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नेपाल राजघराने विनाश की भविष्यवाणी
January 12, 2020 • आर.पी. शर्मा

1 जून 2001 की रात 11 बजे को नेपाल के युवराज दीपेन्द्र वीर विक्रमशाह ने शाही महल नारायन पैलेस मे अपने प्रेम विवाह के मामले को लेकर अपने पिता महाराज वीरेन्द्र विक्रमशाह देव, महारानी ऐश्वर्या, युवराज निरंजन, राजकुमारी श्रुति, राजकुमारी शांति, व राजकुमारी शारदा, राजकुमारी शारदा के पति कुमार विक्रमशाह और जयन्ती शाह की हत्या कर दी, और महल के शिव मंदिर मे खुद को गोलीमार कर आत्महत्या कर ली। युवराज के विवाह को लेकर कई दिनों से राजकुमार का अपने से परिवार से विवाद चल रहा था राजकुमार महाराजा के विरोधी नेपाल के राणा परिवार की राजकुमारी देवयानी राणा से विवाह करना चाहते थे जबकि महाराज उनका विवाह अन्य लड़की से करवाना चाहते थे। महाराजा को युवराज के विवाह से संबधित एक पुरानी भविष्यवाणी परेशान कर रही थी। नेपाल के राज ज्योतिषी ने बताया था कि युवराज दीपेन्द्र की कुण्डली मे वंश वध का योग है। और उनका विवाह किसी भी हालत मे 35 साल से पूर्व नही करें। यदि विवाह 35 साल से पूर्व किया गया तो महाराज की मृत्यु निश्चित है। उपरोक्त भविष्यवाणी पूर्णरूप से सत्य सिद्ध हुयी नेपाल मे प्रचलित एक 230 पुरानी भविष्यवाणी के अनुसार नेपाल का राजपरिवार एक साधु के शाप से अभिशप्त है नेपाल राजवंश का दुःखद अंत निश्चित था नेपाल में शाह वंश की स्थापना महाराजा पृथ्वी नारायण शाह ने 1768 मे की थी। और कई राज्यों मे बंटे नेपाल को एकता के सूत्र मे बांधा था। कहा जाता है कि महाराजा एक बार काठमांडू घाटी की ओर जा रहे थे तो उन्हें सिद्ध गुरू गोरखनाथ मिल गये। महाराज ने उनको दही भेंट की। साधु ने वो ही पीकर पुनः उगल कर राजा को वापस कर दी इससे पृथ्वी नारायन नाराज हो गये और उन्हांेने दही को जमीन पर फेंक दिया जिससे उनके दोनांे पैर सन गये। साधु को यह नागवार गुजरा उसने राजा के अभिमान की निंदा करते हुये कहा कि यदि तुम मेरा प्रसाद ग्रहण कर लेते तो तुम्हारी हर मनोकामना पूरी हो जाती। साधु ने शाप देते हुये कहा कि राजा के पैरो के दसों उंगलियों पर गिरी दही का अर्थ है। कि उनका वंश 10 पीढियों बाद समाप्त हो जायेगा। राजा वीरेन्द्र विक्रमशाह देव राजवंश की 11 वीं पीढी मे थे। काठमंाडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और प्रख्यात ज्योतिषी मिलनशाक्य के अनुसार इस भविष्यवाणी का नेपाल के इतिहास मे प्रमुख स्थान है। उनके अनुसार हत्याकांड की दुःखद घटनायें 230 वर्ष पुरानी भविष्यवाणी से उपजी है। भविष्यवाणी सौ फीसदी सत्य हुयी और नये राजा विक्रम ज्ञानेन्द्र सिंह के शासन काल मे प्रजा ने नेपाल में राजशाही के खिलाफ आंदोलन चलाया और नेपाल मे प्रजातांत्रिक शासन की स्थापना हुयी।