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मिजोरम शरणार्थीं वोटरों का मुद्दा
November 15, 2019 • रंजीत सिंह यादव

पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में शरणार्थियों का मुद्दा लगातार गरमा रहा है अगामी 28 नवंबर को होने वाले विधान सभा चुनावों में मतदान के मुद्दे पर उभरेता जा विवाद ने राज्य के प्रमुख गृह सचिव की बलि लेली है। अब इस से चुनावों के शांतिपूर्ण आयोजन पर भी खतरा मंडराने लगा है। मुख्य चुनाव अधिकारी की शिकायत पर चुनाव आयोग ने बीते सप्ताह उनको हटा दिया। अब मुख्य चुनाव अधिकारी को हटाने की मांग में तमाम संगठनों ने प्रदर्शन शुरू किया है। इससे राजधानी समेत पूरे राज्य में सामान्य जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मुख्यमंत्री ने भी उनको हटाने के लिए मोदीजी को पत्र भेजा है। मिजोरम में वर्ष 1997 की जातीय हिंसा के बाद पलायन करने वाले हजारो शरणार्थी पडासी त्रिपुरा स्थित शरणार्थी शिविरों में रह रहे है।. इन लोगो ंकी मांग है कि पहले की तरह इन शिविरों में ही पोस्टल बैलट के जरिए उनके मतदान का इंतजाम किया जाए. लेकिन राज्य के तमाम नागरिक और गैर-सरकारी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
 राज्य में 1997 में हुई हिंसक झड़पों के बाद जनजाति के हजारों लोग भागकर पड़ोसी त्रिपुरा में चले गए थे, वह वहां शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। अब तक वह लोग पोस्टल बैलट के जरिए वोट डालते थे। इन शरणार्थियों के संगठन मिजोरम एमबीडीपीएफ ने जहां मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर शरणार्थी शिविरों में मतदान केंद्र स्थापित करने की अपील की है वहीं वाईएमए ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इन शरणार्थियों को मिजोरम में आकर ही वोट देना होगा. कई अन्य गैर-सरकारी संगठनों ने आयोग से अपील की है कि पुनर्वास पैकेज के तहत मिजोरम नहीं लौटने वाले शरणार्थियों को मतदान का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए.
मुख्य चुनाव अधिकारी का कहा हैं, चुनाव आयोग ने विस्थापित परिवारों के लिए मतदान की व्यवस्था करने का निर्देष दिया है। वह बताते हैं कि त्रिपुरा में रहने वाले इन वोटरों ने 2013 के विधान सभा चुनावों में अपने राहत शिविरो ंमें ही मतदान किया था। उसके बाद अगले साल हुए लोकसभा चुनावों में भी इन विस्थापित वोटरों ने मतदान किया था. केंद्र सरकार त्रिपुरा व मिजोरम सरकारों की सहायता से इन विस्थापित लोगों को वापस मिजोरम लौटाने का प्रयास कर रही है। लेकिन जन जाति के ज्यादातर लोगों ने पुनर्वास पैकेज को असंतोषजनक बताते हुए मिजोरम लौटने से इंकार कर दियाहै।
 दूसरी ओर जनजाति के विस्थापित लोगों के संगठन मिजोरम एमबीडीपीएफ के  महासचिव ने कह, वह लोग पहले की तरह राहत शिविरों में पोस्टल बैलट से मतदान कराने के पक्ष में हैं. उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि आखिर पोस्टल बैलट प्रणाली को खत्म क्यों कर दिया गया है? आयोग ने कहा, है कि त्रिपुरा में रहने वाले इन लोगों को मिजोरम सीमा में बने मतदान केंद्रों तक जाकर वोट डालना होगा। इन शिविरों में रहने वाले वोटरों में से ज्यादातर महिलाएं और बुजुर्गहैं। उनके लिए मिजोरम पहुंचकर मतदान करना असंभव है, संगठन ने कह, मिजोरम में इन शरणार्थियों को खतरा भी हो सकता है।