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मैं छोड़ कर गली को तेरी आ गया मगर
June 13, 2020 • बलजीत सिंह बेनाम • Views

बोझल किया है हिज्र की रातों ने उम्र भर
बिस्मिल किया है वस्ल के नगमों ने उम्र भर

वो कैसे चाहे और निगाहों में जा रहूँ
चाहा है जिसको मेरी निगाहों ने उम्र भर

मरने के थे कगार पे क्या भूल तुम गए
जिंदा रखा है तुमको दुआओं ने उम्र भर

मैं छोड़ कर गली को तेरी आ गया मगर
पीछा किया है तेरी वफाओं ने उम्र भर

बेनाम को ये नफरतें तो छू न पाएंगी
बाँधा है उसको प्यार के धागों ने उम्र भर