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मायावी संसार का रहस्य
January 16, 2020 • -अनीता सिंह परिहार

किसी मनुष्य का भूतकाल मे चले जाना या किसी ऐसे दृश्य या वस्तु को देखना जिनका कोई अस्तित्व ना हो असंभव सा लगता है। परन्तु इतिहास मे कुछ ऐसी प्रामाणिक घटनायें घटी जो ना केवल अचरज भरी थीं बल्कि उन्हें नकार पाना संभव नही है। कुछ वैज्ञानिको ने समय के फिसलन के सिद्धान्त के आधार पर इन घटनाओं की व्याख्या करने की कोशिश की है।
 घटना 10 अगस्त 1901 की है, इंग्लैण्ड के आॅक्सफोर्ड युनिवर्सिटी के सेंट हम्स काॅलेज की प्रचार्या शालेटी एनी मोरबल तथा उपप्रचार्या एलिएनोर फ्रान्सिस जूरडैन फ्रान्स के ‘पैलेस आॅफ वर्सेल्टन’ के वैसल्स सुन्दर उद्यान मे दोपहर मे घूम रही थी अचानक वे भारी अवसाद अनुभव करने लगीं अचानक उन्होने पेटिट  ट्रायनन देखने का निश्चय किया जो किसी जमाने मे फ्रान्स के राजा लुई 16 वें तथा उनकी रानी मेरी एण्ट्वायनेट का निजी आवास था वे बातचीत करते हुये रास्ता भटक गयीं अचानक उन्होंने खुद को एक विचित्र बगीचे मे खड़ा पाया उन्हें दो आदमी दिखे जिन्होंने सदियों पुराने लंबे कोट और पुराने ढंग के टोप पहने थे जिन्होंने दोनों महिलाओं को आगे बढ जाने का संकेत दिया आगे उन्हें पुराने ढंग के वस्त्र पहने एक बदसूरत सा आदमी दिखा वे कुछ भयभीत होकर आगे बढ गयीं। फिर एक पुराने जमाने के एक राजसी आदमी ने उन्हें पेटिट ट्रायनन का पता बताया आगे उन्हें राजमहल के दर्शन हुये महल के पास घास के मैदान पर जमीन पर कोई चित्र बनाती हुयी एक महिला दिखी दोनों महिलायें महल मे घुस गयीं तभी उन्होंने देखा कि महल के अंदर कोई विवाह समारोह हो रहा था कुछ देर बाद दोनों महिलायें लौट आयीं लौटते हुये उन्हें कोई नही दिखाई दिया बगीचे महल सब वीरान थे। एक माह बाद इंग्लैण्ड लौटन पर उन्होंने फ्रान्स के इतिहास का अध्ययन किया तो उन्हे ज्ञात हुआ जिस दिन वे वैसल्स सुन्दर मे दोपहर मे घूम रही थी उसी दिन 119 वर्ष पूर्व 10 अगस्त 1782 को फ्रान्स के राजा लुई 16 वें तथा उनकी रानी मेरी एण्ट्वायनेट को पेरिस मे एक छोटंे से कमरे मे कैद कर लिया गया था और उन्हें भारी वेदना सहनी पड़ी थी तब महल व बगीचा उसी रूप मे थे जैसा दोनों प्राचार्यों ने देखा था  इस दौरान उन्हें रानी मेरी एण्ट्वायनेट का चित्र मिला वे उसे देख कर दंग रह गयी यह वही महिला थी  जो उस दिन बाग मे जमीन पर चित्र बना रही थी। दो वर्ष बाद उन दोनों ने पुनः पैलेस आॅफ वर्सेल्टन’ के वैसल्स उद्यान की यात्रा की तो उन्हें वह महल और उद्याान कही नही दिखा लोगों ने बताया कि यह तो बरसों से वर्तमान रूप मे ही है। कई पुरानी पुस्तकों के अध्ययन के बाद यह सुनिश्चित हुआ जो महल व बाग उन्होंने दो वर्ष पूर्व देखा था वह 119 वर्ष पूर्व के महल व उद्यान से हूबहू मिलता था अपने अनुभव और शोध के आधार पर दोनों अध्यापिकाओं ने एक पुस्तक एन एडवेंचर लिखी।