारण लेखन क्षमता देेता है।
2. पंचमेश व नवमेश की युति या परस्पर दृष्टि जातक को उत्तम लेखक बनाती है।
3. कारकांश लग्न से पंचम या नवम भाव मे शुभ ग्रह हो तो जातक मे साहित्यकार होगा। 
4. स्वरसती योग इस योग मे जाॅर्ज बर्नाड शाॅ, अपटाॅन सिनक्लेयर, जैक लंडन, उमर खैयाम, रविन्द्र नाथ टैगोर के जमंाकांे मे यह योग विद्यमान था जब गुरू, बुध व शुक्र लग्न या चन्द्र लग्न से केन्द्र या त्रिकोण मे या द्वितीय भाव मे स्थित हों तो स्वरसती योग बनता है।
5. पंचमेश यदि 11 वें भाव मे जाये तो जातक लेखक हो।
6. तृतीय भाव मे बली शुभ चन्द्र, बुध, गुरू, शुक्र ग्रह उच्च या स्व्रगही या मूल त्रिकोण के होकर बैठै या एक शुभ ग्रह बैठे उस पर दूसरे  शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो जातक लेखक हो।